…….तो डेढ़ सौ रिपोर्टों के बाद एक रिपोर्ट और सही

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kumarराजबब्बर जी ने ‘इन्साफ का तराज़ू’ में अस्मत लूटने का एक दृश्य किया था, शत्रुघ्न सिन्हा जी ने ‘शैतान’ फ़िल्म में ऐसा ही एक दृश्य किया था, अमिताभ बच्चन जी ने कई फिल्मों में ईश्वर तक को बुरा-भला कहा है। तो क्या अभिनय के दौरान उनके व्यवसायिक जीवन में निभाए गए स्क्रिप्टेड किरदारों की वजह से उन पर इल्ज़ाम लगाया जा सकता है?

क्या खलनायक का किरदार निभाते समय किये गए अपराधों के लिए कांग्रेस (राज बब्बर) और भाजपा (शत्रुघ्न सिन्हा) को कटघरे में खड़ा कर देना चाहिए?

क्या कवि-सम्मेलनीय मंच पर बोले गए स्क्रिप्टेड जुमलों की वजह से हिन्दू, मुस्लमान, सिख, ईसाई, जैन, पठान, जाट, ब्राह्मण, राजपूत, महिला, नर्स, टीचर, संत, कवि, बंगाली, बिहारी, केरलवासी, मारवाड़ी इत्यादि हर गुट को मेरे खिलाफ हो जाना चाहिए?

जिस तरह से सात-आठ-दस साल पहले बोले गए जुमलों की वजह से आज अचानक भावनाएँ आहत होने लगी हैं, मुझे तो लगता है कि इसमें कोई पेंच ज़रूर है। फिर भी, यदि किसी भी वर्ग, दल, उम्र, क्षेत्र, धर्म, समुदाय, संगठन के किसी मित्र की भावना सच में आहत हुई है, उनसे हाथ जोड़ कर फिर से क्षमा माँगता हूँ।

और यदि आप राजनीति से प्रेरित हो कर मुझे डराना या परेशान करना चाह रहे हैं, तो डेढ़ सौ रिपोर्टों के बाद एक रिपोर्ट और सही। पंद्रह हमलों के बाद सोलहवां और सही। सच की लड़ाई लड़ने वालों के साथ यही सुलूक करती आई है सियासत। लेकिन भ्रष्टाचार और राजनीतिक दम्भ के आगे अब घुटने नहीं टेकेंगा यह देश।

….. आआपा के विधायक एवं दिल्ली में केजरीवाल सरकार के अहम कबीना मंत्री कुमार विश्वास अपने फेसबुक वाल पर सफाई देते हुये

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