जिंदा जानवरों का यूं पीते हैं खून, तस्वीर देख कांप जाएगी आपकी रूह

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यह दुनिया बड़ी विचित्र है और यहां रहने वाले लोग भी। आपने बहुत से अजीबोगरीब लोगों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे लोगों के बारे में जो जिंदा जानवरों का खून पीते हैं……………”

राजनामा.कॉम। अफ्रीका में एक जनजाति है, जिसे लोग मसाई जनजाति के नाम से जानते हैं। इस जनजाति के लोग अच्छे योद्धा माने जाते हैं। ये लोग अपने जिंदगी में किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करते।

इथियोपिया में रहने वाले सूरमा जनजाति के लोग मांस, दूध और खून के ऊपर जिंदा रहते हैं। इनकी लाइफ ज्यादातर जानवरों के इर्द-गिर्द ही घुमती है। चाहे कोई भी मौका हो, जानवरों के बिना वो अधूरी मानी जाती है।

इन्हें सूरी के नाम से भी जाना जाता है। इस जनजाति में जिनके पास जितने ज्यादा जानवर होते हैं, उन्हें उतना अमीर माना जाता है।

सूरी लोगों का मानना है कि जिंदा जानवरों का खून पीने से उनकी ताकत बढ़ती है और वो अधिक खतरनाक हो जाते हैं।

इस जनजाति के लोग अच्छे योद्धा माने जाते हैं। कई मौकों पर इन्हें अपनी ताकत का प्रदर्शन करना पड़ता है, इस वजह से भी इन्हें खुद को मजबूत रखने के लिए खून पीना पड़ता है।

जानवरों का खून पीने के लिए मसाई लोग दो तरह के तरीके अपनाते हैं।

पहले में ये लोग एक नोकीले तीर से जानवर के गर्दन में छेद कर विशेष तरह के जार में खून जमा किया जाता है। जिसे लोग चाव से पीते हैं।

या फिर ये सीधे जानवर का गर्दन काट उसमें मुंह लगाकर खून पीने लगते हैं।

ज्यादातर तो ये दूध ही पीना पसंद करते हैं। लेकिन महीने में एक बार ये जानवरों की बॉडी से खून निकालकर पीते हैं।

इसके अलावा जब इनके पास खाने-पीने की चीजें कम हो जाती हैं, तब भी ये जानवरों का खून पीकर गुजारा करते हैं। सूरी लोग जानवरों की बॉडी से खून निकालने के कुछ ही देर बाद उन्हें वापस काम पर लगा देते हैं।

सूरी लोगों की ही तरह अफ्रीका के साउथ केन्या और नार्थ तंजानिया में बसने वाले मसाई जनजाति के लोग भी जानवरों का खून पीकर गुजारा करते हैं। सूरी और मसाई लोगों की परंपराएं काफी हद तक मिलती-जुलती हैं।

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