चहेते ही बना रहे हैं हरियाणा की ‘खट्टर सरकार’ को खट्टारा !

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लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में मतदाताओं द्वारा कांग्रेस तथा इनैलो को दिए गए राजनीतिक घाव का हरियाणा की अफसरशाही पूरा-पूरा लाभ उठा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार को खट्टारा बनाने के लिए उनके अपने और अफसरशाही ने प्रयास शुरू कर दिए है।

cm_khattarप्रशासनिक तंत्र में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के चहेतों का आंकड़ा काफी ज्यादा है, जो मौजूदा सरकार पर हावी कहे जा सकते है। स्वास्थय मंत्री अनिल विज के तीखे तेवरों ने भाजपा की खट्टर का स्वास्थय बिगाड़  दिया है।

खट्टर की कार्यशैली न तो भाजपाई विधायकों व दिग्गजों को रास आ रही है और न ही प्रशासनिक तंत्र को। नौकरशाही और सरकार का तालमेल न होना हरियाणावासियों के लिए परेशानी बना हुआ है, क्योंकि उनका कोई काम नहीं हो रहा है।

राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था, किसान व कर्मचारियों की परेशान, बेलगाम सरकारी तंत्र ने प्रदेशवासियों को खट्टर सरकार को खट्टारा सरकार कहने पर मजबूर कर दिया है।

खट्टर सरकार की तबादला नीति को लेकर भाजपाई शीर्ष नेतृत्व पर दवाब बढऩा शुरू हो गया है कि मुख्यमंत्री का तबादला किया जाए, अन्यथा झाडू हरियाणा में दस्तक देकर दिल्ली की तर्ज पर भाजपा को राजनीतिक जख्म दे सकता है।

प्रदेश की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि भाजपाई शासन में सबसे ज्यादा परेशानी भाजपाईयों को ही है, क्योंकि अफसरशाही उनकी सुनवाई नहीं करती, बल्कि अपमानित करने से भी नहीं चूकती। भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का दावा खट्टर सरकार का मुंह चिढ़ा रहा है।

सिरसा का चर्चित तहसील कार्यालय घपला प्रकरण व नगर परिषद का स्ट्रीट लाईट घोटाले के दोषी खुलेआम दनदना रहे है, क्योंकि इन घोटालों में वरिष्ठ अफसरशाही की संलिप्तता की बू नजर आती है, जिस कारण मामले को दबाया जा रहा है। भाजपाई शासन पर हावी अफसरशाही की बदौलत प्रदेशवासी खट्टर सरकार को खट्टारा सरकार कहने पर मजबूर हो गए है।

दिल्ली चुनाव में मतदाताओं द्वारा भाजपा को दिखाए गए आईने से राज्य के भाजपाईयों में आस बन रही है कि खट्टर सरकार अपनी शैली में बदलाव लाएगी और उनके भी अच्छे दिन आएंगे।

प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर दर्शाती है कि खट्टर सरकार भाजपाईयों व प्रदेशवासियों की भावनाओं को समझते हुए निगम, बोर्ड व अन्य संस्थाओं के चेयरमैन सदस्य बनाने पर तेजी से विस्तार कर रही है, जल्द ही इस पर अमल हो सकता है।

 खट्टर सरकार को खट्टारा सरकार बनाने के लिए प्रयासरत् प्रशासनिक तंत्र को लेकर मुख्यमंत्री गंभीर हो गए है और सरकार व पार्टी की भावनाओं मुताबिक सरकार चलाने की रणनीति बनाने लगे है।

प्रदेशवासियों की उम्मीदें भी सत्तारूढ़ भाजपा से है, क्योंकि प्रमुख विपक्षी दल इनैलो की अभी तक मातमी धुन बज रही है, जबकि कांग्रेस आपसी कलह के चलते राजनीतिक हाशिये पर चली गई है।  (प्रैसवार्ता)

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