जनसंख्या मामले में अपनी अपरिपक्वता(?) का सबूत पेश किया है भारतीय मीडिया !

Share Button

भारतीय मीडिया ने तीन साल पुराने जनसंख्या के आंकड़ो को जिस तरह पेश किया वो वाकई चिंताजनक हैं। अखबारों की हैडलाइन चुनने वाले सभी संपादको ने  अपनी अपरिपक्वता का स्पष्ट सबूत पेश किया।

इन आंकड़ों से यह बात साफ़ है कि मुसलमान भारत में अल्पसंख्यक हैं. लेकिन साल 2011 की जनगणना पर आधारित इन आंकड़ों को जिस तरह से पेश किया गया है उससे भारत के एक तबक़े की इस सोच (जो ग़लत सूचना पर आधारित है) को शायद बल मिले कि मुसलमान जल्द ही इस देश में बहुसंख्यक हो जाएंगे।

hinduताज़ा आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में मुसलमानों की जनसंख्या में बढ़ोतरी की दर 24.6 प्रतिशत रही है. ये दर हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि की दर (16.7 प्रतिशत) से क़रीब आठ प्रतिशत ज़्यादा है.

इस बात से शायद ही कोई इनकार करे कि मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि की दर हिन्दुओं की तुलना में ज़्यादा है. यह बात जनगणना के ताज़ा आंकड़ों से भी जाहिर होती है.

लेकिन ये आंकड़े इस बात को बहुत साफ़ नहीं करते कि मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि की दर में पिछले कुछ दशकों में बहुत तेज़ी से कमी आई है.

toi2001-11 के दौरान न सिर्फ़ जनसंख्या वृद्धि दर में भारी कमी आई है बल्कि इस दौरान मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ोतरी दर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है.

इस दौरान हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि की दर में भी कमी आई है लेकिन मुसलमानों और हिंदूओं की जनसंख्या वृद्धि दर में जो फ़ासला पहले था वो काफ़ी कम हुआ है.

मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि की दर में आई इस कमी से उन लोगों को ज़रूर राहत मिलनी चाहिए जिन्हें यह डर सताता है कि आने वाले समय में भारत में मुसलमानों की जनसंख्या हिन्दुओं से ज़्यादा हो जाएगी.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *