जमशेदपुर प्रेस क्लब दो फाड़, पत्रकारों के बीच अस्तित्व की जंग शुरु

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“कहते हैं न कि महत्वाकांक्षा इंसान को परिस्थितियों से विपरीत चलने पर मजबूर कर देता है। वैसे महत्वाकांक्षा जब हितों के टकराव की हो तो इसकी संभावना और प्रबल हो जाती है…”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। ऐसा ही घटनाक्रम इन दिनों जमशेदपुर प्रेस क्लब ऑफ ट्रस्ट के पिछले दिनों सम्पन्न हुए एजीएम के बाद से शुरू हुआ है। जहां जमशेदपुर के पत्रकार दो फाड़ में बट गए हैं।

वैसे यहां अन्य और भी संगठन काम कर रहे हैं, लेकिन प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट के मठाधीश खुद को मान्यता प्राप्त संगठन के रहनुमा बता कर कुछ पत्रकारों को लगातार सब्जबाग दिखाकर अध्यक्ष सहित तीन चार पदों पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

वैसे पिछले दिनों सम्पन्न हुए एजीएम के बाद कुछ पत्रकारों ने एजीएम के विरोध में मोर्चा खोलते हुए अध्यक्ष बी श्रीनिवास सहित पूरी कमेटी को अयोग्य घोषित करते हुए समानांतर कमेटी बनाए जाने का घोषणा कर दिया।

इसको लेकर गुरुवार को निर्मल भवन में एक बैठक भी हुई। जिसमें जमशेदपुर में कभी झारखंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के पत्रकार सदस्यों को फर्जी और आतंकवादी संगठन का सदस्य बताने वाले मठाधीश पत्रकारों ने अपने हितों को परवान चढ़ाने के लिए उनके साथ समझौता करते हुए नए सिरे से नई कमेटी बनाने की दिशा में पहल कर दी है।

वैसे गुरुवार की बैठक में प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट के सदस्यों के साथ बैठक करने और नियमानुकूल चुनाव कराकर  कार्यकारिणी तय करने का प्रस्ताव लेकर उनके पास जाने का फैसला  लिया गया।

वैसे चौंकाने वाली बात ये रही कि गुरुवार की बैठक में  ऐसे तमाम पत्रकार नजर आए जो कभी ना कभी झारखंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के सदस्य रह चुके हैं। इतना ही नहीं जेजेए के पूर्व जिला अध्यक्ष, वर्तमान जिला अध्यक्ष, पूर्व प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी समेत कई प्रदेश एवं जिला इकाई के सदस्य मौजूद रहे। हालांकि आज की तारीख में जमशेदपुर में झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है।

यहां आज यह संगठन अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में इस संगठन के दम पर प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट के बागी पत्रकार अब प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट के समानांतर कमिटी बनाने की धमकी दे रहे हैं।

सवाल ये उठता है  कि  आखिर ऐसी परिस्थिति उत्तपन्न आखिर क्यों हुई ? प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट अचानक खंडित क्यों हो गया और कैसे बागियों ने जेजेए के सदस्यों से हाथ मिला लिया।

वर्तमान प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट और बागी  जरा आत्ममंथन करे और ये बताए कि जिस प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट में रहते मठाधीश पत्रकार जब नए और अन्य संगठनों के पत्रकारों को फर्जी घोषित कर उन्हें पत्रकार मानने से इनकार करते रहे, जहां तहां जलील करते रहे। उन्हें आतंकी का सहयोगी बताते हुए उनका बहिष्कार करते रहे।

उस दौरान प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट के महंथ आखिर क्यों नहीं उनका बचाव करने की हिमाकत कर सके ? क्यों मनमोहनी मुद्रा में सबकुछ चुपचाप सहते रहे ? क्या उन्होंने ये सोचा कि आखिर इस क्षेत्र में पत्रकारिता का ककहरा सीखने आए नए पत्रकारों के मनोबल पर इस रैगिंग या मानसिक प्रताड़ना का क्या फर्क पड़ेगा ?

 क्या उन महांथों ने ये सोचा कि उनके प्रति नए पत्रकारों के मन में कैसी भावना सृजित होगी और भविष्य में वे किस रूप में इसका बदला लेंगे ? वैसे पूरे प्रकरण में कहीं न कहीं उन्हीं नए और प्रताड़ित पत्रकारों का आह लगता प्रतीत हो रहा है। हमारा मानना है कि पत्रकारिता एक बेहद ही चुनौतियों भरा प्रोफेशन है, इस क्षेत्र में हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

कोई पत्रकार छोटा या बड़ा नहीं होता हर किसी को गले लगाकर उनका मार्गदर्शन करने की जरूरत है। प्रेस क्लब ऑफ…… एक स्थानीय संगठन हो सकता है प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर का संगठन नहीं।

हां उनके साथ मिलकर पत्रकार हित मे काम किया जा सकता है। इस समाज में आनेवाले नए पत्रकारों को अगर उचित मार्गदर्शन नहीं मिलेगा तो आनेवाली पीढ़ियों में गुंडे और मवाली शामिल हो जाएंगे।

उसके बाद वर्षों से पत्रकारिता और पत्रकार हित के लिए चल रहे संगठनों पर गुंडों मवालियों के साथ राजनीतिक दखल शुरू हो जाएगा। हम न जेजेए के समर्थक हैं न प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ट्रस्ट के विरोधी। पत्रकारों के हित में बेहतर संगठन बने।

ये सत्य है कि इस लेख को पढ़कर कुछ पत्रकार साथियों को पीड़ा होगी, कुछ को मुझसे सहानुभूति भी होगी। मगर मैं यहां ये स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं न निंदा से घबराता हूं, न सहानुभूति पर इतराता हूं। अपने सिद्धांतों की लड़ाई खुद लड़ता हूं और जीतता भी हूं।

एक नसीहत जमशेदपुर प्रेस क्लब ऑफ ट्रस्ट को देना चाहूंगा वो ये कि ताजा उत्पन्न हालात को देखते हुए अविलंब वर्तमान कमेटी को भंग कर देनी चाहिए। तथा प्रेस क्लब के नियमानुसार चुनाव में जाना चाहिए।

इसके तहत जिला प्रशासन की देखरेख में सदस्यता अभियान से लेकर चुनाव की सारी प्रक्रिया कराई जाएगी जिसमें किसी तरह का कोई विवाद नहीं होगा।

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