खरसांवा की उपेक्षा और पत्नी की कमाई बनी अर्जुन मुंडा की हार का कारण

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munda-meera राज़नामा.कॉम (मुकेश भारतीय)। झारखंड की सत्ता पर 14 वर्षों में 9 सालों तक राज करने वाले भाजपा के सबसे बड़े महारथी अर्जुन मुंडा अपनी मांद में ही बुरी तरह से चुनाव हार गये।

उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा के दशरथ गागरई ने सीधे मुकाबले में कुल 11,966 मतो के भारी अंतर से पटकनी दी।

mira_electionअर्जुन मुंडा खरसावां विधानसभा क्षेत्र से पांचवीं बार अपनी किस्मत आजमा रहे थे। यहां से मुंडा पहली बार झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की थी और बाद में भाजपा में शामिल हो गये तथा वर्ष 2000 एवं वर्ष 2005 उन्होंने बतौर भाजपा प्रत्याशी फतह हासिल की।

इस विधानसभा चुनाव में मुंडा की हार का आंकलन करने पर साफ स्पष्ट होता है कि खरसावां के वोटरों ने उनके खिलाफ झामुमो के दशरथ गागराई को अपना विकल्प मान लिया था।

इसका एक बड़ा कारण लंबे अर्से तक सत्ताशीर्ष की कुर्सी पर रहने के बाबजूद उन्होंने क्षेत्र की ओर कोई खास संभव ध्यान नहीं दिये। वहां के विकास की कमान दलालों और बिचौलियों के हाथ में रही। उधर दशरथ गागरई जनता के बीच उनकी रोजमर्रा की समस्याओं के लिये संघर्षरत रहे ।

meera mundaआकड़े स्पष्ट करते है कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के दशरथ गागराई को कुल 72002 वोट और भारतीय जनता पार्टी के अर्जुन मुण्डा को कुल 60036 वोट मिले।

आलावे इंडियन नेशनल कांग्रेस के छोटराय किस्कु को मात्र 4927 वोट,  झारखण्ड विकास मोर्चा ( प्रजातांत्रिक) के प्रधान पासिंह गुन्दुवा  को 2523 वोट,  झारखण्ड पार्टी के मांगीलाल पुर्ती को 1639 वोट, जय भारत समानता पार्टी के कान्डे राम कुरली को 993 वोट, निर्दलीय  लालजी राम तियु को 852 वोट,  जय मोहन सरदार आमरा बंगाली को 764 वोट मिले। जबकि 2,746 वोट नोटा पर दबे।

meera munda1जाहिर है कि अन्य प्रत्याशियों में किसी को भी इतने मत नहीं मिले, जिसकी घुसपैठ मुंडा की हार का कारण बने। उनके कुल वोट के जोड़ भी हार की अंतर को नहीं पाट सकता।

सबसे बड़ी बात कि अब अर्जुन मुंडा पहले वाले नहीं रहे। सड़क से सदन में उपस्थिति दर्ज करने वाले मुंडा का स्टेटस अब बदल गया है। उनकी पत्नी मीरा मुंडा तक करोड़ों का कारोबार कर पूंजीपतियों की कतार में खड़ी हो गई है।

अर्जुन मुंडा द्वारा नामांकण के दौरान दाखिल शपथ पत्र में उल्लेख मीरा मुंडा की संपति के विवरण की प्रतियां भी वोटरों के बीच बांटी गई।

इस बार जहां अर्जुन मुंडा जहां अन्य प्रत्याशियों के क्षेत्र में उड़ान भर रहे थे वहीं, चुनाव प्रचार की कमान उनकी पत्नी संभाल रही थी। जिनके साथ कई ऐसे चेहरे थे, जिनकी पहचान जन विरुद्ध मानी जाती है और मुंडा राज में खूब कमाया-खाया है।

देखेंः अर्जुन मुंडा द्वारा दाखिल शपथ-पत्र

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