क्या हथेली पर जेल की मुहर लगी थी

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विगत  छह जनवरी को बिहार की राजधानी पटना में  सेक्स रैकेट के संचालन एवं रेप के आरोप में गया के उप मेयर  मोहन श्रीवास्तव को सात जनवरी को जेल भेजने की तैयारी पुलिस कर रही थी कि राजद के विधायक सुरेन्द्र यादव से रास्ते मे भेट हुई।  उनकी हथेली पर एक मोहर लगा हुआ था । वह मोहन श्रीवास्तव से मिलने कोतवाली थाना जा रहे थे। जेल के अंदर जाकर कैदी से मुलाकात करने वाले के हाथ या हथेली पर हीं जेल की मुहर लगती है ।

मोहन श्रीवास्तव को कोतवाली से कोर्ट भेजा जा चुका था । चुकि उस दिन मेरा भी एक केस हाई कोर्ट मे था इसलिये मैं पटना मे हीं था। मोहन जैसे पापी के खात्मे की शुरुआत हुई थी , मैं भी पटना सिविल कोर्ट पहुंच गया ।

सिविल कोर्ट मे पहले से हीं गया की एक महिला पार्षद के पति अनिल शर्मा अपने लाव लश्कर के साथ खडे थे मोहन श्रीवास्तव के नजदीकी मित्रो मे है, व्यवसायिक पार्नटर भी है और मोहन को बचाने के लिये एक करोड़  बीस लाख का आफ़र पटना पुलिस को मिला था। जिसमें से चालीस लाख रुपये लेकर अनिल शर्मा पटना गये हुये थे। पटना पुलिस ने पैसा नही लिया या पैरवीकारों को हिम्मत नहीं हुई , यह तो वही जाने । परन्तु यह जांच का विषय है कि वह पैसा किस खाते से निकला । अगर अनिल शर्मा के खाते की जांच हुई तो सच सामने आ जायेगा।

अनिल शर्मा को सीजेएम का कोर्ट नही पता था मैने बताया। सुरेन्द्र यादव भी वहां कोर्ट मे मोहन श्रीवास्तव से मिलने आये हुये थे। हथेली पर जेल की मुहर , साफ़ था बेउर जेल मे मोहन श्रीवास्तव के आराम की व्यवस्था करके आये थे।  वे हालांकि मेरे मुंह पर मोहन श्रीवास्तव को गाली दे रहे थे क्योंकि, नैतिक बल नही है प्रशंसा या बचाव करने की।

आखिर क्या कारण था कि राजद विधायक सुरेन्द्र यादव मोहन श्रीवास्तव के लिये इतने परेशान थे ? इस घटना के और भी ढेर सारे तथ्य है। मोहन श्रीवास्तव छह जनवरी को अपने साथी जितेन्द्र वर्मा, विनोद मंडल एवं अजय शर्मा के साथ पटना हाई कोर्ट मे मौजूद था और पास बनाने के लिये काउंटर पर लगा हुआ था।

हाई कोर्ट मे जाने के लिये पास बनवाना जरुरी है । पास बनवाने वाले फ़ार्म पर वकील का हस्ताक्षर जरुरी है जो मोहन के फ़ार्म पर नही था, काउंटर क्लर्क ने फ़ार्म वापस कर दिया , मोहन श्रीवास्तव ने खुद वकील का नकली हस्ताक्षर बनाकर अपना पास बनवाया । सीड्ब्लूजेसी 22722/13 की सुनवाई माननीय न्यायधीश किशोर कुमार मंडल के न्यायकक्ष 19 मे हुई । सुनवाइ मात्र दस मिनट मे पुरी हो गई और दुसरे दिन यानी 7 तारीख की डेट मुकर्रर हुई ।

मोहन और उसके मित्र देर से आये और न्यायकक्ष मे प्रवेश नही कर पायें। मैं अंदर था। तकरीबन साढे ग्यारह बजे मोहन हाई कोर्ट से बाहर चला गया । यह सच बहुत सारे पत्रकारो को पता है परन्तु न जाने क्यों नही निकाल रहे है। राजद विधायक सुरेन्द्र यादव भी शक के घेरे मे हैं।

…….गया से वरिष्ठ अधिवक्ता मदन तिवारी अपने फेसबुक वाल पर

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