टोल गेट पुंदाग (ओरमांझी) का तमाशा: ठेकेदार का है रोना, यहां होता है भारी नुकसान

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nh33मुकेश भारतीय

रांची। नेवरी विकास (रांची) से हजारीबाग एन.एच 33 फोरलेन अवस्थित पुंदाग ओरमांझी टोल गेट के ठेक्दार का अपना ही रोना है। उनका कहना है कि यहां प्रतिदिन 14.5 लाख रुपये सरकार को वसूल कर देना होता है। इस काम में उन्हें व्यापक पैमाने पर नुकसान होता है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रावधान के अनुसार भारत के महमहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उप राष्ट्रपति, सचिव राज्यसभा, सचिव लोकसभा, केन्द्रीय मंत्री, लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानमंडलों में प्रतिपक्ष के नेता, जिनका स्तर कैबिनेट मंत्री का है, राज्यों के राज्यपाल, मुख्य न्यायमर्ति, न्यायाधीश, केन्द्रीय और राज्य विधान मंडल के स्पीकर या सभापति, संपूर्ण देश के संसद सदस्य, विधानसभा या परिषद के सदस्य, आर्मी कमांडर अथवा उप सेनाध्यक्ष या उनके समकक्ष, भारत के शासकीय दौरे पर उच्च पदस्थ विदेशी व्यक्ति, सीडी या डीसी प्रतीक वाली कारों का उपयोग करने वाले विदेशी राजनायिक, वीरता पुरस्कार अथार्त परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र विजेता..जब स्वंय वाहन में हों, उन्हें टोल टैक्स में छूट है। 

लेकिन यहां माजरा कुछ और ही है। अदद विधायक. पुर्व विधायक, पंचायत जनप्रतिधि आदि की तो छोड़िए, उसके चेले चपाटी भी बिना टैक्स दिए ही जबरन गुजर जाते हैं। राजनीतिक-गैर राजनीतिक क्षेत्र से परोक्ष अपरोक्ष रुप से जुड़े दबंग ताल ठोक जाते हैं सो अलग। ठेकेदार के अनुसार 40 फीसदी वाहन ऐसे ही वजहों से टैक्स भुगतान नहीं करते।

ठेकेदार की मानें तो झारखंड में टोल टैक्स वसूली में नुकसान की एक बड़ी वजह बारंबार बंदी का दौर भी होता है। कभी नक्सली बंद तो कभी कुछ और बंद। एक दिन बंद का असर यहां तीन दिनों तक रहता है। इस दौरान स्थानीय छोटे वाहनों के आलावे बाहर के वाहनों की आवाजाही बिल्कुल कम होती है। जबकि उन्हें करार के मुताबिक सरकार को इस दौरान प्रति दिन 14.5 लाख रुपये देना ही होता है।

उल्लेखनीय है कि पुंदाग टोल गेट का टेंडर हर साल बढ़ी हुई राशि पर हर साल निकाला जाता है। सबसे पहले कोलकाता की एक कंपनी ने टेंडर लिया और भारी नुकसान का रोना रोते हुए अगले साल हाथ खड़े कर दिए। बीच में 3-4 माह तक एक स्थानीय पेटी ठेकेदार ने भी इस टैक्स वसूली के कार्य किये। इस वर्ष अप्रैल,2016 से मुंबई की एक नामी कंपनी ने काफी ऊंची कीमत पर टेंडर लिया है।

सबाल उठता है कि टोल गेट ठेकेदारों को जब भारी नुकसान होता है तो फिर हर साल बढ़ती दर से भी काफी अधिक के टेंडर क्यों लेते हैं। जाहिर है कि कहीं न कहीं गड़बड़झाला जरुर है। 

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