जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध

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बिहार के कुछ नेताओं ने राजनीति का स्तर निम्नस्तर पर ला दिया है। अपने उलजलूल बयानों से वे रोज बिहार को शर्मिंदा कर रहे हैं। राजनीति देश और समाज की बेहतरी के लिए होनी चाहिये, लेकिन बिहार की राजनीति अपनी राह भटक गयी लगती है।

नीतियों और सिद्धांतों पर कोई बयान शायद ही देखने सुनने को मिले। सिर्फ तू-तू, मैं-मैं की राजनीति होती दिख रही है। न शब्दों की मर्यादा का ख्याल है, न सामान्य शिष्टाचार का ध्यान। गली के मवाली जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, उससे भी घटिया भाषा का इस्तेमाल हमारे नेता कर रहे हैं। हद तो यह है कि एेसे नेता पार्टियों के प्रवक्ता भी बने हुए हैं। एक समय था जब पढे लिखे समझदार लोगों को पार्टियां आगे बढाती थीं।

आज बेसुरे, लंपटिए संस्कृति से ओतप्रोत और गाली गलौज वाली भाषा बोलनेवाले सम्मान पा रहे हैं। तर्कों और तथ्यों के बजाये गलथेथरई से अपनी बात को सही साबित करने की कोशिश हो रही है। विधानसभा में भी एेसे ही लोग ज्यादा हैं। आखिर एेसे लोग राजनीति को कहां लेकर जायेंगे ? हम कैसा बिहार बना रहे है ? कैसी राजनीतिक संस्कृति रच रहे हैं ? कैसी विरासत छोड रहे हैं ? एेसी राजनीति से किसका भला होना है ?

अपशब्दों से भले ही मीडिया में जगह पा लें, अपने नेता की वाहवाही ले लें, लेकिन याद रखिये आनेवाली पीढी आपको राजनेता के तौर पर नहीं, विलेन के तौर याद करेगी। अादमी के पास जब शब्द नहीं होते (यानी आप अज्ञानी हैं) तो वह अपशब्दों का इस्तेमाल करता है। आज यही हो रहा है। कठोर आलोचना भी शालीन भाषा में की जा सकती है। दूसरे से नहीं तो कमसे कम शहाबुद्दीन से तो एेसे नेता कुछ सिख ही सकते हैं !

अपनी छवि के विपरित जेल से रिहा होने के बाद के उसके बयानों पर जरा गौर करें । कैसे सधे हए अंदाज और शिष्ट भाषा में उसने अपने राजनीतिक प्रतिद्वन्दियों के खिलाफ कडा बयान दिया। जरा उसकी भाषा पर गौर करें।

एक ‘अपराधी’ जब भाषा के इस्तेमाल में इतना संयम दिखा सकता है तो तथाकथित सभ्य नेता वैसा क्यों नहीं कर सकते ? क्या यह मान लिया जाये कि वे नाकाबिल लोग हैं ? और उन्हें आगे बढानेवाले बडे नेताओं के बारे में क्या कहा जाये ? क्या यह शर्म का विषय नहीं है कि राजनीति एेसे असभ्य नेताओं के हाथ में है ? इस स्थिति के लिए बहुत हद तक मीडिया और और मतदाता भी जिम्मेवार हैं।

यहां दिनकर की कविता याद आती है —–
” समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।”

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