‘जेटली-बजट’ से चाय बागान श्रमिकों में भारी क्षोभ

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चाय उद्योग हेतु 100 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा किये जाने के बाद ऐसा लग रहा था कि उत्तर बंगाल के चाय उद्योग को चंगा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा भी बजट में कुछ विशेष घोषणा की जायेगी.

teaसंसद में पेश अरुण जेटली के बजट में उत्तर बंगाल की तो पूरी तरह से उपेक्षा की ही गयी, साथ ही चाय उद्योग के लिए भी कुछ नहीं किया गया. इसकी वजह से उत्तर बंगाल के चाय बागान मालिकों एवं चाय बागान श्रमिकों में भारी निराशा है.

पिछले लोकसभा चुनाव में जब भाजपा के वरिष्ठ नेता एसएस अहलुवालिया दाजिर्लिंग लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने आये थे तब उन्होंने चाय उद्योग के कल्याण के लिए बड़े-बड़े वादे किये थे. लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने न केवल अपने वादे को दोहराया, बल्कि अलग से चाय मंत्रलय बनवाने की भी बात कही.

वर्तमान बजट में चाय मंत्रलय बनाने की बात तो दूर, चाय तक की जिक्र नहीं है. स्वाभाविक तौर पर एसएस अहलुवालिया इस मुद्दे को लेकर विरोधियों के निशाने पर हैं.

tea_bangalखासकर तृणमूल कांग्रेस ने एसएस अहलुवालिया के खिलाफ मोरचा खोल दिया है और उन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. तृणमूल कांग्रेस के जिला महासचिव मदन भट्टाचार्य ने कहा है कि एसएस अहलुवालिया ने गोजमुमो को बेवकूफ बनाया है. वह जब यहां चुनाव लड़ने के लिए आये थे तब उन्होंने बिमल गुरुंग तथा गोजमुमो के अन्य नेताओं को अलग गोरखालैंड राज्य बनाने का सब्जबाग दिखाया और यहां समतल में आकर चाय मंत्रलय आदि बनाने के बड़े-बड़े बात की. दरअसल वह कुछ भी नहीं कर सकते.

भाजपा में उनकी कोई पूछ नहीं है. वह प्रधानमंत्री या फिर अन्य मंत्रियों से मिलकर दाजिर्लिंग अथवा सिलीगुड़ी समतल क्षेत्र के लिए कोई काम नहीं करा सकते. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि जिस तरह से राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चाय उद्योग के लिए पैकेज की घोषणा की है, उसी प्रकार से केंद्र सरकार को भी विशेष पैकेज देना चाहिए था.

उन्होंने पूरे बजट की भी आलोचना की. भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा ने अच्छे दिन लाने का केवल सपना दिखाया. इस प्रकार के बजट से कभी भी अच्छे दिन नहीं आयेंगे.

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