काला धन नहीं, काली मुद्रा बाहर लायेगी नोटबंदी

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सरकार के बड़े नोटों को चलन से बाहर करने के निर्णय से हालांकि काला धन पूरी तरह से तो समाप्त नहीं होगा, लेकिन इससे बाजार में प्रचलित काली मुद्रा पर अंकुश जरूर लग जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाजार में प्रचलित 500 और 1,000 रुपये के बड़े नोटों की कानूनी वैधता समाप्त करने की 8 नवंबर को घोषणा की थी, जो उसी दिन रात्रि 12 बजे से प्रभावी हो गई।

इसके बाद अभी तक चलने वाले नोट 11 नवंबर के बाद महज कागज के टुकड़े रह जाएंगे। हालांकि लोग अपनी पहचान बताकर एक निश्चित राशि अपने बैंक खाते में जमा करा सकते हैं।

‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया’ में भारतीय शाखा के प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक रामनाथ झा कहते हैं कि सरकार का फैसला काली मुद्रा के खिलाफ है, काले धन के खिलाफ नहीं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया’ भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है।

रामनाथ झा ने बताया कि जिस पैसे पर सरकार को कोई टैक्स नहीं दिया जाता है अथवा सरकार से छुपा कर रखा जाता है, वह काला धन कहलाता है। काला धन गैर-कानूनी अथवा अवैध तरीके से एकत्रित किया हुआ हो सकता है। यह नोटों की शक्ल में हो सकता है, प्रापर्टी में लगाया गया हो सकता है, आभूषण के रूप में हो सकता है। बेनामी सौदों में भी काले धन का जमकर प्रयोग होता है। सरकार को बिना कर अदा किये रुपयों के रूप में मौजूद नगदी को काली मुद्रा कहते हैं, जबकि काली मुद्रा के जरिये बनायी गयी चल-अचल संपत्ति काला धन कहलाती है।

रामनाथ झा ने बताया कि मोदी सरकार के इस फैसले से सिर्फ बाजार में मौजूद काली मुद्रा पर फर्क पड़ेगा, काले धन पर नहीं।

उन्होंने बताया कि काली मुद्रा के निवेश से जो चल अचल संपत्ति बनायी गयी है उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि एक ओर तो काली मुद्रा या नोटों को निशाना बनाकर काली मुद्रा पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है, वहीं दूसरी ओर 2,000 रुपये का नोट जारी करके इसे संदिग्ध भी बना दिया गया है। बड़े नोट जारी करने के एक-दो दशक बाद फिर से बाजार में काला धन आने की आशंका भी है।

झा ने बताया कि सरकार का यह कदम ज्यादातर फेक इंडियन करेंसी नेटवर्क’ एफआईसीएन को ध्वस्त करने के लिए उठाया गया है।

रामनाथ झा ने सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और इस प्रकार के कड़े कदम की सराहना करते हुये कहा कि देश की अर्थव्यवस्था से अघोषित पैसे को खत्म करने के लिए अभी कई कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

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