गायन-अभिनय की ‘संगम’ का नाम है खुशबू-प्रवीण उत्तम !

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 khushbu uttamथियेटर और संगीत में साथ-साथ हमदम की तरह चलने वाले दम्पति का नाम है खुशबू-प्रवीण उत्तम। जिन्हें गायन और अभिनय के क्षेत्र में कई अवार्ड मिल चुके हैं और 24 दिसम्बर को भी इन्हें अवार्ड मिलने वाला है। खुशबू जहां गायन के क्षेत्र में अपनी कला की खुशबू बिखेर रही हैं, वहीं इनके पति प्रवीण उत्तम इनके साथ गायन के अलावा थियेटर में अपनी अदाकारी के जलवे बिखेर रहे हैं। दोनों का मानना है कि गायन और अभिनय दो अलग-अलग विधाएं कला के समुन्दर में समाहित हैं।

संगीत पटल पर तेजी से उभर रही दपंति खुशबू उत्तम और प्रवीण उत्तम से राजनामा.कॉम के लिये अनिल शर्मा ने अलग-अलग विशेष बातचीत की। प्रस्तुत है उसके मुख्य अंशः

khushboo-1खुशबू उत्तम

आपकी जन्म दिन, शिक्षा, वगैरह क्या है ?  खुशबू उत्तमः मेरा जन्म दिन 1 अक्टूबर,1989है और स्नातक है।

गायन और अदाकारी के क्षेत्र  में कब से हैं और इसे पेशे के रूप में कब अपनाया ?    खुशबू उत्तमः गाने का शौक तो मुझे बचपन से था और हम इसे पेशे के रूप में 2007 से अपनाए हैं।

आप कितने गाने गा चुकी हैं ?  खुशबू उत्तमः लगभग 3-4 हजार  गाने गा चुकी हूं।

और फिल्मों में ?  खुशबू उत्तमः 10-15 फिल्मों में भी गा चुकी हूं।

एलबम भी निकले होंगे ?  खुशबू उत्तमः जरूर निकले हैं।

आपकी शादी लवमैरेज थी या अरेंज ?  खुशबू उत्तमः दोनों। लव मैरेज भी थी  और दोनों के परिवारों की सहमति से अरेंज भी।

गायन के शौक के लिए ससुराल वालों की परमिशन भी लेना पड़ी होगी ?  खुशबू उत्तमः शादी के पहले मैं जरूर बाउंडेड थी, लेकिन शादी के बाद मुझे ससुराल वालों से काफी सपोर्ट मिला, मेरे ससुर, देवर और पति ने काफी सपोर्ट किया। मुझे अपने मम्मी-पापा से ‘यादा सपोटज़् ससुराल में मिला।

गायन विधा कहां से सीखी ?   खुशबू उत्तमः गायन विधा मैंने लखनऊ घराने की मशहूर गायिका रेखा माथुर जी से सीखी। उन्होंने मुझे क्लासिकल शास्त्रीय संगीत में ढाला।

khushboo1क्लासिकल या शास्त्रीय संगीत पुराने जमाने की बात हो गई आज कल आइटम सांग का क्रेज अधिक है ऐसे में अपने गायन को जिस प्रकार संभाल सलेंगी ?   खुशबू उत्तमः आज आइटम सांग की डिमांड ज्यादा है,लेकिन इससे ये कहना कि क्लासिकल सांग या म्यूजिक अपना रास्ता छोड़ देगा या ढल जाएगा,तो गलत है। पहले जमाने में राग-रागनियों,ठुमरी, दादरा, भैरवी आदि-इत्यादि बेशुमार रागों पर गायन होते थे जो अपने लिए और राजघरानों के लिए…राजा-महाराजाओं के लिए गाए जाते थे,लेकिन आज राजा भी बदल गए हैं और गाने भी आइटम सांग में ढल गए हैं।

अब तक कितने अवार्ड खुशबू मिल चुके हैं ?   खुशबू उत्तम: अब तक 6-7 अवाडज़् मिल चुके हैं और साल के आखिरी में 24 तारीख को भी अवार्ड मिलने वाला है। सन 2012 मेरे लिए काफी लाभदायक रहा है।

pravinप्रवीण उत्तमः

थियेटर में प्रस्तुतिकरण के दौरान कौन सी शैली अपनाई जाती है ?   प्रवीण उत्तमः ये ड्रामे की सिचुएशन और स्टोरी पर निभर्र करता है। कहानी हिन्दी हो यानी हिन्दी ड्रामा हो तो प्राकृत भाषा शैली और हावभाव वगैरह जो किरदार की डिमांड होती है। कभी-कभी प्रस्तुतिकरण में बरसों पहले की पारसी थियेटर की शैली भी नैचुरल रूप से अदायगी में आ जाती है।

आपके परिवार में दो अलग-अलग विधाएं हैं गायन (खुशबू) और एक्टिंग(प्रवीण) तो कैसा लगता है ऐसे में और जिस प्रकार एडजस्ट करते हैं ?   प्रवीण उत्तमः दोनों विधाएं वैसे तो मेरे ख्याल से अलग-अलग होने के बावजूद कला से जु$डी हैं। जिस प्रकार अलग-अलग नदियां सागर में मिलती हैं, वैसे ही ये दो अलग-अलग विधाएं कला में समाहित हो जाती हैं। मेरे परिवार में हम दोनों एक-दूसरे की कला का सम्मान करते हैं। वैसे थियेटर ज्वाइन लिए मुझे ज्यादा समय नहीं हुआ है और इससे पहले हम दोनों सिंगिग में ही थे।

pravin1कोई किरदार की अदायगी के दौरान होने वाली ऊंच-नीच का पब्लिक द्वारा क्या रिस्पांस होता है?   प्रवीण उत्तमः हम लोग किरदार की अदायगी के लिए पूरी मेहनत और लगन से…खुद अपने आपको झोंक देते हैं, पब्लिक हर किरदार को अपने साथ जुड़ा पाए, हंसने वाला किरदार हो तो हंसे,रूलाने वाला किरदार हो तो आहें भरे, या सिसके…विलेन का किरदार हो तो उसे गाली बके यानी हर किरदार को प्रेजेंटकरते समय पब्लिक यानी दशर्कों का भी ध्यान रखना पड़ता है।

रोजाना के किसी ड्रामे वगैरह के लिए कितने घंटे रिहसर्ल करते हैं ?  प्रवीण उत्तमः रोजाना तीन घंटे।

केवल बिहार में ही थियेटर प्रेजेंट है या आउटडोर टूर भी होता हैं ?  प्रवीण उत्तमः हमारे थियेटर की देश भर में शाखाएं हैं। इसके बावजूद हमारा टूर बिहार के अलावा अन्य प्रदेशों में भी लगता रहता है।

भोजपुरी फिल्मों में इंट्री क्यों नहीं ली ?  प्रवीण उत्तमः भोजपुरी फिल्म में इंट्री की फिलहाल मेरे ख्याल से जल्दी नहीं है और फिर जब किसी फिल्म निमार्ता -निदेशक को हमारा काम पसंद आएगा तो बुलाएंगे। और फिर खुशबू के गाने वाली कई फिल्में आ चुकी हैं।

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