झारखंड जर्नलिस्ट एशोसिएशन के अध्यक्ष पर सचिव ने लगाये गंभीर आरोप

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रांची (मुकेश भारतीय)। हाल के दिनों में पत्रकारों की एकता और अधिकार को लेकर चर्चा में आये  झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (JJA) के प्रदेश अध्यक्ष शहनवाज हसन की भूमिका पर कई गंभीर सबाल उठ खड़े हुये हैं। ये सबाल उनके अत्यंत करीबी माने जाने वाले टीवी जर्नलिस्ट एवं संगठन के प्रदेश सचिव अरविंद प्रताप ने उठाये हैं। श्री प्रताप द्वारा उठाये गये सबाल अनेक व्हाट्सअप ग्रुपों, खासकर मीडिया से जुड़े व्हाट्सअप ग्रुपों पर खूब वायरल हो रहे हैं।

इसके पहले खुद शहनवाज हसन ने ‘पत्रकारों की मन की बात’ नामक व्हाट्सअप ग्रुप में अरविंद प्रताप की व्हाट्सअप की पर्सनल टॉक की स्नेपशॉट को शेयर कर दिया। इसके बाद अरविंद प्रताप ने उसके पहले की हुई बातचीत को अनेक मीडिया ग्रुप में डाला।

अरविंद प्रताप ने [11:25 PM, 2/16/2017] को लिखा-

मित्रों, आज मेरी बारी है कल आपकी बारी है। बच के रहें शहनवाज़ हसन जैसे बहरूपिये से, जिसके हां में हां आपने नहीं मिलाया तो इसके अगले शिकार आप होंगे। आपको पूछना चाहिए शहनवाज़ हसन से कि मुझे किस गलती के कारण उसने ग्रुप से मुझे रिमूव किया, मित्रों JJA जैसे सन्गठन को सींचने में कुछ अंश मेरा भी है, लेकिन न्यूज़ वर्ल्ड के लोगों के हक़ मार कर बैठे शहनवाज़ हसन से जब मैंने न्यूज़ वर्ल्ड के लोगों की हक़ उनका सैलरी मांगी तो इसने मुझे रिमूव कर दिया।  अपना हक मांगने के कारण जो सन्गठन से किसी को रिमूव कर सकता है तो वह कैसा प्रदेश अध्यक्ष कैसा लीडर,

मैं अपने दिल की बात आपसे बयां करना चाहता हूं  मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह आदनी सन्गठन के आड़ में अपनी दुकानदारी चला रहा है। मैं सन्गठन में प्रदेश सचिव हूं आखिर बिना प्रदेश कमिटी के अनुशंसा के  मुझे रिमूव कैसे कर दिया। आपको ये सवाल उस आदमी से पूछना होगा कि क्या JJA शहनवाज़ हसन की पॉकेट संस्था है। क्या हम पत्रकारों का ज़मीर मर गया है कि शहनवाज़ हसन जैसे लोग हमारी इज्जत से खेल रहे हैं। बस मैं चाहता हूं कि उससे पूछें कि अरविन्द का कसूर क्या था। वर्ना शहनवाज़ हसन जैसे बहरूपिये को संगठन की आड़ में सबका शोषण करते रहेंगे। न्यूज़ वर्ल्ड के नाम पर शहनवाज़ हसन ने उगाही की, 3 महीने से ऑफिस बॉय सहित लगभग आधा दर्जन लोगों का सैलरी नहीं दिया। न्यूज़ वर्ल्ड का सीनियर रिपोर्टर और JJA का सक्रिय कार्यकर्ता प्रभात अपने पिता को लेकर वेलूर आपरेशन कराने गया उसने 3 महीने की बकाये में एक महीने की भी सैलरी नहीं दिया, लड़का रोता रहा, 5 हज़ार का पगार पानेवाला ऑफिस बॉय मृणाल अपने 3 महीने के पगार के लिए गिड़गिड़ाता रहा अब मुझे अपने पिता के बाईपास सर्जरी के लिए बाहर जाना है, मुझे पैसो की सख्त जरुरत है जब मैंने 3 महीने की बकाये सैलरी मांगी तो मुझे संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यही नहीं ज़िलों के किसी भी रिपोर्टर को वादा करने के बाद भी लोगों की सात महीने सैलरी नहीं दी शहनवाज़ हसन ने। अब बताइये मेरी गलती क्या है। सन्गठन के लिए मैंने तन मन धन सब कुछ अर्पित किया और इसका मुझे ये सिला मिला है। इसका जवाब मुझे आप सब से चाहिए। मैं बस आपको इस बहरूपिये से सावधान करा रहा हूं। आप सब से आग्रह है कि अतिशीघ्र रांची में प्रदेश कमिटी की बैठक बुलाएँ ताकि सबकुछ साफ़ हो जाए, JJA को किसी की पॉकेट संस्था बनने से बचाएं।

ये पत्र प्रदेश कमिटी के अधिकारियों और निष्ठावान पत्रकारों को समर्पित है

अरविन्द प्रताप,

प्रदेश सचिव, JJA, रांची   

उसके बाद उन्होंने निम्न संदेश लिखे-

[11:25 PM, 2/16/2017]:   मैं आपकी परेशानी समझ सकता हूं शहनवाज़ जी, हमारी भी परेशानी आप समझिये, मेरे पिता भी बीमार है उनका बाईपास सर्जरी करवाना है, पैसे के बिना मैं बाहर जाने का प्लान नहीं बना पा रहा हूँ।मैंने दादा को बताया था, उन्होंने कहा कि आपको बता देंगे, ऐसे कैसे चलेगा। सब्र टूटने लगा है। कब दे रहे हैं आप पैसा सबको। कृप्या बताइये।

[15/02 5:27 am] : प्रिंटिंग वाला भी मुझसे ही तगादा कर रहा है। आपने मुझे कहां लाकर फंस दिया भाई साहब। बहुत बुरे दौर से गुजर रहा हूं मैं। कर्ज़दार बना दिया आपने मुझे। एक विनती है कि साफ़ साफ़ बताइये कि आप चाहते क्या हैं हमें हमारा हक़ देंगे या नहीं और देंगे तो कब देंगे।

[15/02 7:16 pm] : ऐसे मौके पर मैं आपसे बहस नहीं चाहता भाई साहब,

आप बस इतना बताइये कि आप सबको और मुझे सैलरी कब दे रहे हैं। दादा ने बताया है कि आप 17 को देने वाले हैं, इस्की पुष्टि कीजिये…आपने परेशानी तो खड़ी कर दी है हमारे साथ, कर्ज सर पर चढ़ गया रेंट नहीं दे पा रहा हूं, 3 महीने से इंस्टालमेंट जमा नहीं कर पाया और कहते हैं कि मुझे कोई समस्या ही नहीं है। कमाल की आपकी सोच है। पत्रकार संगठन के अध्यक्ष हो कर ये आपका गैर जिमेवाराना बयान है। हम दूसरे पत्रकारों के हक़ की लड़ाई लड़ते हैं और खुद हमे आपने मोहताज़ बना दिया।

[15/02 8:12 pm] : मुझे सिर्फ अपनी चिंता नहीं है शहनवाज़ जी इस मुग्सक्ते में मत रहिएगा, मृणाल ने कल रुंआसा हो कर कहा कि सर मैं क्या करूँ, सब मुझे फोन करते हैं, मुझमे मानवता नहीं है संवेदनहीन हूं मैं ऐसा कहने में आपको शर्म आनी चाहिए..संवेदनहीन आप हो मानवता आपमे नहीं है। प्रभात अपने पिता को लेकर वेलूर गया गिड़गिड़ाता रहा पैसों के लिए तब क्या आपकी मानवता और संवेदना मर गई थी क्या। आज मुझे अपने पिता का इलाज कराना है कर्ज चूकाना है तो मुझे पैसा देने के बजाये मुझे आप मानवता और संवेदना सिखा रहे हो।

कहते हैं कि उपरोक्त संदेशों को पढ़ते ही शहनवाज हसन ने अरविंद प्रताप को संगठन की ग्रुप से रिमूव कर दिया और ग्रुप में संदेश के उस अंश को डाल दिया, जो सकारात्मक जबाब न मिलने और ग्रुप से रिमूव करने के बाद अरविंद प्रताप ने उत्तेजित होकर लिख दी थी।

इस संबंध में जब ‘पत्रकारों की मन की बात’ नामक व्हाट्सअप ग्रुप के जरिये जेजेए के प्रदेश अध्यक्ष शहनवाज हसन से जानकारी मांगी तो यह सब लिखने तक कोई प्रतिउतर प्राप्त नहीं हो सका है। उनका मोबाईल भी स्वीच ऑफ आ रहा है।

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