टाटा नमक बहुत ताकतवर, मगर साहू जैन का नहीं !

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टाटा नमक।  बहुत ताकतवर। रघुवर को मिल गयी गद्दी।  मगर साहू जैन का नमक उतना पावरफुल नहीं।  रोहतास के मजदूरों का खून जो लगा है उसमे। रोहतास इंडस्ट्री बंद किया। 

arun_dasविरोध की आवाज़ दबाने के लिए टाइम्स ऑफ़ इंडिया ले आया बिहार में कि कोई आवाज़ न उठे।  मीडिया से सभी घबराते जो हैं। ख़ास कर वो जो चुनाव लड़ते हैं।

नवभारत टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया यहाँ पत्रकारिता के लिए नही लाया गया था। इसी काम के लिए बिहार में लाया गया था। आज कभी गुलज़ार रहा रोहतास और उस इलाके के लोग, उसके मजदूर आठ आठ आंसू रो रहे हैं। 

इस दर्द को मेरे जैसे बरौनी बेगुसराय के लोग शिद्दत से समझ सकते हैं या फिर समस्तीपुर कागज मिल, कटिहार जूट मिल, बंद पड़े चीनी मीलों के इलाके के लोग, मुजफ्फरपुर के लोग जिन्होंने आई डी पी एल को बंद होते देखा है, और विगत कई वर्षों से वैगन फैक्ट्री के बंदी की आशंका में जी रहे है – और वे सब जिन्होंने इंडस्ट्री बंद होनें का दंश झेला है। 

कितना मर्मान्तक दंश होता है और कितना दूरगामी इसका दुष्प्रभाव। कई पीढ़ियों तक पीछा करता हुआ।  भारत की पत्रकारिता की स्वायत्तता का अग्रणी कातिल भी है यही घराना। बाद में तो सभी उसके पीछे लग लिए। 

अपुन भी उस टाइम्स ऑफ़ इंडिया संस्थान का मुलाजिम रहा हूँ। मगर जिंदगी बीत गयी अन्याय का विरोध करते करते।  अभी भी सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे लड रहा हूँ। चला पत्रकार बनने बन गया ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता।  और वो भी पत्रकारों का।  जिनके बीच ऐसी कोई संस्कृति ही नही है।  सभी तुरत सम्पादक जो बनना चाहते हैं जो सिर्फ मालिकान / प्रबन्धन ही बना सकता है योग्यता नही। 

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…..भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य अरुण कुमार अपने फेसबुक वाल पर

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