एनएचएआई वेबसाईट का दावाः रांची-हजारीबाग एन.एच 33 फोरलेन सड़क पर एक भी मौत नहीं !

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nh33        –मुकेश भारतीय

रांची ऐसे तो रांची। नेशनल हाईवे ऑथिरीटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा नेवरी विकास रांची से हजारीबाग तक बनाई गई एन.एच 33 फोरलेन सड़क पर  पिछले 6 माह के दौरान किसी हादसे में कोई मौत नहीं हुई है। यह दावा है एनएचएआई के अधिकृत वेबसाईट का।

वेबसाईट पर 9 अगस्त, 2015 से 1 जनवरी, 2016 के बीच सड़क हादसा रिपोर्ट के मुताबिक रांची-हजारीबाग फोर लेन पर कुल 452 सड़क हादसे हुए हैं। इन हादसों में प्रभावित लोगों को 4 श्रेणियों में बांटा गया है।  घातक, गंभीर, मामूली और चोट।

वेबसाईट पर उल्लेख है कि यहां विभिन्न सड़क हादसों में कुल 38 लोगों को घातक, 316 लोगों को गंभीर, कुल 293 लोगों को मामूली और 368 लोगों को चोटें आई है। यहां मामूली और चोटिल को अलग-अलग श्रेणी में रखा गया है।

वेबसाईट के मुताबिक अत्यंत रोचक तत्थ यह है कि अभी तक किसी भी हादसे में किसी की भी मौत नहीं हुई है और प्रायः सभी हादसों में वाहन में तकनीकी गड़बड़ी तथा चालकों की लापरवाही से हादसा होना दर्शाया गया है।

जबकि रांची-हजारीबाग एन.एच 33 फोरलेन सड़क पर घटित प्रायः हादसा स्थल का मुआयना करने पर साफ स्पष्ट होता है कि घटना का अहम कारण निर्धारित मापदंड के अनुसार फोरलेनिंग कार्य न हो पाना है। चौक-चौराहों से लेकर सपाट सड़क तक के दायें-बायें और उतार-चढ़ाव को काफी बेतरतीब ढंग से बनाया गया है। कहीं अधिक चौड़ी तो कहीं अचानक कम चौड़ी सड़क की जाल में वाहन यूं ही फंस जाते हैं।

तकनीकी जानकारों का मानना है कि भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरुप डिवाईडरों का नहीं बनाया जाना भी सडक हादसे को अंजाम देते हैं। कहीं-कहीं सर्विस रोड का आभाव भी जानलेवा हो गई है। आबादी वाले क्षेत्रों में सड़क किनारे जारी अतिक्रमण खुद में बड़ी समस्या है हीं।

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