टीपू सुल्तान जयंती समारोह को लेकर हुई हिंसक झड़प में विहिप कार्यकर्ता की मौत

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tipu-vhp_dethबेंगलुरु में टीपू सुल्तान की जयंती मनाई गई। राज्य सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी कैबिनेट के कई मंत्रियों ने हिस्सा लिया। वहीं, दूसरी ओर जयंती कार्यक्रम के विरोध को लेकर दो समुदाय के लोगों के बीच हुई हिंसक झड़प में विश्व हिंदू परिषद के 50 साल के एक कार्यकर्ता कुतप्पा की अस्पताल में मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि दोनों गुटों के बीच हुई पत्थरबाजी के दौरान कुतप्पा के सिर पर लगी चोट की वजह से उनकी मौत हो गई।

विश्व हिंदू परिषद और हिंदू सेना ने टीपू सुल्तान को हिंदू विरोधी बताते हुए राज्य सरकार के जयंती मनाने के फैसले का बहिष्कार करने का ऐलान किया था।

वहीं, भाजपा ने कर्नाटक में 18वीं सदी के प्रसिद्ध शासक टीपू सुल्तान की जयंती पर राज्य सरकार द्वारा आयोजित समारोह का बहिष्कार किया। उसने टीपू को धार्मिक रूप से कट्टर करार दिया है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद जोशी ने कहा, हमारी ओर से पूरी तरह से बहिष्कार किया गया, हमारी पार्टी की ओर से किसी भी स्तर के प्रतिनिधि ने आधिकारिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया।

उन्होंने टीपू को कट्टरपंथी और कन्नड़ विरोधी करार देते हुए कहा, हमारे 44 विधायक हैं। प्रथा के अनुसार ऐसे किसी कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय विधायक करता है। हमने अपने विधायकों को निर्देश दिया है कि वे इस कार्यक्रम की अध्यक्षता नहीं करें, उन्हें मंच पर नहीं जाना है। भाजपा प्रदेश में विपक्ष में है।

कई संगठनों ने 10 नवंबर को टीपू सुल्तान जयंती के तौर पर मनाने के राज्य सरकार के निर्णय का विरोध किया है।

कुछ ने पहली बार आयोजित होने वाले ऐसे सरकारी कार्यक्रम को बाधित करने की भी धमकी दी।

हाल में उडुपी में पेजावर मठ के विश्वेश तीर्थ स्वामी ने टीपू की जयंती मनाने के सरकार के निर्णय का विरोध किया था।

siddaramaiaदेशभक्त थे टीपू : सिद्धारमैया

टीपू मैसूर साम्राज्य के शासक थे, जिसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का कट्टर दुश्मन माना जाता था। वह मई 1799 में अपना श्रीरंगपटनम किला अंग्रेजी फौज से बचाते हुए मारे गए थे। उन्हें ‘मैसूर का शेर’ कहा जाता था।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपनी सरकार के टीपू जयंती मनाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि टीपू देशभक्त थे। उन्होंने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, एक तरह से स्वतंत्रता संघर्ष मैसूर की तीन लड़ाइयों से शुरू हुआ, उन्होंने लड़ाई में अपनी जान गंवा दी।

उन्होंने कहा, आरएसएस बिना वजह उन्हें बदनाम कर रही है, हम यह जयंती मना रहे हैं।  

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