व्यवस्था देने में फेल रहे केजरीवाल

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janta_darbar1दिल्ली सचिवालय के बाहर जनता की समस्याओं को सुनने के लिए आयोजित जनता दरबार की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। आलम यह रहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी मेज पर खड़े हो गए और लोगों की समस्याएं सुनने लगे, लेकिन भीड़ में धक्का-मुक्की होती रही। इसी बीच काफी संख्या में वहां मौजूद लोगों ने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया, जिसके बाद स्थिति और खराब हो गई। स्थिति नियंत्रण में आते नहीं देख दरबार शुरू होने के 15 मिनट के भीतर ही केजरीवाल को जनता दरबार छोड़कर जाना पड़ा।

कार्यालय पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि व्यवस्था में कमी की वजह से भीड़ अनियंत्रित हुई। लेकिन आगे ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि लोग लाइन में लाएं और अपनी समस्याएं से संबंधित आवेदन दें।

केजरीवाल ने कहा कि भीड़ इतनी बढ़ गई कि भगदड़ मच सकती थी। लोगों को नुकसान पहुंच सकता था। अगले दो दिनों में कैसे जनता दरबार की व्यवस्था की जाए, उस पर निर्णय ले लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले लोगों में ज्यादातर लोग बधाई देने और मिलने आए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे ज्यादा रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों, नियमित करने की मांग और पानी से संबंधित समस्याएं आई हैं। लोगों को अपनी सरकार से काफी अपेक्षाएं हैं जिसे हमें हर हाल में पूरा करना है। उन्होंने कहा कि अगली बार ठेके वाले कर्मचारी न आएं, उनकी समस्या का निटपारा होने में कम से कम एक महीना लगेगा। इसके लिए सभी विभाग को ऐसे कर्मचारियों की सूची भेजने को कहा गया है।

सचिवालय के बाहर सड़क के पास मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे। भारी भीड़ में कई लोगों के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी खो गए। यही नहीं, भीड़ में कई परिचित एक-दूसरे से बिछड़ गए हैं, जिसके कारण उद्घोषणा भी की गई। स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए लोगों को दूसरे गेट से बाहर निकलने के लिए कहा गया।

जनता दरबार शुरू होने से पहले ही प्रवेश द्वारा पर काफी लंबी लाइन लग गई थी और जबरदस्त धक्का-मुक्की शुरू हो गई थी, जिसके कारण भी आप के कई कार्यकर्ता बिना परेशानी बताए ही वापस लौट गए।

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