इनके सामने गिरगिट, वेश्या या फिर कपड़े बदलने के जुमले नाकाफी है हुजूर !

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वेशक झारखंड की राजनीति सब नंगे हैं। जिनके तन पर कुछ कपड़े हैं भी,वो चुनावी पटल से अलग-थलग हैं या फिर सबसे अंतिम कतार में।

हालांकि प्रायः चुनाव में नेताओं का दल बदलना राजनीति और रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन झारखंड में नेताओं ने गिरगिट, वेश्या या फिर कपड़े बदलने जैसे कहावतों को भी काफी पीछे छोड़ रखा है। वे अपना शर्मोहया सब ताख पर घर से निकलने की परंपरा पर ही हाथ-पैर मार रहे हैं।

निवर्तमान विधानसभा के अब तक 18 विधायक दूसरे दलों का दामन थाम चुके हैं। आलावे दलबदलुओ में पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित गणमान्य नेताओं की संख्या सैकड़ों में है।

ताजा हालत यह है कि यहां कौन दल किस दल के नेता को बनियान पकड़ कर खींच रहा है और कौन दल किस दल के नेता की चढ्ढी, कहना बहुत मुश्किल है।

सच पुछिये तो झारखंड में चुनाव के पहले दल बदलने की होड़ में अधिकतर नेताओं ने भाजपा में जगह पाई है।

 इस नंगई में यहां भाजपा का कोई सानी नहीं है। इस पार्टी के नेताओं की दलील है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में बहुमत वाली सरकार बनने के बाद पार्टी की लोकप्रियता की वजह से दूसरे दलों के लोग भाजपा में भेड़ियाधसान आ रहे हैं।

दिलचस्प बात है कि जिस रात कांग्रेस ने अपने 14 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, उसमें भवनाथपुर क्षेत्र से पार्टी विधायक अनंत प्रताप देव का भी नाम शामिल था।

दूसरे दिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत दिल्ली से रांची लौटे तो घोषित प्रत्याशी कांग्रेस विधायक उनके साथ ही थे।

लेकिन अचानक घंटा भर बाद अनंत देव भाजपा में शामिल हो गए हैं और रात में भाजपा के 63 उम्मीदवारों की सूची में उनका भी नाम शामिल है।

बकौल अनंत प्रताप देव, वे अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वह भाजपा में शामिल हुए हैं जबकि, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने इसे दुखद प्रवृत्ति बताया है।

आदिवासी के लिए सुरक्षित विशनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक चमरा लिंडा रविवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हो गए हैं।

इससे पहले लोकसभा चुनाव के समय चमरा लिंडा तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर लोहरदगा से चुनाव लड़े थे।

जरमुंडी से निर्दलीय विधायक हरिनारायण राय हाल ही में झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हुए हैं।

चमरा लिंडा कहते हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ही इस राज्य का दर्द और हित समझता है। शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हम झारखंड को संवारना चाहते हैं।

झामुमो के विधायक हेमलाल मुर्मू और विद्युतवरण महतो लोकसभा चुनाव के वक्त भाजपा में शामिल हुए थे।

मुर्मू को भाजपा ने राजमहल और महतो को जमशेदपुर से संसदीय चुनाव लड़ाया था। मुर्मू हार गए थे और महतो चुनाव जीत गए।

अब मुर्मू को भाजपा ने बरहेट से विधानसभा का उम्मीदवार बनाया है।

हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री रहे साइमन मरांडी भी हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं।

साल 2009 के चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। झाविमो के 11 नेताओं को जीत मिली थी।

इस बार चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही समरेश सिंह, जयप्रकाश भोक्ता, सत्येंद्र तिवारी, ढुल्लू महतो सहित झाविमो के 11 में से आठ विधायक भाजपा में और निजामुद्दीन अंसारी झामुमो में शामिल हो गए हैं।

दल बदलने में पूर्व मंत्री भी पीछे नहीं हैं। पूर्व मंत्री राधाकृष्ण किशोर और लालचंद महतो भाजपा में शामिल होकर चुनाव लड़ रहे हैं।

साल 2005 में किशोर जनता दल यूनाइटेड के टिकट से चुनाव जीते थे. बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए।

लालचंद महतो जदयू के विधायक थे. साल 2005 में राजद से चुनाव लड़कर हार गए थे. अब भाजपा से लड़ेंगे।

पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता को भाजपा ने चतरा से टिकट नहीं दिया, तो वह सोमवार को झारखंड विकास मोर्चा में शामिल हो गए हैं।

पूर्व मंत्री रामचंद्र केसरी झाविमो में, जोबा मांझी झामुमो में और दुलाल भुइंया भाजपा में शामिल हुए हैं। इससे पहले भुइंया झामुमो छोड़ झाविमो में आए थे।

अब देखना है कि सार्वजनिक तौर पर कपड़े उतारने में माहिर नेताओं का क्या हश्र होता है और आगे वे किन-किन के सामने अपने कपड़े उतारते हैं।

फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि झारखंड की राजनीति में अभी जो दिख रहा है, वह अंशमात्र है। पूरी नंगी फिल्म अभी बाकी है।

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