….’और लालू जी का पैर टूटा, कार्टूनिस्ट पवन ने कराया पलास्टर’

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अपने फेसबुक वाल पर वरिष्ठ पत्रकार विनायक विजेता…..

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का पैर उनके चाहने वाले एक बच्चे के कारण टूट गया। यह तो खैर था कि पैर टूटने और राजद सूप्रीमो के जमीन पर धड़ाम से गिरने की आवाज सुन वहां मौजूद प्रख्यात कार्टूनिस्ट पवन दौड़े हुए आए और उन्होंने एक चिकित्सक को बुलाकर तुरंत राजद सुप्रीमों के टूटे पैर पर पलास्टर ऑफ पेरिस चढ़वाकर उनका पलास्टर करवाया।

चौकिये नहीं! ‘यह कोई हकीकत नहीं बल्कि एक फसाना है और एक प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट का अपने कार्टून के प्रिय पात्र राजद सुप्रीमो के साथ अपनी अभिव्यक्ति का तराना है।’

अपने परिवार में फरवरी से अब तक लगातार हुई तीन मौतों के बाद पटना आने पर जब मैं मंगलवार की देर शाम पवन जी के घर उनकी शादी की सालगिरह की मुबारकबाद देने पहुंचा तो घर में ताला लगा था।

मशहूर कार्टूनिस्ट पवन ने अपने मुफलिसी के दौर में अपने मित्रों से कर्ज लेकर करीब 14 वर्ष पूर्व अपने कार्टून के प्रिय पात्र लालू प्रसाद की यह मूर्ति 19 हजार रुपये में बनवाई थी, जिसे आज भी वह अपने परिवार और पूत्रों से भी ज्यादा चाहते हैं और उसका ख्याल रखते हैं……………

पवन जी को जब मैंने फोन किया तो उन्होंने कहा कि ‘लालू जी गिर गए हैं उनका पैर टूट गया है उनको लेकर हास्पीटल आया हूं। उन्होंने इतनी गंभीरता और संदजीगगी से ये बातें कहीं कि मै भी अवाक रह गया। कई पत्रकार मित्रों को फोन कर लालू जी का हाल-चाल लिया। पर किसी ने भी उनके दूर्घटनाग्रस्त होने की बात नहीं बतायी।

थोड़ी देर बाद ही पवन अपने आवास पर पहुंचे। मुझे देखेते उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उनके हाथों में कपड़े से ढकी एक आदमकद प्रतिमा थी। मैंने पूछा कि ये क्या है तो उन्होंने कहा कि ‘उपर चलिए न मरदवा,अभी बताते हैं।’ उनके घर में पहुंचने के बाद जब उन्होंने उस मूर्ति पर से कपड़े हटाए तो मैं यह देख कर चौक गया कि पलास्टर आॅफ पेरिस की बनी लालू प्रसाद की वही आदम कद प्रतिमा को लेकर वह अपनी बाहों में आए थे जिसे मैं लगभग 13 वर्षों से उनके घर में देख रहा था।

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की मूर्ति के साथ वरिष्ठ पत्रकार विनायक विजेता और मशहूर कार्टूनिस्ट पवन…..

उन्होने बताया कि कुछ दिनों पूर्व अहले सुबह उनकी नटखट बेटी ने इस प्रतिमा को साफ करने क्रम में गलती से गिरा दिया। आवाज सुनकर वो उठे और प्रतिमा को किसी तरह खड़ा किया। यह उस दिन की सुबह की घटना है जिस दिन शाम में नीतीश कुमार ने राजद से गठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार बनायी।

बकौल पवन नयी सरकार के गठन के बाद कार्टून बनाने की व्यस्तता के कारण वह अपने कार्टून के प्रिय पात्र जिनके कारण उन्होंने प्रसिद्धि पाई के पैरों का इलाज नहीं करा सके पर मंगलवार की सुबह उन्होंने पटना आर्ट कॉलेज के कुछ मित्रों को फोन किया जिन्होंने इस मूर्ति और पैर के टूटे अंग को लेकर आर्ट कॉलेज आने को कहा जहां वो गए और उनके मित्रों ने प्लास्टर आॅफ पेरिस से टूटे अंग का तो जोड़ ही दिया और फिर Golden कलर से उनकी प्रतिमूर्ति को रंग भी दी।

घर आने के बाद पवन ने अपने कार्टून के इस प्रिय पात्र राजनेता के गले में एक रुद्राक्ष की माला भी डाल दी जिस माला को नेपाल से आए किसी व्यक्ति ने पवन को भेट की थी। बताते चले कि पवन ने अपने मुफलिसी के दौर में अपने मित्रों से कर्ज लेकर लगभग 14 वर्ष पूर्व अपने कार्टून के प्रिय पात्र लालू प्रसाद की यह मूर्ति 19 हजार रुपये में बनवाई थी जिसे आज भी वह अपने परिवार और पूत्रों से भी ज्यादा चाहते हैं और उसका ख्रूाल रखते हैं।

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