‘चाय से चिकन’ के बीच यूं दो फाड़ हुआ हिलसा अनुमंडल पत्रकार संघ

Share Button

राजनामा.कॉम।  बिहार के नालंदा जिले में हालिया गठित हिलसा अनुमंडल पत्रकार संघ  में आज सीधे दो फाड़ हो गया। एक तरफ जहां चंडी में एक पत्रकार के घर बैठक में दर्जन भर पत्रकारों ने ‘हिलसा आंचलिक पत्रकार’ नामक संगठन का गठन कर नई हुंकार भरी, वहीं नगरनौसा प्रखंड कार्यालय के सभा कक्ष में अनुमण्डल पत्रकार संघ ने मासिक बैठक कर अपनी ताकत का परिचय दिया।

इस बैठक में हिलसा के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) नगरनौसा बीडीओ और सीओ भी शरीक हुये। यहां बैठकोपरांत मटन-चिकन-पनीर-पोलाव-मिठाई आदि जैसे खाने-पीने के व्यापक इंतजाम किये गये थे।

रविवार को छुट्टी के दिन एसडीओ के किसी पत्रकार संघ की सरकारी कार्यालय भवन सभागार में आयोजित मासिक बैठक में शामिल होने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। क्योंकि संगठन में विवाद की जद एसडीओ ही रहे और आज संघ के दो फाड़ होने के समय वहीं दिखाई दिये।

सबसे रोचक चर्चा इस बात की है कि एसडीओ की चाय-चर्चा से शुरु वैचारिक मतभेद अंततः चिकन-मटन-पनीर पर खत्म हो गई, लेकिन टूटने-बिखरने के बाद।

बता दें कि अनुमण्डल पत्रकार संघ की व्हाट्सएप् ग्रुप में संघ के अध्यक्ष ने एसडीओ द्वारा दहेज बंदी मानव श्रृखंला दिवस के पूर्व चाय पर संघ से जुड़े अनुमंडल के सभी आंचलिक पत्रकारों को आमंत्रित किये जाने की सूचना जारी की थी। इसे लेकर ग्रुप में सदस्यों के द्वारा तरह-तरह की टिप्पणियां की गई।

कई सदस्य ने एसडीओ के चाय निमंत्रण और अध्यक्ष की मानसिकता पर सबाल उठाये। इससे खफा होकर ग्रुप के एडमिन ने कई सदस्यों को रिमूव कर दिया तो कई लोग ग्रुप से खुद लेफ्ट हो गये।

इसके बाद हिलसा अनुमण्डल पदाधिकारी के कार्यालय में निर्धारित समय पर पत्रकारों की चाय पार्टी का आयोजन हुआ। इस पार्टी में हिलसा डीएसपी भी उपस्थित थे। लेकिन अध्यक्ष पर तानाशाही रवैया का आरोप लगाते हुये अनेक विक्षुब्ध पत्रकार शामिल नहीं हुये।

इसके बाद अनुमण्डल पत्रकार संघ के किसी भी पदाधिकारी ने आहत विक्षुब्ध पत्रकारों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजतन, दर्जन भर आंचलिक पत्रकारों ने आज चंडी में बैठक कर ‘हिलसा आंचलिक पत्रकार’ नामक संगठन बना कर अपनी हक-हकूक की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर दिया।  

बहरहाल, पूरा मामला देखने से साफ जाहिर होता है कि हिलसा अनुमंडल के आंचलिक पत्रकार पूरी तरह से दो फाड़ हो चुके हैं। उसमें एक फाड़ जहां सरकारी महकमे के साथ खड़ा प्रतीत होता है, वहीं दूसरा फाड़ अपनी हक-हकूक की खुद बिगुल फुंकते।  

Share Button

Relate Newss:

इस अवैध कारोबार के खिलाफ क्यों नहीं हुई कार्रवाई
नहीं रही दूरदर्शन की वरिष्ठ एंकर नीलम शर्मा, मिली थी नारी शक्ति सम्मान
श्रीकृष्ण प्रसाद को मातृशोकः नहीं रहीं मुंगेर की 81वर्षीय महिला पत्रकार सावित्री देवी
प्रबंधन की विशाल असफलता है नोटबंदी :मनमोहन सिंह
आखिर चाहता क्या है सुप्रीम कोर्ट ?
कैलाश सत्यार्थी के नोबल पुरस्कार पर उठे सबाल
इसलिये उठ रहे हैं सिमी आतंकियों के एनकाउंटर पर सवाल
नागपुर में नितिन गड़करी का पोस्टर, बताया 'विदर्भ का डाकू'
प्रेस क्लब की सदस्यता में धांधली के बीच विजय पाठक को लेकर उभरे तत्थ
सीएम की ब्रांडिंग, कनफूंकवा और बेचारी झारखंडी जनता
पत्रकारिता के जरिए पहाड़ ढाहने का दंभ भरने वाले भाइयों के लिए -1
नीतीश ने अपने फेसबुक का कवर पेज ब्लैक किया
गोला गोली कांड : प्रशासन ने सर्पदंश व दुर्घटना को बताया मौत की वजह !
हमारे पास चुनने के लिए क्या है विकल्प ?
सावधान हो जाइए ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज XP वाले

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
loading...