खूंटी में विकास के ये कैसे रास्ते हैं ?

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sunny-khunti-1खूंटी के एक गाँव में ग्राम सभा कर रहे लोगों पर उग्रवादी अंधाधुन फायरिंग करते हैं। 3 लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो जाती है। घटना के 15 घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुँचती है। इलाके को सील किया जाता है। मुआवजा बाँटने के बहाने पहली बार गाँव आने में बीडीओ के कमर में दरद हो जाता है। पुलिस के बड़े अधिकारी की गाड़ी रास्ते में ख़राब हो जाती है। लाश की कीमत का चेक परिजन को सौपा जाता है। फोटो खिंचाई की रस्म होती है फिर यही कहकर चेक ले लिया जाता है कि आप ब्लाक में आकर ले लीजियेगा नहीं तो उग्रवादी ये भी ले जायेगा। खूंटी के रायतोडंग से लौटने के बाद मेरे मन में कुछ सवाल उठे —

1. राजधानी से सटा खूंटी का इलाका आजतक क्यों नहीं खौफ से मुक्ति पा सका ?

2. पुलिस ग्रामीणों के कंधे पर बन्दुक रखकर उग्रवाद और नक्सलवाद से क्यों लड़ना चाहती है ?

3. राजधानी से सिर्फ 60 से 70 किलोमीटर दूर किसी जगह पर आज भी पुलिस को पहुँचने में 15 घंटे कैसे लग जाते हैं।

4. ग्रामीणों को राहत के रूप दिए गए चेक वापस ले लिए गए। क्योंकि प्रशाशन को आशंका थी कि उग्रवादी उसे भी ले जा सकते हैं। आखिर ये कैसी राहत ? कोई ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं होती की घर लाश भी न आये और राहत के चेक देने की जरुरत भी न पड़े।

5. अड़की जाने में आपके अधिकारी की गाड़ी ख़राब हो गई ? बीडीओ के कमर में दर्द हो गया? विकास के ये कैसे रास्ते हैं ?

…..जी न्यूज टीवी जर्नलिस्ट शन्नी शरद अपने फेसबुक वाल पर।

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