जन लोकपाल पर बहस से भाग रही है मीडिया

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bihar mediaअरविन्द केजरीवाल के इस्तीफे के बाद जिस तरह से सोशल मीडिया में केजरीवाल के ऊपर हमलों कि बौछार हो रही है।  इससे निस्कर्ष पर निकलता है कि…..

१. सोशल मीडिया से जुड़े लोगों में अधिकांश ऐसे हैं जो किसी मुद्दे को समझने और उसके तह तक जाने के वजाय आपने आपको ज्यादा समझदार कहलवाने के चक्कर में किसी भी मुद्दे पर अलूल-जलूल टिप्प्णी करने के शगल में मशगूल है.

२. बहुतेरे लकीर के फ़क़ीर बने हुए हैं।जो सिद्धांत की आड़ में अच्छी चीजों को भी नकारते दीखते हैं।

३. सबसे ज्यादा वैसे लोग हैं जो कुछ क्रिएटिव करने के वजाय दूसरों के पोस्ट को कट-पेस्ट या शेयर करके अपने आपको फेसबुक का पिंच हीटर साबित करने में लगे हुए हैं। एक तरह से ऐसे लोग दूसरे समझदारो द्वारा यूज़ किये जा रहे हैं,

तथ्यो को गुमराह करने में ऊपर लक्षित तीनो तरह के लोग सामान रूप से जिम्मेदार है। कोई केजरीवाल को रणछोड़ बता रहा है कोई फरार,तो कोई भगोड़ा। परन्तु ये किसी ने भी जानने कि कोशिश तक नहीं कि कि आखिर “आप” के “जन-लोकपाल” में ऐसा क्या है जो अमर्यादित और असंसदीय है। जिसे दूसरी पार्टियां, दिल्ली के उप-राज्यपाल, देश के गृह मंत्री यहाँ तक कि राष्ट्रपति महोदय तक भी संविधान के दायरे से ऊपर बता चुके हैं। फिर भी इस मुद्दे को लेकर न किसी चैनल पर बहस और न किसी अखबार के सम्पादकीय में इसकी चर्चा। कितनी आजीब बात है?

आखिर क्या असंसदीय पारित होने जा रहा था रहा दिल्ली विधानसभा में. क्या आम आदमी इस बात पर चर्चा का इक्छुक नहीं है। आशा राम के मुद्दे में बाल कि खाल उधेड़ने वाला मीडिया इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर क्यों चुप है और असल मुद्दे से हटकर दूसरी बातों पर फोकस करने में लगा है। क्यों? लोगों को ये बात जानने का पूरा-पूरा हक़ है कि “जन-लोकपाल” में ऐसा क्या है जो असंसदीय है। अगर वो सचमुच असंसदीय है। तो जनता से ये बात क्यों छुपाई जा रही है।

संविधान से ऊपर बात करने वाले को जनता स्वतः नकार देगी। कल तक केजरीवाल कि रणनीतिक शैली का विरोध करने वाले अन्ना इस मुद्दे पर केजरी के साथ है। केजरीवाल ने कुर्बानी “जन-लोकपाल” के लिए दी है।  अतः बहस “जन-लोकपाल” पर होनी चाहिए न कि केजरीवाल के शासन शैली पर।

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……… पत्रकार संतोष पाठक अपने फेसबुक वाल पर

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One comment

  1. वाकई बहस जनलोकपाल ही होनी चाहिये लेकिन वह जादू का पिटारा है कहां ? मै लगातार आप के वेब साइट पर उसकी प्रति अपलोड करने की प्रार्थना कर रहा हूं। आप चुकि सोशल मीडिया को ही गलत बता रहे है और सुझाव दे रहे है कि जनलोकपाल पर बहस होनी चाहिये तो आप उसकी एक प्रति पहले अपलोड करे । क्यो कुछ गलत तो नही कहा मैने ?

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