चैनल खोल पत्रकारों को यूं चूना लगा फरार हुआ JJA का चर्चित अध्यक्ष

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“हालांकि शाहनवाज को लेकर कई चर्चित मामले उभर कर सामने आ चुके हैं। जमशेदपुर का यह शख्स पहली बार तब सुर्खियों में आया था, जब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) की टीम द्वारा छापामारी कर गिरफ्तार किया गया।”

रांची (राज़नामा न्यूज)। झारखंड में पत्रकारों के हितों को लेकर दर्जनों पत्रकार संगठन बने हैं। लेकिन प्रायः इन संगठन के स्वंयभू रहनुमाओं के कथनी-करनी में आस्मां-जमीन का फर्क होता है। वे खुद मेहनतकश पत्रकारों का शोषण दमन करने में कोई कोताही नहीं बरतते।  

एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन नामक संगठन के स्वंभू अध्यक्ष शाहनवाज हुसैन को लेकर सामने आया है। हालांकि शाहनवाज को लेकर कई चर्चित मामले उभर कर 

सामने आ चुके हैं। जमशेदपुर का यह शख्स पहली बार तब सुर्खियों में आया था, जब राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी आईबी की टीम द्वारा छापामारी कर दबोचा गया था।

इसके बाद शाहनवाज ने एक पत्रकार संगठन बनाया और उसमें ग्रामीण पत्रकारों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर जोड़ना शुरु किया। कहा जाता है कि सदस्यता शुल्क, प्रेस आईडी कार्ड, बैठकों, आयोजनों के नाम पर व्यापक पैमाने पर वसूली भी की गई है। इस क्रम में जिसने भी विरोध किया, उसे ही संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

बहरहाल, एक ताज़ा मामले की बात करें तो शहनवाज ने रांची में न्यूज़ वर्ल्ड चैनल खोला था। उस चैनल में आधा दर्जन से उपर पत्रकारों से काम करवाया गया। बाद में बिना सबको पैसा दिए चैनल बन्द करके फ़रार हो गया।

प्राप्त सूचना के अनुसार शाहनवाज ने जिन पत्रकारों को अपनी धूर्तता से ठगा है और उनकी मेहनत की कमाई लेकर वह फरार है, वे पत्रकारों के नाम हैं….

  • संजय रंजन (सीनियर रिपोर्टर)                 20000  रुपये

  • सुबोध कुमार (आईटी कम कैमरामैन)       36000  रुपये

  • चंदन वर्मा (रिपोर्टर कम कैमरामैन)          10000 रुपये

  • राजेश कृष्ण (सीनियर रिपोर्टर)                 21000 रुपये

  • प्रभात रंजन (रिपोर्टर)                               36000 रुपये

  • कल्याणी सिंघल (मार्केटिंग एग्जक्यूटिव)  20000 रुपये

  • मृणाल कुमार  (ऑफिस बॉय)                   10000  रुपये

  • अरविंद प्रताप (ब्यूरो हेड)                         75000  रुपये

  • रामेश्वरम प्रिंटर, रांची                               20000 रुपये

सबाल उठता है कि पत्रकारों के हितों, उनक शोषण, दमन, सुरक्षा की लड़ाई लड़ने का झांसा देने वाले शहनवाज हुसैन सरीखे अपना बाजारु धंधा कब बंद करेगें?

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