कानून यशवंत सिन्हा की रखैल नहीं है आडवाणी जी

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राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय)।  भाजपा के आम नेताओं की बात क्या करना, जब उसका आला नेता ही कायदा-कानून और नियम-व्यवस्था को ठेंगे पर रखते हो। भाजपा के यशवंत सिन्हा तो दूर भारत सरकार के गृह मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री रहे लालकृष्ण आडवानी द्वारा हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में अपने लाव-लश्कर के साथ राजनीतिक बैठक करना संवैधानिक व्यवस्था को किस श्रेणी में रखता है, यह एक बड़ा बहस का मुद्दा हो सकता है।

yashwant_adwani_jail1यशवंत सिन्हा कोई गांधीगिरी कर जेल नहीं गये हैं। बिजली-पानी-सड़क आदि जैसे समस्या उनके लिये मायने रखती तो आज हजारीबाग की सूरत झारखंड के अन्य शहरों की अपेक्षा काफी बेहतर होती। वे इस संसदीय क्षेत्र का कई बार प्रधिनित्व करते हुये देश के वित्त मंत्री रह चुके हैं। लेकिन महज हिन्दुत्व के घोड़े पर सवार भाजपा के इस महारथी ने आम जनता की समस्याओं की कभी कोई सुध नहीं ली।

यशवंत सिन्हा की अगुआई में भाजपाई उन्मादियों ने बिजली की समस्या को लेकर विभाग के एक महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को रस्सी-पगहा में बांध कर पीटा। यह सब जानते हैं कि बिजली की समस्या कोई एक अधिकारी के बूते की बात नहीं है और न ही तात्कालीन सरकार की। यहां बिजली की किल्लत लंबे समय से चलती आ रही है। जिसमें राज्य में 8 सालों तक उनकी ही पार्टी के अर्जुन मुंडा की सरकार का अहम भूमिका रही है।

yashwant_woman_bjpयशवंत सिन्हा स्वंय आईएएस अधिकारी रहे हैं। वे यह भलि-भांति जानते हैं कि समस्याओं की असली जड़ कहां होती है और हजारीबाग जैसे अति पिछड़े शहरों के लिये जिम्मेवार कौन लोग हैं। उन्हें खुद की गिरेवां भी झांकनी चाहिये।

झारखंड में यशवंत सिन्हा इकलौते ऐसे भाजपाई दिग्गज हैं, जिन्हें पार्टी के मोदी लहर पर विश्वास नहीं था। उनमें इस संवेदनशील सीट से हार का भय इतना था कि उन्होंने चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर दिया और जगह कोई दूसरा न हड़प ले, अपने बेटे जयंत सिन्हा को डमी खड़ा कर दिया। जयंत की किस्मत रही कि मोदी लहर उनकी नैया पार लगा गई।

वेशक यशवंत सिन्हा ने एक बिजली अधिकारी के साथ जो कुछ भी किया-करवाया, वह संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। इसे किसी जनहित आंदोलन के रुप में कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी उन्होंने व्यवस्था के बाद कानून के साथ थेथरई करते हुये जमानत लेने से इंकार कर दिया और जेल में रह कर रादनीति करने लगे। उनकी इस घटिया राजनीति में सरयु राय, रघुवर दास, शत्रुध्न सिन्हा, राजीव प्रताप रुढ़ी, शहनबाज हुसैन सरीखे नेताओं ने खुल कर साथ दिया।

sinha_bagसबाल उठता है कि जब यशवंत सिन्हा ने कोई अपराध नहीं किया, सब कुछ जनहित में किया तो फिर लालकृष्ण आडवानी मिलन के बाद सशर्त जमानत क्यों ली ? यह जमानत तो पहले भी लिया जा सकता था।

बहरहाल हजारीबाग सेंट्रल जेल में यशवंत सिन्हा और लालकृष्ण आडवाणी मिलन की  जैसी तस्वीरें सामने आई है, उससे साफ है कि न्यायायिक व्यवस्था भी इनके लिये कोई मायने नहीं रखती है। जाहिर है कि इन उदाहरणों से आम लोगों के बीच कानून को लेकर असंतोष बढ़ेगा। सक्षम न्यायालय को भी चाहिये कि ऐसे संगीन मामलों को गंभीरता से स्वतः संज्ञान ले और कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे ताकि यह मिथक साफ हो कि इस देश में दो कानून है ?

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