कनफूंकवों ने रघुवर की बांट लगा दी…..

कनफूंकवे प्रसन्न है, उन्होंने वह काम किया, जो आज तक कोई न कर सका, यहां तक की विपक्षी दलों के नेताओं ने भी नहीं। मुख्यमंत्री रघुवर दास दोनों तरफ से गये। जनता की ओर से तो पहले ही जा चुके थे, अब जो उदयोगपतियों से जो सूचनाएं आ रही है, उनलोगों ने भी मोमेंटम झारखण्ड से दूरी बनाना शुरु कर दिया है।

पूर्व के अनुभवों और स्वयं द्वारा करायी गयी सर्वेक्षण रिपोर्टों के आधार पर इन उद्योगपतियों ने आज भी भारत के गुजरात, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्णाटक को निवेश करने के लिए बेहतर राज्य माना है, जिस कारण मोमेंटम झारखण्ड में पहुंचनेवाले उदयोगपतियों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

वरिष्ठ लेखक-पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र अपने फेसबुक वाल पर……

स्वयं झारखण्ड सरकार ने जो वीवीआइपी लिस्ट जारी की है, और जिन्हें राजकीय अतिथि बनाया गया है, उनकी संख्या मात्र 39 है, जिसमें अकेले दस तो सिर्फ भारत सरकार में शामिल मंत्रियों की संख्या है। उसके बाद चार केन्द्रीय पदाधिकारी, एक भाजपा सांसद और पांच दूसरे देशों के प्रतिनिधि, तथा अन्य अस्पताल चलानेवाले और तीन-चार उद्योगपति है, जिनकी भारत में साख उतनी नहीं, जितनी बताई जा रही है। इसी बीच जेएसडब्लयू ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल आने से रहे और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी की आने की संभावना भी कम है, हालांकि इनके आने की चर्चा जोरों से फैलाई जा रही है तथा झारखण्ड के वरीय अधिकारी उन्हें बुलाने के लिए एड़ी-चोटी भी एक किये हुए है। इसी बीच राज्य सरकार ने उन्हें भी वीवीआईपी बनाया है, जिनके खिलाफ झारखण्ड महालेखाकार ने कड़ी टिप्पणी की है।

इधर इन पूंजीनिवेशकों को बुलाने के लिए पूरे रांची शहर को इस प्रकार सजाया गया है कि पूछिये मत। सजावट ऐसी है कि जैसे लगता है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास के आराध्यों का आगमन रांची में हो रहा है। ड्राइवरों और सेवकों को अंग्रेजी पढाया और सिखाया जा रहा है। व्यवसायियों के समूह को कहा जा रहा है कि जिधर से निवेशक गुजरे, उनपर पुष्पवृष्टि कराने की वे व्यवस्था करें, घरों और दुकानों को सजाये, ठीक उसी प्रकार जैसे अयोध्या में राम आये थे और जैसे राम की अगुवाई में अयोध्या जगमगा उठा था, क्या मानसिकता है राज्य सरकार की? हद हो गयी…

इसके उलट झारखण्ड पीपुल्स पार्टी ने 16 फरवरी को झारखण्ड बंद का आह्वान किया है, हालांकि इस बंद का प्रभाव नहीं पड़ेगा, फिर भी ये बुलाया गया बंद झारखण्ड के लोगों के जनाक्रोश को अभिव्यक्त कर रहा है। इसी बीच मोमेंटम झारखण्ड के विरोध में 14 फरवरी को रांची मोरहाबादी मैदान के महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष महाधरना बुलाने का आह्वान आदिवासी संगठनों ने कर दिया है, जबकि 15 फरवरी को राज्य के सभी मुख्यालयों में व विभिन्न क्षेत्रों में सीएम के पूतला फूंकने का आह्वान इस संगठन ने किया है। इसका मतलब है कि मोमेंटम झारखण्ड को लेकर राज्य के कई संगठन अब मुखर होने लगे है।

इधर रांची के वरीय अधिकारियों ने भी कुछ ऐसे-ऐसे निर्णय ले लिये है, जिससे मुख्यमंत्री रघुवर दास हंसी के पात्र बनते जा रहे है, जैसे – रांची में निषेधाज्ञा लागू करना, किसी भी प्रकार के प्रदर्शन और धरने पर रोक लगा देना। ये सारी बातें बहुत कुछ बता दे रही है कि मोमेंटम झारखण्ड को लेकर सरकार कितनी डरी और कितनी सशंकित है?

इसी बीच एक वरीय अधिकारी ने बड़े ही हंसी अंदाज में कल प्रातः हमसे कहा कि मिश्र जी, लोग कुछ भी कर लें, ये मोमेंटम झारखण्ड होगा, ये अलग बात है कि पूंजी निवेश कितना होगा? या होगा भी या नहीं… और फिर उक्त महोदय ने अपनी गाड़ी स्टार्ट करायी और चल दिये, अपने गंतव्य की ओर… और मैं देखता रह गया। शायद उक्त अधिकारी ने इशारों ही इशारों में सब कुछ बयां कर दिया था…

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