ऐसे मनबढ़ू अभद्र महिला इंस्पेक्टरों ने एक निरीह पत्रकार को सरेआम घेरकर बेइज्जत किया

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एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। एक ह्वाट्सप ग्रुप पर सरकुलेट जिस कंटेंट को लेकर ये महिला पुलिसवाली सागर (मध्य प्रदेश) जिले के टीवी पत्रकार गोलू शर्मा को हड़का रही हैं, वो पोस्ट गोलू ने लिखी ही नहीं थी। जिस विनय सागर नामक सज्जन ने संबंधित कंटेंट पोस्ट किया है, वो खुल कर कह रहे हैं कि गोलू ने नहीं, मैंने लिखा है। पर पुलिसवालियों ने विनय को नहीं बल्कि गोलू को साजिशन टारगेट कर हड़काते हुए वीडियो बनवाने में जुट गईं। गोलू भी मौन रहा । ताकि पुलिसवालियों की कलई साफ तौर पर खुलती जाए। और हुआ भी वैसा ही……..

पत्रकार विनय सागर की इसी पोस्ट पर भड़की पुलिसवालियों ने पत्रकार गोलू शर्मा को निशाने पर लिया……

भड़ास4 मीडिया के संपादक यशवंत सिंह दो टूक लिखते हैं कि  हड़बड़ी में कोई राय न कायम करें, भले आंखों देखी सामने हो, वीडियो सामने हो… जिस पोस्ट पर पत्रकार को महिला इंस्पेक्टर हड़का रहीं, उस पोस्ट के असली लेखक खुलकर कह-लिख रहे हैं कि पोस्ट तो मैंने लिखी है, मुझसे संपर्क करो, शरीफ इंसान गोलू भइया से क्यों पूछ रही हो।

जी हां। ये लाल घेरे में दिखने वाले सज्जन एमपी के सागर जिले के टीवी पत्रकार गोलू शर्मा हैं। इनकी बस ग़लती इतनी है कि पुलिसवालियों के रौद्र रूप देखकर बेहद सहम गए और एकदम सन्नाटा खींच लिए। पुलिसवालियों ने कहा कि पढ़ो तो वो पोस्ट पढ़ने लगे जिसे इन्होंने लिखा ही नहीं।

पत्रकार गौरव शुक्ला लिखते हैं : “मित्र पुलिसिंग” की दुहाई देने वाली सरकारों को ये दोनों पुलिसवालियाँ मज़ाक बना रही हैं। जिसने (पत्रकार) लिखकर इनके पेंच टाईट करने की कोशिश की, उसका तमाशा इन दोनों ने मय फोर्स से घेरकर वीडियो बनाकर करा दिया। असलियत बिल्कुल अलग है। जो पत्रकार वीडियो में बेइज़्ज़्त होता दिख रहा है, दरअसल वो सम्बंधित खबर का लेखक नहीं है बल्कि साझक (शेयर करने वाला) है। रिसर्च में बहुत कुछ सामने आया है।

बकौल, पत्रकार शैलेन्द्र सिंह राजपूत, मध्य प्रदेश का सागर जिला।। यहां तमराज किलविश का वो डायलॉग फिट बैठ रहा है जहां ‘अंधेरा कायम रहे’ जैसे शब्दों को हकीकत में उतारने की कोशिश की जा रही है। ये दो महिला टीआई, अधिकारी होने के साथ महिला होने के वो सारे हथकंडे अपना रही हैं जिन्हें देखकर नर-नारी ख़ौफ़ से भर जायें। इनकी सोच ‘मिशन बदलापुर’ से ओतप्रोत नजर आ रही है।

किसी का परिचय बताते समय ये सामने वाले का सात जन्मों का वो रेकॉर्ड खोल देती हैं जिसमें पूरे खानदान के दलदल में फंसे रहने का विवरण होता है। फिर क्रोधातुर भाव के वो सारे वेग प्रदर्शित करती हैं जिसे देखकर आने वाले पहले से ही ख़ौफ़ज़दा होकर नतमस्तक हो जाते हैं।

अगर ऐसा होता रहा तो निकट भविष्य में वो भीषण परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं, जहां न्याय दिलाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे पुरुष इन महिलाओं के प्रति सोच बदलने पर मजबूर होते नजर आयेगें।

इन्हीं महिला इंस्पेक्टरों ने सागर यूनिवर्सिटी में ख़ौफ़ की चादर ओढाने की कोशिश की और विद्यार्थियों का भविष्य तबाह करने की बात की जा रही है। इधर अब एक निरीह बेकसूर पत्रकार है, जो कुछ ही दिन पहले अपना बड़ा ऑपरेशन कराकर फील्ड में वापिस लौटा है।

उसे प्री प्लानिंग के तहत मौका पाकर अकेले में टार्चर करने की सारी सीमायें तोड़ दी जाती हैं। उसे नामर्द से लेकर पब्लिक से मरवाने तक की कोशिश की जाती हैं।

मौके पर पत्रकार गोलू शर्मा अकेला था। उससे जो पोस्ट पढ़वाई जा रही थी, वो उसने नहीं, विनय सागर ने लिखी थी, जो सोशल मीडिया पर चिल्ला-चिल्ला कर बता रहे हैं कि मेरी सजा एक कमजोर को क्यों दी जा रही है? पोस्ट मैंने डाली थी तो सजा मुझे देनी थी, किसी बेकसूर को प्री प्लान के तहत क्यों लताड़ा गया?

जबकि सच्चाई ये है कि पत्रकार गोलू शर्मा मोतीनगर थाना अंतर्गत भूतेश्वर का निवासी है। संगीता सिंह मोतीनगर थाना प्रभारी हैं, जहां पर थाने की कारगुजारियों को दिखाने पर ये सब प्री प्लान के तहत हुआ है। इसमें सिविल लाइन टीआई रीता सिंह ने बखूबी साथ दिया है। इन्होंने महिला अधिकारी होने का फायदा उठाकर एक बेकसूर पत्रकार को सरेराह बेज्जत किया है।

नेशनल न्यूज़ ऑफ इंडिया के अनीश खान का कहना है कि दोनों ही महिला टीआई की कारगुजारी अब जनता के सामने आ गई है। आपने एक निरपराध पत्रकार को इतनी अकड़ दिखाई कि वो वेचारे मारे डर के सहम गए।

ऐसा तो भाजपा शासनकाल में कभी भी नहीं हुआ। तो हम सब पत्रकार क्या मानकर चलें कि हमारे सूबे के माननीय मुख्यमंत्री कमलनाथ जी की सरकार को जनता ने चुनकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।

साथ ही साथ हमारे सागर पुलिस अधीक्षक अमित सांघी  को यह बताना चाहूंगा कि आपके पुलिस महकमे में इस तरह का व्यवहार शोभायमान नहीं कहा जा सकता है। श्रीमान जी आप इन दोनो ही महिला टीआई के ट्रांसफर शहर से बाहर किसी थानों में कराने का कष्ट करें, जिससे वहां इनकी मौजूदगी से क्या बदलाव हो सकता है। यह भी आपको देखने को मिल जायेगा।

एक अकेले पत्रकार को सरेराह धमकाना निहायत ही बहुत गलत काम है। फिलहाल यहां मामला 499 मानहानि का तो बन ही सकता है। एक शासकीय लोक सेवक से खासकर महिलाओं से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती है। मैं एक बात आप सभी प्रदेश वासियों को बता देना चाहूंगा कि आज अगर मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार होती और गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह होते तो अब तक इस मामले में चार्जशीट फाइल कर दी गई होती। रिजल्ट घोषित भी हो गया होता।।

विकास सिंह बताते हैं कि  सागर की पुलिस बेलगाम हो गई है। कभी भी किसी को थप्पड़ जड़ दिया जाता है। सावर्जनिक जगह पर अपमानित कर दिया जाता है। गाली देना तों आम हो चुका है। एक मैसेज पर मेडम का गुस्सा सातवें आसमान पर है, उस बात के लिए जो कि गोलू शर्मा ने किया ही नहीं था।

अब सवाल गोलू शर्मा का है। इनको सभी के सामने ऐसा अपमानित किया गया कि इनका गुस्सा डर में बादल गया, क्योंकि सामने पूरी फोर्स खड़ी हुईं है। जिसमें कुछ लोग जूता मारने का भी बोल रहे है। इस स्थिति मौन रहना ही समझदारी थी। जो गोलू भाई ने किया। लगता है दोनों टीआई भूल गई है के ये जनता की सेवक है। गालियां तो ऐसे बक रही हैं, मानों इनके मां-बाप ही संस्कारहीन हों?

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