डिजीटल ‘वायर’ में फंसे भाजपा के ‘शाह’

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भाजपा और इसकी अगुआई वाली केंद्र सरकार को उस समय से बड़े सियासी भूचाल का सामना करना पड़ रहा है, जब से एक वेबसाइट ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की कंपनी का कारोबार एक साल में ही 16 हजार गुना बढ़ जाने की खबर प्रकाशित की है।

वेबसाइट के मुताबिक मोदी सरकार के वजूद में आने और शाह के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद इस कंपनी के कारोबार में जबरदस्त उछाल देखने को मिली है।

न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ पर रविवार को प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा अध्यक्ष के बेटे जय अमित शाह की कंपनी टेम्पल इंटरप्राइजेज लिमिटेड के राजस्व में 16 हजार गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जारी रिपोर्ट में वेबसाइट ने दावा किया है कि जय की कंपनी को वर्ष 2015 में राजेश खांडवाला के स्वामित्व वाली वित्तीय सेवा फर्म से 15.78 करोड़ रुपये का कर्ज मिला था और उसी के बाद उसके राजस्व में जबरदस्त तेजी आई। खांडवाला राज्यसभा  सदस्य और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शीर्ष अधिकारी परिमल नाथवानी के समधी हैं।

द वायर ने ‘द गोल्डन टच ऑफ जय अमित शाह’ शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह कर्ज मिलने के पहले टेम्पल इंटरप्राइजेज का कारोबार लगभग नगण्य था। इसके पहले के लगातार दो वित्त वर्षों- 2012-13 और 2013-14 में कंपनी को क्रमश: 6,230 रुपये और 1,724 रुपये का नुकसान हुआ था। लेकिन खांडवाला की फर्म से कर्ज मिलने के बाद कंपनी के कारोबार में जबरदस्त उछाल देखने को मिली। हालांकि अक्टूबर 2016 में इस कंपनी ने अचानक ही अपना कामकाज बंद करनेे का ऐलान कर दिया।

वेबसाइट के मुताबिक टेम्पल इंटरप्राइजेज को एक सहकारी बैंक और एक सार्वजनिक उपक्रम से भी कर्ज मिला था। कंपनी को कालूपुर कमर्शियल कोऑपरेटिव बैंक से 25 करोड़ रुपये और भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा) से 10.35 करोड़ रुपये के कर्ज मिले थे।

जय अमित शाह ने अपने एक बयान में वेबसाइट की रिपोर्ट को ‘अपमानजनक’ बताते हुए कहा है कि वह इसके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराएंगे। उन्होंने द वायर के मालिकों, इसके संपादक और इस रिपोर्ट के लेखक के खिलाफ 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करने की बात कही है।

उन्होंने कहा है, ‘इस समाचार लेख में मेरे खिलाफ गलत, अपमानजनक एवं मानहानि करने वाला आरोप लगाता है। इसके जरिये लोगों के दिमाग में मेरे प्रति ऐसी धारणा बनाने की कोशिश की गई है कि मुझे अपने कारोबार में अपने पिता की सियासी हैसियत के चलते कामयाबी मिली है।’

बहरहाल इस समाचार रिपोर्ट ने कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों को भाजपा और केंद्र सरकार पर हमले का मौका दे दिया। कांग्रेस ने तो इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच करवाने की मांग की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘जिस कंपनी के पास कोई इनवेंट्री या परिसंपत्ति नहीं है, वह आखिर 80.5 करोड़ रुपये का कारोबार कैसे कर सकती है? क्या प्रधानमंत्री इस मामले में अमित शाह के बेटे के खिलाफ सीबीआई जांच का निर्देश देंगे?’

विपक्ष के हमलावर तेवरों को देख सरकार भी हरकत में आई। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस रिपोर्ट को ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताते हुए कहा कि जय शाह ने पूरी तरह कानूनी दायरे में रहते हुए कारोबार किया है और उनके आयकर रिटर्न से यह झलकता भी है।

जहां तक बैंकों या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से लिए गए कर्जों का सवाल है तो वे भी निर्धारित नियमों के मुताबिक ही दिए गए थे। गोयल ने कहा कि एनबीएफसी से लिए गए कर्जों का स्रोत पर कर कटौती के बाद ब्याज समेत पूरा भुगतान किया जा चुका है।

गोयल ने कहा कि इरेडा की तरफ से जय की कंपनी को कर्ज दिए जाने के बारे में शुक्रवार तक उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उस दिन वेबसाइट की तरफ से भेजी गई प्रश्नावली में इस कर्ज का जिक्र किया गया था। दरअसल गोयल ही नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री थे जब उनके मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम इरेडा ने टेम्पल इंटरप्राइजेज को कर्ज दिया था। गोयल ने कहा कि टेम्पल उन 2,000 कंपनियों में से एक थी जिन्हें इरेडा ने कर्ज दिया था।

इस बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में भाजपा अध्यक्ष और सरकार पर कड़े हमले किए। उन्होंने कहा, ‘हमें आखिरकार नोटबंदी का इकलौता लाभार्थी मिल गया है। वह रिजर्व बैंक, गरीब या किसान न होकर नोटबंदी का ‘शाह’ है। जय अमित।’ मोदी और शाह के गृह राज्य गुजरात में दो महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस इस मुद्दे को उछाल सकती है। राहुल सोमवार से ही गुजरात के दौरे पर जाने वाले हैं।

गुजरात में जड़ें जमाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच करवाने की मांग की। आप ने कहा, ‘जय शाह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और उनकी कंपनी की जांच की जाए। इस बारे में अमित शाह से भी पूछताछ होनी चाहिए।’ हालांकि इन हमलों से बेअसर अमित शाह ने दिल्ली में कनॉट प्लेस से माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यालय तक पदयात्रा की अगुआई की।

माकपा शासन वाले केरल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याओं के विरोध में भाजपा ने पदयात्रा की। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने इस मामले में कहा, ‘मोदी के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार का यह सबसे नया मामला है। बिड़ला-सहारा डायरी, जीएसपीसीएल, व्यापम, ललित मोदी, चावल और खान घोटालों के बाद यह मामला। प्रधानमंत्री इस पर चुप क्यों हैं?’  ( साभारः बिजनेस स्टैंडर्ड)

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