खुद के संदेश में फंसे झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष

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रांची। झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शहनवाज हसन नित्य नये मुसीबतों में फंसते नजर आ रहे हैं। उनकी व्यक्तिवादी छवि के लेकर संगठन से जुड़े रहे पत्रकार सदस्यों अपना हमला काफी तेज कर रखा है। लेकिन इस बार वे खुद के ही सफाई में उलझ गये हैं।

व्हाट्सअप केJJA पलामू  ग्रुप में उन्होंने जो कुछ लिखा है, उसमें उनकी नकारात्मक छवि साफ झलकती है। उन्होंने पत्रकार कमलकांत जी को संबोधित करते हुये लिखा है कि

झारखंड के जीजीपी को क्षापन सौंपते शहनवाज हसन के साथ अरविंद प्रताप

कमलकांत जी,

अरविंद प्रताप ने संगठन की सदस्यता कब ली, क्या यह आपको जानकारी है ? संगठन की स्थापना कब हुयी इसकी भी शायद आपको जानकारी नहीं है।

अरविंद प्रताप नक्षत्र न्यूज़ के एंकर थे, चैनल के बंद हो जाने के बाद वे नौकरी की तलाश में थे। वे मुझ से मई 2016 में पहली बार मिले, चैनल में कार्य करने की इच्छा जतायी। मैंने उन्हें झारखण्ड डेस्क का इंचार्ज बनाया। वे संगठन के सदस्य बने और मेरे साथ छोटे भाई की तरह चलते रहे। समस्या तब तक नहीं थी जब तक उन्हें न्यूज़ वर्ल्ड से समय पर वेतन(25,000 रु) मिलता रहा। पिछले 2 महीने से चैनल की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण उन्हें 2 माह का वेतन नहीं दिया गया। मैं पिछले महीने से अपने पिता जी की गंभीर रूप से बीमार होने के कारण परेशान हूं। उन्हें यह कहा गया जल्द ही उन्हें वेतन का भुगतान कर दिया जायेगा। वे मुझे यह कहने लगे मैं पत्रकार संगठन का अध्यक्ष होते हुये शोषण कैसे कर सकता हूं, (उनकी भाषा मर्यादा को लांग रही थी)

संकट तो बड़े बड़े मिडिया घराने के ऊपर आते हैं, ऐसे में साथ काम करने वाले सहयोग करते हैं न की बवाल काटते हैं।आपको भी यह जानकारी होगी IBN7 ने एक दिन में 200 से अधिक पत्रकारों की छुट्टी(आर्थिक संकट) के कारण कर दी, Hindustan Times के 7 Edition बंद हो गये। यहाँ तो उन्हें थोड़ा संयम ही रखने को कहा गया था।एक एंकर को न्यूज़ डेस्क का इंचार्ज बना दिया गया और वेतन भी उन्हें जो मिला वह अब कहीं और मिलने वाला नहीं है। न्यूज़ वर्ल्ड में कार्य करते हुये वे आकाशवाणी और कशिश न्यूज़ में  एंकर का कार्य भी करते रहे। ऐसे में आप यह समझ सकते हैं उन्हें कोई भी प्रबंधन बर्दाश्त नहीं कर सकता था। फिर भी मैं ने उन्हें समझाने का प्रयास किया पर वे समझने को तैयार नहीं थे।

अरविंद प्रताप का बस संगठन में इतना ही योगदान है कि वे मेरे साथ सभी जगह जाते थे, और उन्हें कुछ महीने के अंदर ही प्रदेश कमिटी में मैंने स्थान दिया। संगठन की स्थापना और स्थापना काल के सदस्यों का पूरा ब्यूरा आपको संगठन के वेबसाइट पर मिल जायेगा। संगठन से उन्हें निष्कासित किया गया है और वे पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें संगठन से अनुशासन तोड़ने के लिये निष्कासित किया गया है। संगठन नियम से चलते हैं और नियम की अवहेलना JJA में रहते हुये करने की अनुमति किसी को नहीं है। एक बात और जान लें मित्र प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल 2 वर्षों का है और  नियम में संशोधन मैं ने ही किया है, इसलिये आप यह समझ सकते हैं कि संगठन का उद्देश दुकानदारी नहीं केवल पत्रकार हितों की रक्षा है।

धन्यवाद  

शहनवाज हसन के इस संदेश से साफ स्पष्ट है कि अरविंद प्रताप का संगठन का प्रदेश सचिव बनने के पिछे कोई कबीलियत नहीं रही बल्कि, उनका संगठन में सिर्फ इतना ही योगदान रहा कि वे साथ सभी जगह जाते थे। इसलिये उन्हें कुछ महीने के अंदर ही प्रदेश कमिटी में स्थान दे दिया गया और मनभेद होने पर निकाल बाहर किया।

जाहिर है कि शहनवाज हसन पर जिस तरह के मनमानी बरतने के आरोप लग रहे हैं, उसकी पुष्टि उन्होंने खुद ही कर डाली है। पत्रकारों के बीच इसकी काफी चर्चा हो रही है।

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