राजनीति के अश्वत्थामा न बन जाएं केजरीवाल

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Arvind-Kejriwalआम आदमी पार्टी सत्ता में आई, तो राजनीति एक नयी राह की राह्गीर हो गयी। आज़ादी के पहले राजनीति स्वतंत्रता सेनानियों के कन्धों पर सवार होकर चलती थी, लेकिन आज़ादी मिलने के लगभग डेढ़ दशक के बाद राजनीति के कंधे पर नेता सवार होकर चलने लगे। उनकी एकमात्र तलाश कुर्सी की थी। कुर्सी जब मिल गयी और देश की आर्थिक नीतियां बदल कर उदारवादी हो गयीं तो नेताओं, खासकर सत्ताधारी नेताओं का,एकमात्र लक्ष्य वैभव का सुख प्राप्त करना हो गया।

धीरे-धीरे आम आदमी, राजनीतिक मूल्य और नैतिक मूल्य हाशिये पर चले गए। उदारीकरण और बाज़ारवाद के विरोध की आवाज़ नेताओं के पथरीले कानों से टकराकर लौट आयी।

राजनेताओं ने एक ओर राजनीतिक और नैतिक मूल्य़ों की मूर्ति तोड़ दी और दूसरी ओर अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए वे राजनीति पर श्रद्धा के फूल चढ़ा कर उसे उस रास्ते पर अपने साथ ले गए,जिस रास्ते पर उनका स्वार्थ सधता था। नैतिकता, अनैतिकता और देश-हित की बात का उन्होंने पूरी तरह परित्याग कर दिया। अपने इस काम से वे प्रतिष्ठित भी होने लगे।

सम्पूर्ण देश के एक सीमित स्थान पर ही सही,लेकिन आम आको ता दमी पार्टी ने एक ऐसा मुहीम छेड़ा है कि सभी इसकी ओर खिंचते चले आ रहे हैं। इसका नेतृत्व कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल। अरविन्द केजरीवाल का जन्म कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुआ था। कृष्ण ने भी महाभारत के युद्ध में अत्याचार के खिलाफ और आम आदमी के अधिकारों की रक्षा के लिए सारथी बनाना स्वीकार किया था।

केजरीवाल भी कृष्ण की तरह अत्याचार के खिलाफ लड़ने वालों के रथ के सारथी बन गए हैं। सारथी बनकर अर्जुनों को उपदेश दे रहे हैं कि जुल्म का विरोध करो और आम आदमी के कष्टों का निवारण करो। उनहोंने राजनीति में विचार-धारा समाप्त कर अनुभूति की नयी धरा प्रवाहित की है। अनुभूति है आम आदमी के कष्टों से द्रवित होकर उसके सुख के लिए कसम करना।

इन सारी बातों को मद्दे-नज़र रखते हुए केज़रीवाल को इस बात के लिए सावधानी बरतनी पड़ेगी कि रथ को सुपथ पर कैसे चलाया जाये। इसे कुपथ की ओर मोड़ने के लिए भी साजिश कम नहीं होगी। बिजली और पानी की सुविधा जनता को देने की बात पर ठीक से विश्लेषण का काम करना होगा,क्योंकि कांग्रेस हमेशा अंधेरी कोठरी में काली बिल्ली की तरह मौजूद रहेगी।

‘आप” की नीयत पर संदेह की बात मैं नहीं कर रहा हूं। इतनी बात तो जरूर है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बहुत शातिर हैं। वे कभी भी गलत तरीके से वार कर सकते हैं।

कांग्रेस के युधिष्ठिर बन कर रहने वाले लोग भी कब ‘अर्द्ध सत्य ‘उक्ति के द्वारा अश्वत्थामा के सर पर वार कराकर अट्टहास करेंगे, यह कहना मुश्किल है। फिर राजनीति के ‘अश्वत्थामा’ सिर में जख्म लिए दर-दर भटकते रहेंगे। राजनीति में दोहरी और दोगली नीति को अद्धर्म नहीं कहा जाता है।

यह सौभाग्य की बात है कि हीरो के रूप में देश को एक नेता मिला है और वह है अरविन्द केजरीवाल,जोएक साधारण आदमी हैं और वह साधारण आदमी अपनी साधारण सामर्थ्य के बल पर शासन करेगा और जनता के दुःख-दर्द को दूर करेगा।

amrendra-kumar

………………अमरेन्द्र कुमार, वरिष्ठ पत्रकार।

 

 

 

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