खुदकुशी नहीं, मीडिया और राजनीति का भद्दा मजाक !

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राज़नामा.कॉम। इस बार मीडिया और राजनीति की आपाधापी ने देश के निरीह किसानों की परिभाषा बदल दी है। खास कर नई दिल्ली में बैठ कर अपनी स्वार्थ की रोटी सेंकने वालों ने तो हद कर दी है।

delhi_susite_farmar (8)आम आदमी पार्टी की ‘जंतर-मंतर रैली’ में राजस्थान के दौसा जिले के निवासी गजेंद्र सिंह कल्याणवत नामक एक शख्स की तथाकथित खुदकुशी ने कई सबाल खड़े कर दिये हैं।

गजेंद्र को किसान बताया जा रहा है लेकिन उसके बारे में एक किसान से कहीं अधिक एक मंझे हुए सामाजिक और राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय और समृद्ध व्यवसायी सूचनाएं आ रही है। देश-विदेश के जाने-माने हस्तियों के समक्ष अपने हुनर से हमेशा प्रकट रहे वह विधानसभा चुनाव भी लड़ चुका था।

delhi_susite_farmar (10)खबर है कि गजेंद्र सिंह कल्याणवत मूल रूप से दौसा जिले के बांदीकुई विधानसभा इलाके के रहने वाले था और वह युवावस्था से ही अपने चाचा गोपाल सिंह नांगल के साथ राजनीति में सक्रिय था। नांगल प्रधान और सरपंच भी रह चुके था।

delhi_susite_farmar (2)गजेंद्र ने बीजेपी के साथ राजनीति की शुरुआत की। वह बीजेपी के स्थानीय कार्यक्रमों में भागीदारी करते रहता था और सदैव चुनाव लड़ने की ख्वाइश पाले रखता था।

2003 में जब बीजेपी की तरफ से गजेंद्र सिंह को टिकट नहीं मिला तो उसने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

delhi_susite_farmar (6)गजेंद्र सिंह कल्याणवत ने सपा का दामन थामते ही 2003 का विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें उनको बीजेपी की अल्का सिंह से हार का मुंह देखना पड़ा। गजेंद्र इसके बाद भी राजनीति में डटे रहा।

उसने 2013 तक सपा में रहकर राजनीति की। इस दौरान गजेंद्र ने सपा जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य तक का सफर तय किया।

हालांकि 2013 में उन्होंने विधानसभा टिकट मिलने की आस में कांग्रेस का दामन थाम लिया। लेकिन जब कांग्रेस में गजेंद्र सिंह की अनदेखी की गई, तो उसने आम आदमी पार्टी को अपना लिया।

delhi_susite_farmar (7)कहा जाता है कि गजेंद्र सिंह इन दिनों घरेलू कलह से जूझ रहा था। से घर से निकाल दिए गया था। गजेंद्र ने अपने कथित सुसाइड नोट में भी इस बात की तरफ इशारा किया है।  गजेंद्र ने अपने सुसाइट नोट में लिखा है कि उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया है।

दरअसल, गजेंद्र के परिवार में किसी लड़की की शादी थी, लेकिन घर से निकाले जाने की वजह से वह दुखी था।

dausa_farmaerबहरहाल, गजेंद्र सिंह कल्याणवत की सुसाइट को लेकर पल-पल जिस तरह से सूचनाएं मीडिया में परोसी गई और राजनीति के सूरमाओं ने उस सड़ांध में आम जनमानस को सांस लेने को बाध्य किए रखा, वह देश के फटेहाल किसानों की मौजूदा हालात के साथ एक ओछी मजाक से अधिक कुछ नहीं है। ……. मुकेश भारतीय

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