सिर्फ ‘नमो’ से उम्मीद !

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वेशक सोशल मीडिया नेटवर्क और वेब जर्नलिज्म ने आम आदमी की वाक्य व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को एक नई दिशा प्रदान की है। स्थापित समाचार पत्र-पत्रिकाएं हो या न्यूज चैनलें…..खास लोगों की ही थेथरई पर आ टिकी है। वह आम जन-मानस के विचारों से इतर अधिक मंत्र गढ़ते दिखते हैं। जबकि आवाम की आवाज काफी अलग होती हैrakesh

आज कल फेसबुक पर सक्रीय जमशेदपुर के राकेश मिश्र जी से चैट बॉक्स के द्वारा उन्हें देश-प्रदेश को लेकर टटोलने की कोशिश की तो उनके जबाव में कई सबाल महसूस किया। जिसका जबाव इस देश के कर्णधार नेताओं को हर हाल में देनी चाहिये। क्योंकि सबाल सिर्फ राकेश जी जैसे गांव-शहर से जुड़े एक युवा की नहीं है अपितु, सबाल है विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के वैसे करोड़ों युवा की, जो देश-प्रदेश की सत्ता निमार्ण में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं…लेकिन उनकी टीस बरकार रह जाती है।

प्रस्तुत है राजनामा.कॉम के संपादक मुकेश भारतीय के साथ श्री राकेश मिश्र की अंतरंग बातचीत के  मूल अंशः

राकेश जी नमस्कार,आप अपने बारे में संक्षिप्त तौर पर बतायें..शिक्षा-पेशा-कारोबार आदि ?  …. नमस्कार मुकेश जी, मै अंडर ग्रेजुएट हूं और अर्थ मूविंग के कारोबार में हूं। पोकलेन, JCB जैसे मशीनों को किराये पर भी देकर जीवन यापन कर रहा हूं।

आज देश के सामने आपकी नजर में सबसे बड़ी चुनौती और उसा समाधान क्या है ?  ….आज देश के सामने कुशासन सबसे बड़ी चुनौती है। सारे समस्याओं की जड़ भी वही है। नेताओं को जनता के प्रति जबाबदेह होने के लिए बाध्य करना ही समाधान है। कोई नेता नहीं चाहता कि जनता को और अधिकार मिले। .

कांग्रेस और भाजपा को किस तरह देखते हैं..समानता-अमानता ?  …….कांग्रेस जैसी पार्टी तो लोकतंत्र के नाम पर धब्बा है। वह हम भारतीयों को राजतंत्र के तर्ज़ पर शासन देती है। उसने इतने वर्षो के शासन के बाद भी देश की बुनियादी समस्याओं को अपने फायदे के लिए बरक़रार रखा। जातपात,धर्म का सबसे ज्यादा इस्तमाल कांग्रेस ने किया। बीजेपी भी कोई दूध की धुली नहीं है। पर वह कांग्रेस से जयादा लोकतांत्रिक पार्टी है। वह हिन्दुओ की बातें करती है। वह राष्ट्रवाद की पक्षधर है।

मोदी जी और राहुल जी जैसे बड़े दल के नेता को फेंकु और पप्पु कहा जाना चाहिये ? ……..मोदी जी एक आम आदमी से खास आदमी बने है। उन्होंने करीब से लोगो के तकलीफ को देखा होगा। वह स्पस्ट रूप से अपनी बाते रखते है। वह बुलंद इरादों वाले नेता है। वे साहसी है। वे परिपक्व राजनेता है। उनमें विकास करने की सुशासन देने की, निर्णय लेने की क्षमता दिखती है। उन्होंने खुद को प्रूफ किया है कि हिन्दूत्वा के समर्थक है

आखिर मोदी जी में आप क्या संभावनायें देखते हैं ? हिन्दुत्व समर्थन के आलावे ….विकास को लेकर…?  …..राहुल गांघी तो अपने अपरिपक्वता के कारण खुद का उपहास करवाते हैं। उनके आस-पास जमीन से कटे कुलीन लोगों का जामावड़ा रहता होगा। कोई लोगों की बातें सुनकर या टीवी देख कर ऐसा ही नेता बनेगा। और फेकू नाम पप्पू के प्रतिक्रिया में दिया गया नाम है, जो कांग्रेस की निकम्मी मानसिकता की उपज है। मै इधर कुछ दिन लगातार गुजरात में रहा। मैंने वहां अच्छी पुलिसिंग देखी। मैंने अच्छी और वैज्ञानिक खेती देखी। वहां के उधोग-धंधे देखे। वहां सफाई देखी। गुजरात में सुरक्षा का माहोल देखा। नदियों में साफ पानी देखा,जो कि पहले सुख चुकी थी। जिस तरह से एक अच्छा गार्जियन अपने घर को चलता है, उससे उम्मीद बंध जाती है।

मीडिया को लेकर आपकी राय क्या है ? …..मीडिया में आज भी काफी ईमानदार लोग है, पर ज्यादातर बड़े मीडिया घराने किसी न किसी के पक्षधरर है। वे अपना व्यवसायिक हित पहले देखते है, उनकी नैतिकता बस दिखावे के लिए है। आज की ही घटना पर गौर करें, जहाँ कुछ मिलना पक्का नहीं है, उस जगह का मिडिया ने पूरे घटनाक्रम के साथ पीपलीलाइव टाइप कवरेज किया। दूसरी तरफ हमारे देश के खदानों में इससे भी जयादा अकूत सम्पदा दबी पड़ी है। कोयला, लौह-अयस्क, बाक्साइट, ग्रेफाईट,लाइम स्टोन आदि जैसे अन्य कितनी खदाने है, जिसे नेताओं के साथ साठ गांठ कर चुपचाप निकाल कर लोग अरबपति- ख़रबपति बने जा रहे है। और देश को अपने लाभ के अनुपात में बहुत मामूली सा टैक्स देते हैं। ये प्रदुषण फैलाते है। ये नदियों और भू गर्भ का पानी इस्तेमाल करते है। पर बदले में ये कोई दायित्व निभाने की भी जरुरत नहीं समझते। पर इन सब बातो को कोई मिडिया कभी नहीं दिखलाएगा क्यूंकि, ये सब डाका उनके आका जो डलवा रहे हैं।

झारखंड जैसे प्रदेश में मीडिय और राजनीति की हालत ..आपकी नजर में ?  …..झारखण्ड की राजनीति तो बजबजाती हुई नाले के समान हो गई है। इसकी सफाई बहुत ही जरुरी है। खनिज संपदाओं से भरपूर इस राज्य को बदहाल सब कोई मिलकर रखना चाहता है। वह उद्योग जगत हो या सरकारें। यह राज्य सबके लिये एक चारागाह है और यहाँ की जनता साजिश के तहत दो पाटो में पुलिस और नक्सली के बीच पिस रही है। यहां की मीडिया की आवाज़ भी नक्कारखाने की आवाज़ बन कर रह जाती है। …. दो-तीन हज़ार रुपये में काम करने वाले पत्रकारों से खुद्दारी की कितनी उम्मीद की जा सकती है। आखिर उनका घर परिवार भी तो है।

युवाओं के सामने चुनौतियां…?  …… आज हमारे यहाँ युवा सिर्फ नौकरी के लिए पढाई करते हैं। स्वरोजगार के लिए कोई पढाई नहीं करता। अवसर की कमी उन्हें गुमराह करती है। चारो तरफ फैली बेईमानी और उनको मिलती स्वीकृति उन्हें सॉर्ट कट अपनाने को प्रेरित करती है।

 झारखंड में भ्रष्टाचार के आरोप में ढेर सारे दिग्गज जेल गये…कितनी कमी आई इस समस्या में ? ….ऐसा लगता है कि झारखण्ड में जेल जाना कोई शर्म की बात नहीं रह गई है। अब लालू यादव को ही देखिये। वे रोज जेल में दरबार लगा रहे हैं।  झारखण्ड में भ्रष्टाचार बहुत गहरे तक पैठ कर चूका है। लगभग सारे शीर्ष के नेता दागी है। झारखण्ड में नैतिकता की बात भी बाबुओ को मुर्खता लगती है। पर समय और पारिस्थिति सब कुछ ठीक कर देता है। फ़िलहाल स्थिति जस की तस है।

मरांडी-मुंडा-कोड़ा-शिबू-हेमंत सोरेन जी के राज काल को आप आप अलग-अलग किस रूप में देखते हैं ?  ……सब लगभग एक जैसी ही थी। परिस्थितियां बद से बदतर होती जा रही है।

इसके समाधान के रास्ते…?  …. केंद्र में एक अच्छी सरकार। फिर राज्य में एक अच्छी सरकार। लोगों को जागरूक और शिक्षित होना। गलत लोगों को नकारना। सोशल मीडिया के ज़माने में ये सब दूर की बातें नहीं।

अभी सोसल मिडिया की पहुंच वहां तक नहीं है…जहां (गांव) से सत्ता का मूल निर्माण होता है…फिर सोशल मीडिया पर भी तो पेडकर्मियों का बोलबाला होने की बात हो रही है…ऐसे में आपका क्या मत है ?   ……जड़ को फैलने में थो़ड़ा वक़्त तो लगेगा ही। जहाँ सत्ता के मूल का निर्माण होता है, उन्हें अपने रोटी के जुगाड़ से फुर्सत नहीं और राजनेता भी यही चाहते है। पर लोगो में कई कारणों से संवाद बढ़ रहा है जो समझ को बढ़ा रही है…..और सच कभी पेड़ कर बनाया नहीं जा सकता। ऐसा होता तो कांग्रेस के पास जयादा पैसा है।

कहीं आप यह तो नहीं कह रहे हैं कि कांग्रेस के पास अधिक पैसा है। इसीलिये अधिक दिनों तक उसका राज कायम रहा..?  ….यह तो भ्रष्ट सता की भुजायें होती है और सच मजबूत और संगठित होगा तो ये खुद गायब हो जायेंगे। आप ने सही कहा कि देश के सारे संसाधनों मीडिया, उधोग,  नैकरशाही…..सभी जगहों पर कांग्रेस की गहरी जड़े जमी हुई है। बीजेपी इसके सामने बच्चा है।

 ( उल्लेखनीय है कि राकेश मिश्र किसी दल के कार्यकर्ता नहीं हैं लेकिन , उनकी फेसबुक के पोस्ट, लाइकव टिप्पणी आदि से कांग्रेस के कटु आलोचक और भाजपा के घोषित पीएम उम्मीदवार गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी व  हिन्दुत्वादी विचारधारा के कट्टर समर्थक नजर जरुर आते हैं।)

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