काश रामजीवन बाबू की ‘संचिका’ को चिदम्बरम तक समझ पाते!

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वर्ष1990: बिहार में कांग्रेस को हटाकर जनता दल सत्ता में आयी थी। लालू प्रसाद मुख्य मंत्री बने थे। उनके एक मंत्री थे पुराने सोशलिस्ट रामजीवन सिंह। उन्हें कृषि, पशुपालन, मत्स्य सहकारिता मंत्री बनाया गया था……………..”

हर नई सरकार की तरह पुरानी सरकार की फाईल खंगाली जा रही थी। सत्ता के गलियारे में पलने वाले और अफसर नेताओं को चासनी चखाने वाले ग्रुप नए सिरे से सचिवालय में बदले वातावरण में संपर्क सूत्र साधने में लगे थे।

पुरानी फाइलों के बिल पास कराने के लिए बोलियां लगा। तौलने की उनकी लॉबी सक्रिय थी। पशुपालन विभाग बदनाम था फर्जी बिल भुगतान को लेकर।

पशुपालन मंत्री के रूप में रामजीवन सिंह के पास फाइल आयी। कांग्रेस राज के एक बिल के भुगतान की। श्री सिंह जो हमेशा फाइल पढकर ही कार्यवाही बढाते थे। उस बिल भुगतान में गड़बड़ी का संदेह हुआ।

उन्होंने भुगतान पर रोक लगा दी और सीबीआई से जांच कराने की अनुशंसा फाइल पर ही लिखकर कर मुख्यमंत्री से कर दी। पशुपालन माफिया की लॉबी ने पहले धन का आफर दिया। अनेक रूपों से पैरवी करवाई।

पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र सहित प्रभावी नेताओं व अफसरों के सिफारिशी पत्र और अनुशंसा दवाब सब आया। श्री सिंह डिगे नहीं।

बाद में मुख्यमंत्री की हैसियत से लालू प्रसाद ने उस बिल का भुगतान कर दिया और 1990 में ही रामजीवन सिंह से पशुपालन मंत्री का पद लेकर दूसरे को बना दिया गया।

उसके बाद तो पशुपालन माफिया इतने सक्रिय हो गए कि पशुपालन घोटाला वर्षों चलता रहा। सीएम से लेकर मंत्री अफसर तक ने बहती गंगा में खी हाथ धोए।

वर्ष 1995-96 -97 में बिहार में चारा घोटाला की बदबू सड़ांध मारने लगी। सीबीआई ने जांच की। वह फाइल भी आयी। मुख्य मंत्री, पूर्व मुख्य मंत्री, अफसर सबसे पूछताछ हुई। रामजीवन सिंह से भी पूछताछ हुई।

सब जेल चले गए सिर्फ़ रामजीवन सिंह को छोडकर। 1989 से 1995 तक के मुख्यमंत्री, पशु पालन मंत्री, विभागीय अफसर सभी को कारागार नसीब हुआ। रामजीवन जी हमेशा कहते थे ‘चोरी नहीं करेंगे तो फंसेगे नहीं’।

पी. चिदम्बरम इसे कभी समझ नहीं सके। चिदंबरम ने तमाम बड़े मंत्रालय जैसे वित्त, वाणिज्य, गृह आदि संभाले। विदेशी उच्च डिग्री प्राप्त चिदम्बरम सबके गुरु माने जाते थे। लेकिन एक चोरी के मामले में धर लिए गए। गड़बड़ी और पाप का परिणाम भोगना ही पाडता है।

उस रामजीवन सिंह को नीतीश कुमार ने 2009 में जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहते टिकट से वंचित कर दिया। लेकिन श्री रामजीवन सिंह मंत्रियों व अफसरों के लिए एक महत्वपूर्ण बात बराबर कहत रहे कि सांप और संचिका एक जैसी। कभी भी डंस सकते हैं। (स्रोतः व्हाट्सएप्प, लेखकःअज्ञात)

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