ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा भी खेल रहे यूं मीडिया कप क्रिकेट!

Share Button

“इस मीडिया कप क्रिकेट में जो चौंकानेवाला पहलू नजर आया वो ये कि इनमें से ज्यादातर रिपोर्टरवन तो कभी सड़क पर नज़र भी नहीं आते। तो इन्हें पत्रकार की संज्ञा दी किसने?….”

राजनामा.कॉम। जमशेदपुर में इन दिनों पत्रकारों पर क्रिकेट का बुखार सर चढ़ कर बोल रहा है। एक समाचार चैनल पर ये क़लमकार स्पोर्टस जैकेट में ऐसे नज़र आ रहे कि मानो विश्व कप जीतने जा रहे हैं। खैर हमारी दुआ है कि ई लोग क्रिकेटर बन जाएं ताकि कम से कम मीडिया में अच्छे लोगों को मौका मिले।

कौन पत्रकार है, कौन मालिक, कौन सरकारी कर्मचारीः

अब मीडिया हाउस चलनेवाले भी पत्रकारों की श्रेणी में आकर इस प्रतियोगिता की शोभा बढ़ा रहे हैं। वहीं ऐसा भी चेहरा दिख रहा है, जो कोल्हान यूनिवर्सिटी में सरकारी कर्मचारी है।

और दूसरे जिला से पत्रकरिता भी करता है, उसे भी जमशेदपुर प्रेस क्लब की मान्यता देकर इस प्रतियोगिता में खेलाया जा रहा है वो भी ड्यूटी के समय में।

तो क्या यूनिवर्सिटी इसकी इजाजत देती है ? इस प्रतियोगिता में ये भी देखा गया कि, नगर निगम का ठेकेदार भी पत्रकार बनकर खेलने पहुंच गया, आखिर कैसे.. किसने मान्यता दी।

अपने घर को छोड़ बाहरी को तरजीहः

 इस मीडिया कप प्रतियोगिता का आयोजक जमशेदपुर प्रेस क्लब है, जिसमें घाटशिला, डुमरिया, पोटका, बहरागोड़ा, चाकुलिया के आंचलिक पत्रकारों को नहीं खेलने का मौका मिला। उधर सरायकेला- खरसांवा जिला के केवल आदित्यपुर के सुपर 10 रिपोर्टरवन को खेलने के लिए खास तौर पर आमंत्रित किया गया।

जबकि हाल ही में आदित्यपुर के सुपर 10 रिपोर्टरवन सब जिला प्रशासन के साथ मैत्री क्रिकेटर खेलकर हार चुके हैं। हास्यास्पद तो ये है कि उक्त प्रतियोगिता में सुपर 10 रिपोर्टरवन ही खेले थे। 

यहां भी गम्हरिया, चांडिल, ईचागढ़, राजनगर, कुचाई, सरायकेला, खरसांवा आदि के आंचलिक पत्रकारों को पूछा तक नहीं था। जमशेदपुर के रिपोर्टरवन तो टुकुर- टुकुर ताकते ही रह गए थे।

कौन करता है फंडिंगः

आदित्यपुर और जमशेदपुर के पत्रकारों के लिए ऐसे आयोजनों के लिए कौन फंडिंग करता है ये बड़ा सवाल है।  जिला प्रशासन, सरकार या कोई और ? वैसे इसका भी पुख्ता प्रमाण है हमारे पास लेकिन उचित समय पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

जमशेदपुर प्रेस क्लब को किसकी मान्यताः

अब जब सरकार प्रेस क्लब के गठन को लेकर गंभीर है, तो आखिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन चुनाव कराकर क्यों नहीं जमशेदपुर प्रेस क्लब को मान्यता दे रही।

सवाल ये है कि बगैर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत जमशेदपुर प्रेस क्लब का चुनाव हुए किसी को चॉकलेट की तरह पद बंटा गया ? दूसरा और महत्वपूर्ण सवाल कि आखिर जिला प्रशासन के अधिकारी आखिर गैर मान्यता प्राप्त प्रेस क्लब के कार्यकमों में कैसे शरीक होते हैं।

हम ऐसे आयोजनों का विरोध नहीं करते मगर इस आयोजन में उनका भी उतना ही हक है जो दिन हो या रात कैमरा और कलम लिए खबरों के पीछे भागते फिरते हैं। केवल शहरी चकाचौंध और रसूखदार रिपोर्टरों के लिए ऐसे प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं होना चाहिए।

प्रेस क्लब को फंडिंग की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। “एक आंख में काजल एक आंख में शूरमा” सही नहीं। मीडिया हाऊस के संचालकों, सरकारी संस्थानों,  ठेकेदारों को पत्रकारों के इवेंट्स में शरीक होने से पहले पत्रकारों की पीड़ा का भी ख्याल रखना चाहिए।

Share Button
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.