जेल में ऐश कर रहे महापापी ब्रजेश ठाकुर की बड़ी ‘मछली’ है ‘रेड लाइट एरिया’ की उपज मधु

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“तत्कालीन जिलाधिकारी ने की थी मधु को ‘सम्मानित’ करने की अनुशंसा, ब्रजेश ठाकुर की राजदार मधु कुमारी का व्यक्तित्व है काफी रहस्यमय, दीपीका सुरी ने मधु को निकाला था चतुर्भज स्थान के रेड लाईट एरिया से, अल्पावास गृह में होता था दुष्कर्म, बाहर में दिखावे के लिए करते थे सत्यकर्म, मधु के साथ ये दो महिलएं कहीं स्वाधार गृह से गायब महिलाओं में से तो नहीं”

पटना (विनायक विजेता)। अल्पावास गृह दुष्कर्म मामले में चर्चा में आया मुजफ्फरपुर की संस्था ‘सेवा-संकल्प एवं विकास समिति’ के चेयरमैन ब्रजेश ठाकुर एवं उनके कुनबे की प्रशासनिक स्तर पर कितनी पहुंच थी, इसका उदाहरण साढे़ तीन वर्ष पूर्व मुजफ्फरपुर के तत्कालीन जिलाधिकरी अनुपम कुमार द्वारा लिखी गई वह चिठ्ठी है।

2015 में मुजफ्फरपुर के जिलाधिकरी के रुप में तैनात अनुपम कुमार ने फरवरी 2015 में समाज कल्यान विभाग, बिहार सरकार को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने ब्रजेश ठाकुर का दाहिना हाथ और राजदार मानी जाने वाली मधु कुमारी को ‘जिला महिला सम्मान’ पुरस्कार से नवाजे जाने की अनुशंसा की थी।

अल्पावास गृह मामले में फरार और भूमिगत मधु कुमारी का व्यक्तित्व और जीवन भी काफी रहस्यमय है। मधु छोटी उम्र में ही किसी तरह मुजफ्फरपुर के बदनाम चर्तुभुज स्थान स्थित ‘रेड लाइट एरिया’ में आ गई थी। वह कहां से आयी, कैसे आई और उसके माता पिता कौन हैं, यह राज सिर्फ मधु के सीने में ही दफन है।

वर्ष 2001 में मुजफ्फरपुर में गौतम उर्फ गोलू नामक मासूम छात्र का अपहरण के बाद अपहर्ताओं ने हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद पूरा मुजफ्फरपुर सुलग उठा था।

तब तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आदेश पर वहां के डीआईजी से लकर इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों का वहां से तबादला कर दिया था।  

तत्कालीन सरकार ने तब 1999 बैच की युवा महिला आईपीएस दीपीका सुरी को मुजफ्फरपुर का टाऊन एसपी बनाकर भेजा था। दीपीका सुरी ने ही तब वहां के ‘रेड लाइट एरिया’ में मुहिम चलाकर गलत रास्ते पर चल रही दर्जनों युवतियों को वहां से मुक्त कराकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की थी।

ऐसी युवतियों में मधु भी थी, जो बाद में वहां की एक एनजीओ ‘वामा’ से जुड़ गई। बाद के दिनों में दीपीका सूरी का तबादला अपने मूल कैडर राज्य मध्य प्रदेश में हो गया। मध्य प्रदेश से ही कुछ वर्षों के लिए उनका तबादला सीबीआई एसपी के रुप में भी हुआ था।

मुजफ्फरपुर मामले की जांच कर रही सीबीआइ दीपीका सूरी से भी इस मामले में मदद ले सकती है। ‘वामा’ एवं ब्रजेश ठाकुर की संस्था ‘सेवा-संकल्प एवं विकास समिति’ को बिहार एड्स कंट्रोल सोसाईटी से भारी अनुदान मिलता रहा है।

मधु जुड़ी तो थी ‘वामा शांति वाहिनी’ से पर वह कुछ वर्षों के बाद ही ब्रजेश ठाकुर और उसकी संस्था से जुड़कर ब्रजेश की राजदार के साथ सबसे विश्वस्त सहयोगी भी बन गई।

‘सेवा-संकल्प एवं विकास समिति’ द्वारा साहू रोड में संचालित अल्पावास गृह में हैवानियत व दुष्कर्म का नंगा नाच तो होता ही था, पर अंदरखाने की बात बाहर नहीं पहुंचे, इसके लिए कथित रुप से सत्कर्म के दिखावे के लिए ब्रजेश ठाकुर एंड कंपनी अक्र चार्ठल्ड लेबर, महिला सोशन और ह़यूमन ट्रैफिकिंग के विरोध में सभा एवं समारोह आयोजित करती थी।

उस समारोह में ब्रजेश ठाकुर की बहन और मुजफ्फरपुर की एक महिला अधिवक्ता व समाजसेवी संगीता शाही, वर्तमान में फरार दिलीप वर्मा व गिरफ्तार विकास कुमार की मौजूदगी अवश्य रहती थी।

बताया जाता है कि काफी शातिर ब्रजेश ठाकुर एंड कंपनी ने कई सफेदपोशों की अल्पावास गृह की बच्चियों के साथ हैवानियत और अय्याशी के वीडियो और स्टील फोटों की क्लीपिंग भी बना रखी है।

वर्तमान में खुदीराम बोस कारागार में बंद ब्रजेश ठाकुर जेल में भी शानों-शौकत से है। जेल में पूर्व से बंद एक परिचित कैदी के मोबाइल से वह लगातार बाहरी दुनियां में रह रहे लोगों से संपर्क में है।

सूत्र बताते हैं कि कई राजनेताओ के साथ ब्रजेश के कई आईएएस व आईपीएस अधिकारियों से भी काफी अच्छे संबंध है, जिनके प्रभाव के बूते ही वह अपने अखबर के लिए बीते 20 वर्षों में इतना विज्ञापन लिया, जितना कि पटना के लोकप्रिय अखबारों को भी नहीं मिले।

जबकि ब्रजेश ठाकुर द्वारा निबंधित कराए गए लगभग एक दर्जन अखबारों में सिर्फ ‘प्रात: कमल’ और ‘न्यूज नेक्सट’ का ही नियमित प्रकाशन होता रहा है। बाकी के अखबार सिर्फ विज्ञापन पाने के लिए कागजों पर ही चलते रहे हैं।

प्राप्त एक पुरानी तस्वीर में फरार मधु के साथ दो संवासीने दिख रहीं हैं। कहीं ये दो महिलाएं ब्रजेश ठाकुर की संस्था ‘स्वाधार गृह’ से गायब 11 महिलाओं में से दो तो नहीं?

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