कुछ अख़बार को देवत, कुछ पतरकार को देवत

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राजनामा.कॉम (विनायक विजेता)। रोज समाचार में सब हमरा नाम जपत: 

netaएक दिन एक नेता की पत्नी ने पूछा

अजी बताओ भ्रष्टाचार पर

लंबा-चैड़ा भाषण देने में

तुम्हे शर्म नहीं आती

नेताजी बोले..

डार्लिंग ये बात तो तुम्हें टीवी वाले बाबाओं से पूछनी चाहिए

कि क्या उन्हें लोगों का मूर्ख बनाते समय धर्म की याद नहीं आती

जब बाबा रामदेव को शमीज-सलवार पहन भागने में शर्म नहीं आती

आशाराम बापू जब कुमारी कन्यायों का कौमार्य तोड़ सकते हैं…

तो हम तो नेता ठहरे, कुछ भी कर सकते हैं..

भ्रष्टाचार की बात चलेगी

तो समझो हैं हम गूंगे-बहरे

फिर दूसरा सवाल पत्नी ने दागा

अच्छा बताओ क्या तुम्हारी आत्मा धिक्कारती नहीं

नेताजी बोले

आत्मा रहेगी तब न धिक्कारेगी

हम नेता तो आत्मा को परमात्मा विलिन कर दिए हैं।

यानी अपने को धन की देवी लक्ष्मी में लीन कर लिए हैं।

वैसे भी हम चार्वाक के अनुयायी हैं

यानी कि यावत जिवेत् सुखी जीवेत

अपनी जेब खूब भरत

कुछ अख़बार को देवत, कुछ पतरकार को देवत

रोज समाचार में सब हमरा नाम जपत

घोटाला पर घोटाला करत्

ऐसे हम लोग ऐष करत

बाकि जनता रो-रो मरत्

फिर नेताजी ने पत्नी को पत्नी धर्म याद कराया

और कहा कि पत्नी का काम आदर्श बघारना नहीं

पति के मन में नकारात्मक विचार डालना नहीं।

वह कैसी पत्नी

जो पति के वक्तृत्व कला पर इतराती नहीं

झूठ को सच साबित करने पर भी उसको प्रतिभावान मानती नहीं।

क्या गिरगिट की तरह रंग बदलना कला नहीं ?

क्या खुफीया एजेंसियों को नाको चने चबवाना प्रतिभा नहीं

डार्लिंग आज नही तो कल

अपने पति पर इतराओगी

जब पडोसन पैदल चलेगी और तुम हेलिकाप्टर उड़ाओगी। 

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