…और मीडिया जनित ऐसी खबरों पर फफक पड़े भाजपा विधायक डॉ. सुनील

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हमारी एक्सपर्ट मीडया न्यूज नेटवर्क की टीम हर सूचनाओं की निष्पक्ष पड़ताल करने का हरसंभव प्रयास करती है। हम नीति-नीयत से अधिक नैतिकता को महत्व देते हैं….”

✍मुकेश भारतीय/एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क

कल देर शाम नालंदा जिले एक माननीय विधायक के लापता होने के संबंधित चस्पे पोस्टर की सूचना मिली। वह पोस्टर बिहारशरीफ विधानसभा से लगातार निर्वाचित भाजपा विधायक डॉ. सुनील कुमार से जुड़ा  है।

एक चिन्हित गांव में चस्पे पोस्टर के अनुसार विधायक अपने क्षेत्र से लापता हैं और ग्रामीण उन्हें ढूंढ रहे हैं। ईनाम की घोषणा कर रखे हैं।

वेशक यह सूचना काफी चौंकाने वाली थी। उसके साथ जिस तरह के फोटो-वीडियो क्लीप भेजे गए थे, उसमें कई राज छुपे होने के संकेत मिले। सब कुछ प्रायोजित दिख रहा था।

तब हमने बिहार शरीफ में अपनी नेटवर्क को सक्रिय किया। रहुई प्रखंड के जिस गांव क्षेत्र में विधायक के गायब होने के पोस्टर चस्पे थे, वहां एवं उसके आसपास के क्षेत्रों से अपने आश्वस्त सूत्रों द्वारा जानकारी जुटाई। विधायक से भी पहली बार दो टूक बात की।

डॉ. सुनील और उनका परिवार इन दिनों काफी मानसिक तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं। उनकी बेटी की हाल ही में हुई शादी के पहले से ही उनके पिताजी बीमार चल रहे हैं। इधर उनकी हालत काफी नाजूक है और फिलहाल वे साईं अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। हालत मरनासन्न (ईश्वर न करे) बताई जाती है।

विधायक को जब उनके क्षेत्र में उनके विरुद्ध सटे पोस्टर की ओर ध्यान दिलाया गया तो उन्होंने गमगीन आवाज में जो कुछ बताया, वह मीडिया जगत को काफी शर्मसार करने वाली है।

विधायक ने बताया कि यह कारीस्तानी उनके किसी विरोधी की नहीं, ग्रामीण की नहीं,  नालंदा की मीडिया में घुसे 2-3 युवकों की है। ये लोग पहले भी ऐसा कर चुके हैं। यह सब वैसे ही  मीडियाकर्मियों की नीजि हित की पूर्ति न करने का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि कि इसके पहले दैनिक जागरण अखबार के बिहार शरीफ दफ्तर से फोन आया और विज्ञापन के नाम पर 10-15 हजार रुपए की मांग की गई। अन्यथा खबर प्रकाशित करने की चेतावनी दी गई।

उन्होंने बातचीत के दौरान आगे तीन युवकों का नाम लिया और कहा कि मुश्किल दौर में पोस्टर के नाम पर यह सब शाजिस में इन्हीं का हाथ है। स्पष्ट तौर पर ऋषिकेष कुमार, सोनू पांडे, राजू मिश्रा का नाम लिया।

अब आगे हमने विधायक डॉ. सुनील के आरोपों को गंभीरता से लिया और उसकी पड़ताल में जुट गया। सारे आश्वस्त लोग उसकी पुष्टि कर रहे थे, लेकिन मीडियाकर्मियों पर साबित करना बड़ा मुश्किल लग रहा था।

लेकिन हमारी सारी मुश्किल मीडियाकर्मियों की हुई पुनः कारस्तानी ने आसान ही नहीं कर दिया, अपितु सारे राज खोल कर रख दिये। सारे खेल सामने आ गए। जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह सारा माजरा नालंदा की मीडिया के एक ‘गैंग’ द्वारा जनित है।

इस खबर को एक एप्प में चलाया गया। उसके बाद एक न्यूज चैनल में। उसे कई वेब न्यूज पोर्टलों में प्रेषित किया गया। अनेक सोशल ग्रुपों में वायरल हुआ। उसके अगली सुबह सिर्फ उसी अखबार में प्रकाशित किया गया, जिसकी वसूली के जिक्र विधायक ने पहले ही कर दी थी।

सबसे गंभीर और हैरान करने वाली बात यह है कि एप्प, न्यूज चैनल, वेब न्यूज पोर्टल और अखबार में जो कंटेंट प्रसारित-प्रकाशित किए गए, वे अक्षरशः एक समान हैं। उससे साफ स्पष्ट होता है कि एक ही मीडियाकर्मी ने उसे लिखा और अपनी ‘गैंग’ के जरिए  वायरल किया।

विधायक कहते हैं कि वे अपने क्षेत्र पर अधिक ध्यान देते हैं। वे मीडिया की सुर्खियां बने रहने में रुचि नहीं लेते। कतिपय मीडियाकर्मियों को पर्व-त्याहोरों पर गिफ्ट चाहिए। मन मुताबिक विज्ञापन के नाम पर पैसे चाहिए।

उन्हें आए दिन होटलों में पार्टी चाहिए। वे कहां से करें। राजनीति में वे झूठे ईमेज के लिए पैसा कमाने और बांटने के हेतु नहीं आए हैं।  इसीलिए वे मीडिया से दूरी बना ली है। पहले वे यथासंभव देते रहते थे। लेकिन इधर वे काफी परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं।

आगे कहा कि उनके पिता लंबे अरसे से बीमार चल रहे हैं। अभी वे गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती हैं। हाल ही में उनकी बेटी की शादी हुई है। उसमें खुद सीएम नीतिश कुमार भी शामिल हुए थे। ऐसे में ऐसे कथित मीडियाकर्मियों की ओछी हरकत………..( इसके आगे वे फफक पड़े)

बहरहाल, जनता द्वारा निर्वाचित किसी भी माननीय को लेकर स्वजनित सूचनाएं वायरल करना, पक्ष की जगह पैसे की मांग करना एवं वायरल कंटेंट ही अगले दिन हुबहु अखबार में प्रकाशित होना एक विभत्स्व चेहरा उजागर करता है, जो पूरे मीडिया जगत और उससे जुड़े लोगों को शर्मसार करती है।

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