किशनगंजः निगरानी जांच में 6 शिक्षकों पर फर्जीवाड़े की पुष्टि

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किशनगंज। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में किशनगंज जिले के छह शिक्षकों पर फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। वर्ष 2008 में इनमें से तीन शिक्षकों ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और तीन शिक्षकों ने फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्ति पत्र ले लिया था।

माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निगरानी को जांच का जिम्मा सौंपा गया था। इन छह शिक्षकों पर टाउन थाने में निगरानी के पुलिस इंस्पेक्टर सत्यनारायण राम ने मामला दर्ज कराया है।

श्री राम के आवेदन के आलोक में टाउन थानाध्यक्ष ने थाना कांड संख्या 432/16 एवं 433/16 भादवि की धारा 341, 419, 420, 467, 468, 471 एवं 120 बी के तहत मामला दर्जकर लिया है।

जांच के क्रम में टुपामारी बेलवा निवासी गुफराना बेगम 29 दिसंबर 2010 से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर किशनगंज प्रखंड अंतर्गत मोतिहारा तालुका के प्राथमिक विद्यालय चानामाना में नियोजित शिक्षिका के पद पर मानदेय प्राप्त कर रही है। वहीं ग्राम टुपामारी बेलवा निवासी अनवारुल हक प्रा.वि.हालामाला दक्षिण में 29 दिसंबर 2010 से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर नियोजित होकर मानदेय प्राप्त कर रहे हैं।

इसी प्रकार ठाकुरगंज प्रखंड के पौआखाली निवासी जरियातुन निशा ने प्रा.वि.सुभाषपल्ली में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर नगर शिक्षिका के पद पर नियोजित हैं। वहीं टाउन थाना अंतर्गत दर्जीबस्ती निवासी मरजीना खातून ने नगर नियोजन इकाई से नियोजित होकर 22 सितंबर 2007 से प्रा.वि.कजलामनी में नगर शिक्षिका के पदपर मानदेय प्राप्त कर रही है। इनका अंक पत्र फर्जी है।

वहीं टाउन थाना अंतर्गत ग्राम चन्दवार अनगढ़ पूर्णिया निवासी मो.पेशकार अली ने प्रखंड नियोजन इकाई से नियोजित होकर उमवि समदा में प्रखंड शिक्षक के पद पर मानदेय प्राप्त कर रहे हैं।इनका भी अंक पत्र फर्जी है। वहीं टाउनथाना अंतर्गत ग्राम सिमलबाड़ी गाछपाड़ा निवासी बीबी सबीता प्रवीण ने 15जून 2005 से प्रखंड नियोजन इकाई से मवि सिमलबाड़ी में पंचायत शिक्षक के पद पर नियोजित होकर मानदेय प्राप्त कर रही है। इनका भी अंक पत्र फर्जी है।

फर्जी अंकपत्र वाले तीनों शिक्षकों का अंक पत्र व प्रमाण पत्र फर्जी होने की पुष्टि बिहार राज्य मदरसा बोर्ड ने भी किया है।मरजीना खातून, मो. पेशकार अली व वीवी सबीता प्रवीण द्वारा साजिश पूर्वक फर्जी अंकपत्र व प्रमाण पत्र सृजित कर इसे असली रुप में उपयोग कर शिक्षक की नौकरी प्राप्त की है। इस कार्य में इन तीनों के अलावा अन्य की भी सहभागिता प्रतीत होती है। इन शिक्षक-शिक्षिकाओं ने माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा दिए गए क्षमादान अवधि में त्याग पत्र नहीं दिया था।

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