गोड्डा बना गौ तस्करी का अड्डा, कहां है आरएसएस के रघु’राज!

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cow-crimeराजनामा.कॉम (नागमणि कुमार)। गोड्डा में गौ तस्करी का धंधा चरम सीमा पर पहुंच चुका है। बंगाल सीमा से सटे गोड्डा जिले के तीन स्थानों बांझी, डुमरिया और प्यालापुर पर लगने वाली साप्ताहिक हाटों में हर सप्ताह लगभग 15 हजार गाय तस्करों के गोरखधंधा का शिकार हो जाया करती हैं। खुले बाजार से गायों को खरीदकर बांग्लादेश और कत्लखाने तक पहुंचाने का सिलसिला जारी है।

सूत्र तो यह भी बताते हैं कि दाउद इब्राहिम की डी कम्पनी भी इस जालसाजी के पीछे शेयरदार बना हुआ है। वहीं, गोड्डा जिला प्रशासन हाथी की तरह मदमस्त नजर आ रहा है।

cow_crime_goddaगौ तस्करी की कहानीः गोड्डा जिले के तीन स्थानों बंका डुमरिया, प्यालापुर में लगने वाले साप्ताहिक हाटों में बड़े पैमाने पर गाय बेची जाती है।

अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक बंका हाट में 3000 गायों (शनिवार) डुमरिया हाट में 5000 गायों (रविवार) और प्यालापुर में लगभग 7000 गायों को प्रत्येक साप्ताहिक हाट में बेच दी जाती है। तीनों हाट मुख्य सड़क से लगभग सटे है। मगर गौ तस्कर इसे प्रशासन के सह पर बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजवाने का काम आसानी से कर रहा है।

दुधारू पशुओं और खेती योग्य जानवरों की आड़ में बूढ़ी गायों की तस्करी यहां आम बात है। सड़क के रास्ते जानवरों को आसानी से ले जाने के लिए दर्दनाक तरीके से पैर में नाल भी ठोका जा रहा है।

पूरे धंधे को कानूनी जमला पहनाने के लिए माफियाओं द्वारा अवैध चिट्ठा भी दिया जा रहा है। वहीं, मुनाफे का धंधा बन चुके इस तस्करी पर गोड्डा जिला प्रशासन साथ देता नजर आ रहा है।  इतना ही नहीं प्रशासन के पास सम्बन्धित विषय के बारे में किसी तरह का आंकड़ा भी मौजूद नहीं है।

godda dcsp_goddaक्या कहते हैं अधिकारीः गोड्डा में लम्बे समय से चल रहे इस गोरखधंधे पर अधिकारियों का बयान चैंकाने वाला है। जिला उपायुक्त राजेश शर्मा का कहना है कि अभी तक गाय की खरीद बिक्री पर रोक लगाने का कोई सख्त कानून नहीं बना है। वहीं, पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र ठाकुर का कहना है कि इस पूरे प्रकरण की पुलिस को अब तक कोई जानकारी ही नहीं है।

गौ तस्करी का आइनाः गौ तस्करी पर झारखंड में आंशिक प्रतिबन्ध का कानून है। जिसका कोई असर राज्य में नजर नहीं आता है। कानून के बावजूद इस गोरखधंधे के फलने-फुलने का एक बड़ा कारण बड़े गिरोह का शामिल होना बताया जा रहा है।

cow1वहीं, व्यवसायियों द्वारा इस खरीद-फरोख्त को आमजनों की मजबूरी का नतीजा बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बिगड़ते हालात और दहेज का पैसा जुटाने के चक्कर में लोग गाय को बाजार में बेचने की वस्तु बना चुके हैं।

कहते हैं गुनाह करने वाले से ज्यादा गुनाहगार गुनाह करवाने वाला होता है। गौ तस्करी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसमें गौतस्करों के लिए गाय उपलब्ध करवाने का काम हमारे ही समाज के जरूरतमंद लोग करते हैं।

निश्चत रूप से एक पक्ष यह भी है कि बेटी व्याह करवाने और बेटे के ईलाज में भारी रकम जुटानी पड़ती है। जिसके चक्कर में उन्हें चल-अचल सम्पत्ति को बेचना पड़ता है। कड़वा सच यह भी है कि दहेज प्रथा बंद कराए बिना तथा स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर किए बिना गौ तस्करी रोकथाम की बात करना थोथी दलील है।

मगर सवाल उठता है कि इसकी आड़ में बड़े स्तर पर गौतस्करी का धंधा करना कहां तक जायज है? 

और अन्त में मुद्दे की बातः गौ तस्करी के मसले पर गोड्डा का दृश्य काफी हैरतअंगेज है। जरूरतमंदो की आड़ में तस्करी का धंधा फलफूल रहा है। कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है। वहीं पुलिस प्रशासन मात्र चंदा उगाही में लगा हुआ है।

चैंकाने वाली बात तो यह है कि जिन हाटों का डाक हो चुका है वहां से सम्बन्धित लेखा-जोखा किसी विभाग या अधिकारी के पास नहीं है।

इतना ही नहीं कथित मसले पर जिला प्रशासन के साथ-साथ भाजपाई जनप्रतिनिधि भी खामोश हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं झारखंड में जंगलराज तो नहीं?

हिन्दूत्व की बात करने वाली आरएसएस भी कथित मसले पर गोड्डा में कहीं नजर नहीं आ रही और अन्त में सबसे अहम सवाल उठता है कि आखिर गो वंश की रक्षा की बात करने वाली मोदी सरकार कब तक में गौ हत्या के मसले पर बनाएगी केन्द्रीय कानून?

इस खबर से संबधित वीडियो खुलासा देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करेंः…. गोड्डा बना गौ तस्करी का अड्डा (वीडियो)

 ………गोड्डा से नागमणि कुमार की खोजपरक रिपोर्ट

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