कोई नहीं ले रहा संदिग्ध आतंकी के नियोक्ता अखबार का नाम ?

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ahmadराज़नामा.कॉम (मुकेश भारतीय)। कुत्ता कभी कुत्ता का मांस नहीं खाता है। यह बात इंसानों पर लागू होता है। हालांकि इसके अपवाद भी होते हैं लेकिन, वह अर्द्धवस्था में ही दिखता है। झारखंड की राजधानी रांची से एनआइए के हाथों पकड़ा गया गया संदिग्ध आतंकी उजैर अहमद को लेकर सभी समाचार पत्रों-न्यूज़ चैनलों में समाचार प्रकाशित-प्रसारित हो रहे हैं।

लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि किसी भी समाचार पत्र या न्यूज़ चैनल आदि ने उस अखबार का नाम नहीं खोला है, जिसके यहां उजैर अहमद मोस्ट वांटेड होने के बाबजूद लंबे अरसे से इलेक्ट्रीकल इंजीनियर की नौकरी कर रहा था और प्रेस की आड़ में अपने गतिविधियों को नित्य नया अंजाम दे रहा था।

अगर वह संदिग्ध एक बड़े मीडिया हाउस के अखबार से जुड़ा नहीं होता तो सब ऐसी की तैसी कर डालते। नियोक्ता कंपनी की बैंड बजा डालते।

Patna-Blastआज रांची से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान ने संदिग्ध आतंकी ने स्थानीय पृष्ट पर एक खबर प्रकाशित की है। खबर में उल्लेख है कि उजैर को संगठन में सरताज कोड दिया गया था। इसी कोड से वह पहचाना जाता था। जांच एजेंसियों ने कोड को डिकोडिंग किया तो पता चला कि सरताज रांची में रहने वाला उजैर है और वह एक अखबार (हिन्दुस्तान नहीं) में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है। एनआईए ने 10 अगस्त, 2012 को ही उसके खिलाफ दिल्ली थाने में केस दर्ज किया था। केस के सभी संदिग्ध आरोपियों पर दस लाख का इनाम भी था।

कहा जाता है कि उजैर अहमद का आतंकी संगठनों से काफी पुराना रिश्ता था। इंडियन मुजाहीदीन से पहले वह सिमी से जुड़ा था। आतंकवादी गतिविधियों में नाम आने के बाद जब देश में सिमी को प्रतिबंधित कर दिया गया तो  उससे जुड़े लोगों ने ही इंडियन मुजाहिदीन की नींव रखी थी। वर्ष 2008 में गुजरात में हुये धमाकों के बाद पहली बार इंडियन मुजाहिदीन का नाम आया था। इस संगठन ने धमाको की जिम्मेवारी ली थी।

एनआइए की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार रांची का उजैर सिमी और इंडियन मुजाहिदीन दोनों से जुड़ा था। इसका मतलब है कि वह वर्ष 2008 के पहले से ही आतंकी संगठनों का सक्रीय सदस्य था।

बहरहाल, दैनिक हिन्दुस्तान,रांची में प्रकाशित खबर में इस तत्थ को किस रुप में लिया जाये कि संदिग्ध आतंकी उजैर उर्फ सरताज एक अखबार में इलेक्ट्रीकल इंजिनियर है और वह अखबार दैनिक हिन्दुस्तान नहीं है।

सबाल उठता है कि आखिर किस अखबार (प्रेस) में नौकरी की आड़ में उजैर अपनी आतंकी गतिविधियों को बल दे रहा था। अगर वह दैनिक हिन्हुस्तान नहीं अखबार नहीं है तो क्या वह दैनिक प्रभात खबर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, दैनिक रांची एक्सप्रेस, दैनिक सन्मार्ग, दैनिक खबर मंत्र आदि में से कोई एक है ? आखिर इसका खुलासा राष्ट्रीय अखबार की औकात रखने वाले दैनिक हिन्दुस्तान या कोई अन्य अखबार क्यों नहीं कर रहा ?

“सरताज रांची में रहने वाला उजैर है और वह एक अखबार (हिन्दुस्तान नहीं) में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है। ” …ऐसा लिखने से इतना तो तय है कि सरताज उर्फ उजैर का नियोक्ता अखबार की करतूतों पर दैनिक हिन्दुस्तान भी पर्दा डाल रहा है। क्योंकि वह अखबार बड़ा रसुख वाला है और बड़े अखबार की आड़ में बड़ा धंधा होता है। राजनीति की तरह मीडिया भी इस हमाम में सब नंगे हैं और अपने हाथों से एक दूसरे की नंगई को ढकने का प्रयास करते हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान सरीखा अन्य अखबार भी यही कर रहा है। इस बात का पोस्टमार्टम कोई नहीं कर रहा है कि बिना कोई पड़ताल किये नियोक्ता अखबार ने सरताज उर्फ उजैर को एक महत्वपूर्ण पद पर कैसे नियुक्त कर लिया ? इसके पिछे कौन से तत्व काम कर रहे थे ?

क्या उस अखबार का स्वहित के सामने देश और  समाज कोई मायने नहीं रखते ! ऐसे कई सबाल हैं..जिसका जबाब रांची के स्वंभू संपादकों-पत्रकारों को आज नहीं तो कल देनी ही होगी। क्योंकि सबाल किसी एक उजैर उर्फ सरताज का नहीं है, यहां प्रेस की आड़ में कई उजैर उर्फ सरताज छुपे हो सकते हैं।

जांच एजेंसियों को भी चाहिये कि इस दिशा गंभीरता से पड़ताल करे। ताकि मीडिया की आड़ में कोई देशविरोधी और समाज विरोधी गतिविधियां  न चला सके। उसे प्रेस का प्रश्रय न मिल सके। जिसके प्रति लोगों में अभी थोड़ा बहुत सम्मान बाकी है।

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