ओ री दुनियाः गरीब का जीवन कुक्कुर से भी बदतर देखा

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....... युवा कार्टूनिस्ट नवीन कुमार अपने फेसबुक वाल पर।
……. युवा कार्टूनिस्ट नवीन कुमार अपने फेसबुक वाल पर।

क्या तुझको फुर्सत है रे जीवन को समझने और जीने की । यह तस्वीर कांटाटोली चौक पेट्रोल पंप (रांची) के पास की है । जिसे मैंने क्लिक किया है अपने मोबाइल से ।

jharkhand-poorइस तस्वीर में जो गरीब व्यक्ति का तस्वीर नजर आ रहा है । इसे मैं लगातार 3 दिन इसी आस – पास के क्षेत्र में देखा हूँ और अंततः जो बातें मुझे बहुत अद्भुत लगी उसे मैं इस पोस्ट पर लिख रहा हूँ । जैसा कि आपको भी नजर आ रहा होगा यह गरीब प्लास्टिक के बोरा को वस्त्र बनाकर पहना है ।

लोग इसके अगल-बगल जाना नहीं चाहते हैं क्योंकि उनको लगता है यह पागल है , जबकि मेरे नजरिये से यह गरीब व्यक्ति उन्ही लोगों के जैसा बिल्कुल नार्मल है या यूँ कहे तो उन लोगों से कहीं ज्यादा समझदार । क्योंकि अगर यह पागल होता तो अपने अंदरूनी अंगों का नंग धड़ंग प्रदर्शन करता बीच सड़क पर ही ।

पर इसे ज्ञात है कि अपनी इज्जत , जो कि आजकल के फ़िल्मी अभिनेता/अभिनेत्री या आप के संदीप कुमार जैसे अन्य नेताओं को भी नहीं है ।

जो तीन दिन मैंने इसे देखा उसमे एक और बहुत खास ध्यान देने वाली बात थी कि इस गरीब व्यक्ति को मैंने तीनों दिन अलग-अलग प्लास्टिक बोरा का ही वस्त्र में देखा ।

प्रथम दिन मैंने बाबा चावल के प्लाटिक बोरा वाले वस्त्र में देखा , दूसरे दिन मैंने पीला रंग के बोरा लखी भोग वाले प्लास्टिक बोरा में देखा औए इस तस्वीर में देखिये कोई tana tan वाले प्लास्टिक बोरा को वस्त्र बनाकर पहना है ।

यह महज संयोग नहीं बल्कि इस बात को स्पष्ट करता है कि इसके पास हमारे जैसे वस्त्र नहीं है पर हम लोगों के जैसे ही प्रत्येक दिन वस्त्र बदल बदल के पहनने की इक्षा है ।

और यह कुछ बोरा खोज के उसे रोज अपने लिए नव वस्त्र बना ले रहा है ।इसका वस्त्र नीचे स्कर्ट की तरह है ।

इसे बनाने के लिए इसने प्लास्टिक के पीछे वाले हिस्सा को भी फाड़ कर पहन लिया है और कमर में अटका रहे इसलिए कोई और प्लास्टिक रस्सी को बेल्ट बनाकर बाँध लिया है ।

ऊपर टी-शर्ट बनाने के लिए पीछे वाले हिस्सा के मध्य में गला के घुसाने के लिए आकारनुसार काट लिया है और उसी बोरा के बायां-दायाँ दोनों तरफ काट कर हाथ घुसा लिया है ।

न ही किसी से कोई अपेक्षा और न ही कोई बड़ी इक्षा। वस्त्र प्लास्टिक के बोरा का उपलब्ध है जो सदैव मिलेगा ही । और कूड़ा-कचरा में बहुत खाना उपलब्ध है ।

देश के आका और काका बड़ी-बड़ी बातें करने वालों नेताओं क्या यही ख़ाक हालात में देश का विकाश होगा । संभव हो तो 4G डाटा इस गरीब को मुफ्त को में कोई दे दीजियेगा और बोलियेगा जियो बेटा ।

ऐसे वक़्त ही मुंह में तपाक से एक वाक्य आता है ” योजना है सिर्फ अफसरों के लिए” । तदक्षण यह खयाल व्यथित भी कर दे रहा है कि आज ऐसे अनेक गरीब मनुष्य का जीवन संभवतः कुक्कुर योनी से भी बदतर हो गया है ।

आप भी ध्यान देते होंगे कि जब रात में गली के कुत्ते को कोई पीट जाता है , तब उसके दर्द और उस उठती आवाज़ मात्र से हमारे पालतू को होने वाली बैचेनी देखने लायक होती थी ।

परन्तु आज इंसान दूसरे को पीड़ा देकर खुद आगे निकल जाने की होड़ में इतना आगे चला गया है कि फुर्सत ही नहीं किसी का दर्द समझने की या यूँ कहें आज हम कुछ अधिक ही अंधे-बहरे हो गए हैं ।

शायद इन्हें गली के आवारा कुत्तों के स्तर तक आने के लिए भी मेहनत की दरकार है ? सवाल गंभीर अवश्य है , लेकिन मुश्किल जरा भी नहीं ।

……. युवा कार्टूनिस्ट नवीन कुमार अपने फेसबुक वाल पर।

 

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