जरा दैनिक भास्कर और रांची एक्सप्रेस की इस खबर पर गौर फरमाईये!

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 झारखंडी मीडिया की राजधानी रांची से प्रकाशित समाचार पत्रों में खबरों का प्रकाशन अलग-अलग ढंग से होती है। कभी उसके तथ्यों में आस्मां-जमीं का फर्क होता है तो कभी मोटे-मोटे शीर्षकों में। सामान्य घटना तो दूर, यहां तक की न्यायालय के आदेशों-निर्देशों को भी सब अपने-अपने हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उदाहरण के तौर पर अभी-अभी नेट पर उपलब्ध दैनिक भास्कर और दैनिक रांची एक्सप्रेस की ताजा खबर को देखियेः-

दैनिक भास्कर, रांची के नेट संस्करण में  शिबू सोरेन को राहत : नहीं होगी CBI जांच शीर्षक से प्रकाशित समाचार के अनुसारः   “पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के परिजनों की आय से अधिक संपत्ति की जांच के लिए दायर याचिका को झारखंड हाईकोर्ट ने निष्पादित कर दिया। चीफ जस्टिस प्रकाश टाटिया की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने कहा कि पूर्व में दुर्गा उरांव की ओर से दायर याचिका पर सीबीआई जांच का निर्देश दिया गया है। सीबीआई को आयकर विभाग की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने को कहा गया है। ऐसे में अलग से जांच का आदेश देने का कोई औचित्य नहीं है।  झारखंड अगेंस्ट करप्शन की ओर जनहित याचिका दायर कर शिबू सोरेन पर पद का दुरुपयोग करते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया था। कहा गया था कि इन्होंने अपने तत्कालीन निजी सचिव मनोहर लाल पाल के साथ मिलकर लगभग 68 करोड़ से अधिक संपत्ति अर्जित की है। मनोहर पाल के घर आयकर विभाग ने छापेमारी की गई थी। इसमें पाया गया था कि नैनी इलाहाबाद में ब्रैकेटिंग स्वर्ण रेखा कोक कॉम्पलेक्स नामक कंपनी है, लेकिन यह बंद पड़ी हुई है।याचिका में कहा गया था कि सोरेन ने अपनी परिजनों के नाम पर रांची, बोकारो, रामगढ़, जामताड़ा, दिल्ली समेत कई शहरों में चल अचल संपत्ति बनाई है। साथ ही कई कंपनियों में निवेश किया है।”

वहीं दैनिक रांची एक्सप्रेस, रांची के नेट संस्करण में  शिबू-हेमंत के खिलाफ जांच हो : हाईकोर्ट शीर्षक से प्रकाशित समाचार के अनुसारः ” झारखंड उच्च न्यायालय ने आज पुनः दोहराया कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो शिबू सोरेन तथा उनके पुत्र हेमंत सोरेन के पास आय से अधिक सम्पति के मामले में आयकर विभाग की रिपोर्ट के आलोक में उनके खिलाफ अनुसंधान करे। न्यायालय ने दुर्गा उरांव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है। अतः इस मामले में दोबारा जांच का आदेश देने का कोई औचित्य नहीं है। न्यायालय यह मंतव्य देते हुए याचिका निष्पादित कर दिया है। सीबीआई के अधिवक्ता ने बाद में पत्रकारों को बताया कि आयकर रिपोर्ट के आलोक में कई मंत्रियों के खिलाफ जांच की जा रही है। यदि शिबू सोरेन व हेमंत सोरेन के खिलाफ आयकर विभाग दस्तावेज उपलब्ध करायेगा तो उनके खिलाफ जांच की जायेगी। “

अब सबाल उठता है कि आखिर न्यायालय तक के आदेशों-निर्देशों से जुड़े समाचारों ( खासकर शीर्षक ) को लेकर भी रांची के इन दो अखबारों में इतने बड़े अंतर से पाठकों की खीज कितनी बढ़ेगी।

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