…और राजगीर की मीडिया को यूं ऐड़ा बना पेड़ा खिला गया रोपवे प्रभारी

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राजनामा न्यूज डेस्क। नालंदा जिले की मीडिया का कोई सानी नहीं है। यहां एक से एक तेज तर्रार रिपोर्टरों की भरमार है। लेकिन उनकी बती तब गुल हो जाती है, जब कोई उन्हें ऐड़ा खिला कर यूं ही पेड़ा खिला जाता है और छोड जाती है सिर्फ खट्टी-मीठी डकार।

कल बिहार पर्यटन विभाग की लेटर पैड पर राजगीर रोपवे से जुड़ी एक सूचना भेजी गई थी, उसे पढ़ने के बाद न तो उसे प्रेस विज्ञप्ति मानी जा सकती है और न ही कोई आवश्यक सूचना। क्योंकि उस पर न तो जारीकर्ता का कोई हस्ताक्षर था और न ही कोई तिथि या पत्रांक अंकित।

उसमें सिर्फ इतना लिखा था कि  आवश्यक सूचना, सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि आकाशीय रज्जु मार्ग पथ में संचालित रोप का स्पालासिंग हेतु दिनांकः 26.08.2017 से 30.08.2017 तक रोपवे का संचालन बाधित रहेगा। 31.08.2017 से अपने निर्धारित समय से रोपवे का संचालन आरंभ होगा। विश्वासभाजन, प्रभारी, मुकेश कुमार, आकाशीय रज्जु पथ राजगीर।

इस बाबत मोबाईल पर रोपवे प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने मुख्यालय को सूचित किया था। काम हमही लोग कराते हैं। मुख्यालय को 20 अगस्त को ही इसकी सूचना भेज दिये थे। रांची से इंजीनियर आता है। काम उषा मार्टिन कंपनी कराती है। इसीलिये वे मैटर को पत्रकार लोग को दिये थे। पर्सनल मैटर को वे लोग समझ जाते हैं। ये सोच के दे दिये थे कि पेपर में छप जायेगा तो पब्लिक को भी जानकारी हो जायेगा।

जब श्री कुमार का ध्यान जारी लेटर से गायब हस्ताक्षर, तिथि और पत्रांक तथा प्रेस विज्ञप्ति नहीं आवश्यक सूचना की ओर दिलाया गया तो उनका कहना था कि वे अपने संपर्क के रिपोर्टर को नीजि जानकारी के लिये दिये थे, लेकिन उन्होंने कोई व्हाट्सएप्प मीडिया ग्रुप में डाल दिये प्रेस विज्ञप्ति के रुप में।

उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि राजगीर के सारे रिपोर्टर उनके भाई की तरह है। सिर्फ जानकारी के लिये दिया गया था कि कल अखबार में निकाल दिजीयेगा, लेकिन उन्होंने वायरल कर दिया।

उन्होनें कल बातचीत के दौरान सहरसा में होने की बात कहते हुये बताया कि रिपोर्टरों को खुद देखना चाहिये कि उस पर साइन नहीं है। तिथि और पत्रांक अंकित नहीं है। उन्हें तो सिर्फ देखने के लिये दिया गया था। खास कर एक एक अखबार के रिपोर्टर को, लेकिन उन्होंने वायरल कर दिया तो वे क्या करें।

हालांकि उन्होनें यह भी बताया कि उनके विभागीय सीनियर लोग ही ऐसा करने को कहा था कि इस तरह से अखबार में निकलवा दीजियेगा।

अब सबाल उठता है कि क्या इसी तरह से ऐसी ही खबरें छापी जानी चाहिये। आज सभी प्रमुख अखबारों के बिहारशरीफ संस्करण में राजगीर डेटलाइन से प्रमुखता से खबर छपी हुई है।

वेशक, एक संवाददाता का किसी से बेहतर संबंध उसे महत्वपूर्ण सूचनाएं दिलवाती है, जिसकी पड़ताल से एक बेहतर खबर बनती है। लेकिन, जिस तरह से यहां खबरे परोसी गई है, वे रिपोर्टरों का इस्तेमाल कर अपना उल्लु सीधा करने वाली बात स्पष्ट होती है। ऐसे भी राजगीर रोपवे के मेंटेनेंस के नाम पर विभागीय लूट का गोरखधंधा वर्षों से जारी है।

अगर यहां पारदर्शिता होती तो विभागीय लोग मीडिया का इस्तेमाल करने के लिये इस तरह के हथकंडे नहीं अपनाते कि उसी दिन खबर प्रकाशित हो, जिस दिन से मेंटेनेंस का कार्य हो।

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One comment

  1. बहुत खूब कहा आपने मुकेश सर आजकल मीडिया को लोग हलके में ले लेते है

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