तबादले पर बवाल है-उठते कई सवाल हैं

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जाने-माने एकंर-टीवी जर्नलिस्ट अरविन्द प्रताप अपने फेसबुक वाल पर ….

देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवा मानी जाती है यूपीएससी, जिसके अंतर्गत दृढ़ इच्छाशक्ति ओर कठिन परिश्रम से देश के युवा इस सेवा में शामिल होकर विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं देते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि संदीप कदम, मनोज कुमार, भोर सिंह, इंद्रजीत महथा, पी मुरुगन और नैंसी सहाय जैसे कई और अन्य अधिकारी ही क्यों शिद्दत के साथ सिस्टम और समाज को सुधारने का बीड़ा उठाते हैं, क्यों अन्य अधिकारी ये जिम्मा नहीं निभाते, इसी शून्यता में कुछ अधिकारी अच्छा कार्य करके समाज मे हीरो बन जाते हैं।

लेकिन सवाल है क्या कमी रह जाती है उन युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण में जो आईएएस आईपीएस बनकर भी अपनी जिमेवारी एक सामाजिक अधिकारी बन कर लोगों का दर्द दूर नही करते।

क्यों कोई प्रशिक्षु अधिकारी उन अधिकारियों पर भी भारी पड़ जाता है जिन्हें सिविल सेवा का लंबा अनुभव होता है, यूपीएससी क्वालीफाई कर के गहन प्रशिक्षण के बावजूद क्यों चंद अधिकारी ही उस कसम का मान रख पाते हैं, जो ट्रेनिंग के बाद कसम खा कर वे लेते हैं।

मुझे लगता है कि गहन चिंतन की जरूरत है कि कुछ लोग ही नायक क्यों बन पाते हैं, जबकि सबकी समान ट्रेनिंग होती है, एक बात और समाज की बुराइयों और सिस्टम को दुरुस्त करने का जिम्मा तो है ही इनके कंधों पर यही तो करने आये हैं। कुछ ऐसे ही नायकों को तस्वीर जिन्हें मैं जानता हूं।

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