….जाहिलों का पत्रकार संगठन कहेगें तो बुरा लगेगा

Share Button

राजनामा.कॉम। किसी भी पेशा में संगठन का अपना कर्तव्य और दायित्व होता है। बात जब मीडिया संगठन की हो तो जिम्मेवारी काफी बढ़ जाती है। लेकिन आज कल मीडिया-पत्रकार के नाम पर कई ऐसे संगठन उग आये हैं, जो बात तो करते हैं पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान की। पत्रकार उत्पीड़न के खिलाफ तो चिंघाड़ते नहीं थकते।

-: मुकेश भारतीय :-

नालंदा जिले के राजगीर थाना के एक नशे में धुत जमादार ने वेब जर्नलिस्ट राजीव रंजन के साथ दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिल कर मारपीट की। राजीव रंजन का कसूर सिर्फ इतना था कि दो अन्य रिपोर्टर के साथ नशे धुत जमादार का ऑन ड्यूटी बीच सड़क हंगामा करते वीडियो बनाने का प्रयास किया।

इस पत्रकार उत्पीड़न की खबर को पटना से प्रकाशित दैनिक प्रभात खबर को छोड़कर  किसी भी अखबार या चैनल ने एक लाईन भी खबर न तो प्रकाशित की और न ही प्रसारित। राजगीर के किसी भी स्थानीय रिपोर्टर ने भी इसे कोई तजब्बो नहीं दिया।

उल्टे एक पत्रकार संगठन ने अपने व्हाटस्एप्प ग्रुप में इस तरह की सूचनाएं प्रसारित की, जो बिल्कुल बकबास है। इस ग्रुप में आये दिन वेब पोर्टल-वेब जर्नलिस्ट से जुड़ी बेसिर-पैर की भ्रामक की सूचनाएं परोसी जाती रही है।

दरअसल, आज कल मीडिया में स्थानीय स्तर पर ऐसे लोग काफी तादात में प्रवेश कर गये हैं, जिन्हें पत्रकारिता या सरकार की नियमावली की कोई जानकारी नहीं होती। वे यत्र-तत्र अपनी अज्ञानता की उल्टियां करते फिरते हैं।

ऐसे लोग अपनी कमियों को ढंकने के लिये, शासन-प्रशासन पर अपना अनर्गल प्रभाव जताने के लिये संगठन की रचना करने में जुट जाते हैं। जिस कथित पत्रकार संगठन की जो बातें यहां रखी जा रही है, उससे जुड़े स्वंभू कथित रिपोर्टरों-पदाधिकारियों की मंशा साफ झलकती है।

इस कथित संगठन के ग्रुप में जो अज्ञानता भरी चीजे परोसी जा रही है, उसका सार है कि न वेब पोर्टल होता है और न ही वेब जर्नलिस्ट। उतर प्रदेश शासन के किसी अधिकारी का हवाला दिया गया है। यहां स्पष्ट कर दूं कि उस राज्य में उस पद पर कभी कोई अधिकारी नहीं रहे हैं और न ही कोई निर्देश ही जारी किया है।

पिछले 3 वर्षों ऐसी मनगढ़ंत बातों को वैसे तत्व उछालते रहे हैं, जिनका मीडिया में अपना कोई बजूद नहीं है या फिर उनकी दलाली को वेब मीडिया और उसके जर्नलिस्ट से खतरा है। शासन-प्रशासन अगर ऐसे तत्वों के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं करती है तो कम से कम सतर्क तो अवश्य ही रहनी चाहिये।

बहरहाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि राज्यों के नियमावली-आवेदन में जो बातें उल्लेखित हैं, उससे सावन के ऐसे गदहों को तो अक्ल आ ही जानी चाहिये। जिसे यहां प्रस्तुत की जा रही है बतौर आयना…..

दूसरी तरफ उस कथित पत्रकार संगठन के ग्रुप के स्नैपशॉट भी डाली जा रही है, जिसमें काफी संख्या में ऐसे लोग शामिल हैं, जो सक्रिय-निष्क्रिय किसी तरह की पत्रकारिता से जुड़े नहीं हैं….

Share Button

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.