टैटू बनवाएं लेकिन जरा संभल कर

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tattoआज के युवा किसी भी काम में पीछे नहीं है। चाहे वो छोटे शहर के युवा हो या महानगर के, फैशनबैल दिखने की होड़ में सब लगे हुए है, और इधर कुछ सालों में टैटू का क्रेज युवाओं के सर चढ़ कर बोल रहा है। पुरुष हों या महिलाएं, बच्चे हों या युवा, टैटू गुदवाने की होड़ में कोई पीछे नहीं रहना चाहता। बड़े-बड़े महानगरों के छोटे शहरों में भी टैटू ने युवाओं के बीच अपनी महत्वपूर्ण जगह बना ली है, खासकर कॉलेज गोइंग स्टूडेंट्स में टैटू बनवाने के लिए काफी हलचल मची रहती है।  जिस कारण इसकी बढ़ती मांग देखते हुए हर जगह टैटू पार्लर खुल रहे हैं। पॉर्लरों में हर डिजाइन और हर तरह के टैटू बनाये जा रहे हैं। कुछ युवा फैशन के लिए टैटू बनवा रहे हैं तो कुछ अध्यात्म से जुड़ कर, कोई अपनी श्रद्धा से तो कोई अपने प्यार का इजहार करने के लिए टैटू बनवा रहे हैं. टैटू बनवाने की दर 600 से 800 रुपये प्रति स्क्वायर इंच है।

                       लेकिन, टैटू के दीवानों, जरा संभल जाइए, टैटू गुदवाने का यह शौक आपको काफी महंगा पड़ सकता है। यहां तक कि सेना में इंट्री भी नहीं मिल सकती है। चिकित्सकों के अनुसार टैटू बनाने के लिए प्रयोग की जाने वाली स्याही में कई तरह के विषैले तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए हानिकारक होते है और इससे त्वचा कैंसर का खतरा होता है। खासतौर से टैटू बनाने वालों द्वारा प्रयोग की जाने वाली नीले रंग की स्याही में कोबाल्ट और एल्युमिनियम होता है। जबकि लाल रंग की स्याही में मरक्युरियल सल्फाइड और दूसरे रंगों की स्याहियों में शीशा, कैडियम, क्रोमियम, निकिल, टाइटेनियम और कई तरह की दूसरी धातुएं मिली होती हैं। डॉक्टर्स कहते है कि ऐसा नहीं है कि टैटू बनवाने वाले हर इंसान को त्वचा रोग हो, लेकिन टैटू की स्याही में आर्सेनिक होता है, जिसकी वजह से त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ जाता है और बहुत से युवा त्वचा को टैटू से होने वाले नुकसान को समझ नहीं पाते हैं। कुछ डिजाइनों में टैटू उकेरने वाली सुईयों को शरीर में चुभाया जाता है। जिससे मांसपेशियों तक को नुकसान पहुंचता है। इसलिए शरीर पर तिल वाले स्थान पर टैटू नहीं बनवाना चाहिए। क्योंकि तिल के आस-पास या तिल पर टैटू बनवाने से तिल में आ रहे बदलावों पर ध्यान नहीं जा पाता जो बाद में त्वचा कैंसर का कारण हो सकता है। इसलिए टैटू के शौकीनों को इसके लिए ऐसी जगहों का चुनाव करना चाहिए, जहां टैटू बनाने के लिए साफ सुथरे औजारों का प्रयोग किया जाता  हो।

                             वहीं युवाओं में शरीर पर टैटू बनवाने के बढ़ते चलन और टैटू से होने खतरों को देखते हुए तीनों सेनाओं ने एक नीतिगत कदम उठाया है, और ऐसे उम्मीदवारों को फौज में भर्ती नहीं करने का फैसला किया है। क्यूंकि  कुछ समय से सैन्य बलों में भर्ती के लिए आने वाले बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के शरीर पर टैटू पाए जा रहे थे और किसी मानक नीति के अभाव में यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा था कि इन उम्मीदवारों को सैन्य सेवा में लेना है या नहीं। फौज में भर्ती के लिए आने वाले उम्मीदवारों के शरीर पर टैटू पाए जाने के चलन को देखते हुए तीनों सैन्य बलों में इस बात पर गहन विचार-विमर्श हुआ,जिसमें अमरीका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे आधुनिक देशों की सेनाओं से भी राय ली गई। सेना के अधिकारियों के अनुसार इस नीति में कहा गया है कि शरीर पर टैटू पाया जाना सैन्य अनुशासन के अनुरूप नहीं है। सैनिक के शरीर पर कोई ऐसा स्थाई निशान या आकृति नहीं होनी चाहिए जो फूहड़ या उत्तेजक हो।  शरीर पर ऐसा कोई निशान नहीं बनाया गया हो जो वर्दी पहनने के बाद शरीर पर दिखाई दे।
लेकिन  भर्ती में ऐसे छोटे टैटू की अनुमति दी गई है जो हथेली के अगले या पिछले हिस्सों, बाह, कोहनी के भीतरी हिस्से और कलाई पर बनाए जाते हैं। जनजातीय उम्मीदवारों के परंपरागत टैटू की भी अनुमति दी गई है लेकिन इसके लिए हर मामले पर अलग से गौर किया जाएगा और इन निशानों को तीनों सैन्य मुख्यालयों में निर्णय लिए जाएंगे। भर्ती वाले उम्मीदवारों के शरीर पर बने  टैटू के आकार और प्रकार पर कोई अंकुश नहीं लगाया गया है लेकिन किसी आपत्तिजनक टैटू होने के मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार भर्ती संगठन को दिया गया है।

      इसलिए फैशनबैल दिखाना बुरी बात नहीं है, लेकिन ऐसे फैशन का क्या फायदा, जो मुसीबत लेकर आए। इसलिए टैटू के मामले में थोड़ी सावधानी तो बरतनी ही चाहिए। 

 …….प्रतिमा

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