राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष महुआ माजी का विरोध

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राजनामा.कॉम।  झारखण्ड प्रदेश महिला कांग्रेस कमिटी की अध्यक्ष आभा सिन्हा, झारखण्ड प्रदेश राष्ट्रवादी महिला कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष प्रभा सिंह, झारखण्ड प्रदेश राजद महिला की अध्यक्ष लीला दास एवं जैक अधिकार महिला मंच की प्रवक्ता व पूर्व पार्षद रानी कुमारी ने संयुक्त रूप से मोरहाबादी स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष झारखण्ड राज्य महिला आयोग के लिए मनोनीत अध्यक्ष का विरोध करने का संकल्प लिया है।

majh (1)साथ ही साथ उन्होंने मांग की है कि झारखण्ड राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद पर राजनीति के साथ-साथ सामाजिक सरोकार के अलावा वर्षों से अपने-अपने संगठन में सक्रिय रूप से भागीदारी निभाने वाली महिला की नियुक्ति की जाय।।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीति है कि नक्सली अराजकता को समाप्त किया जाय, लेकिन वर्तमान में जिस कथित लेखिका को यह पद दिया गया है वह नक्सलपंथ से जुड़ी है। जिसका सबसे बड़ा लिखित प्रमाण ‘मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ।  दस्तावेजनुमा उनकी कृति है, जिसके हर पात्र नक्सली साहित्य और नीति का पाठ पढ़ाते हैं

हमारी मांग है कि अगर साहित्यकार को ही बनाना है तो असली साहित्यकार को बनाया जाए, किसी नक्सली कलमची को नहीं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंन्त सोरेन ने सरकार के गठन के समय वादा किया था कि राज्य नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगाया जाएगा। यह विडम्बना है कि उन्होंने जिस दिन महुआ माजी को झारखण्ड राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया।  उस दिन भी उन्होंने नक्सली गतिविधियों पर विराम लगाने की बात की।

क्या मुख्यमंत्री को आर्इ.बी. या राज्य इंटेलिजेंस से कोर्इ सूचना नहीं दी जाती है कि महुआ माजी ने नक्सली दस्तावेज को एक आलेख के रूप में प्रस्तुत किया है और उसके लेखन में नक्सलियों द्वारा परोक्ष रूप से संचालित (अ) सामाजिक संगठनों का पूर्ण सहयोग लिया है।

उन्होंने कहा कि क्या अब मुख्यमंत्री जब सम्पूर्णता में महुआ माजी को तवज्जो दी है तो क्या वे ‘मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ, आलेख उपन्यास के अनुसार जादूगोड़ा में यूरेनियम का उत्खनन रोकेंगे और नक्सली नीति का समर्थन करेंगे?

इस प्रकरण को आगे बढ़ाते हुए 12 नवम्बर 2013 को संध्या 05 बजे अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में झारखण्ड सरकार का पुतला दहन किया जायेगा। इस अवसर पर मीरा चौरसिया, संगीता टोप्पो, मुन्नी देवी, सुची तिग्गा, नमीता सिंह, शानित लोहराइन, पोकलो कुजूर, शाति लकड़ा, बीना देवी, उषा देवी, भारती देवी, संगीता देवी, मीना कुमारी,अवनितका शर्मा, रानी देवी, रूपा देवी, रीना देवी, मीना देवी, गीता सिंह, प्रतिमा देवी सहित काफी संख्या में महिलाऐं उपस्थित थी। ।

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