एडिटर-रिपोर्टर के बीच सहमति और स्पष्टता के लिए जरुरी है परस्पर संवाद

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किसी घटना या विषय के बारे में रिपोर्ट भेजने वाले रिपोर्टर के साथ क्या सामग्री चाहिए, क्या हो सकता है या क्या नहीं हो सकता जैसी बातों को लेकर सहमति और स्पष्टता होनी चाहिए. इसके लिए परस्पर संवाद बहुत ज़रूरी है.

divy aaryaजोसेफ़ वारूँगु बीबीसी फ़ोकस ऑन अफ़्रीका के पूर्व संपादक हैं. यहाँ वो बता रहे हैं कि फ़ील्ड से किसी रिपोर्टर से रिपोर्ट मँगवाने की प्रक्रिया क्या है.

सबसे पहले ये स्पष्ट करना ज़रूरी है कि रिपोर्ट किस बारे में है. उसमें क्या कोई नई बात है?

फिर, क्या संपादक और रिपोर्टर रिपोर्ट के फोकस को लेकर सहमत हैं? यदि रिपोर्टर और उसके संपादक के बीच रिपोर्ट के बुनियादी बिंदुओं को लेकर असहमति है, तो प्रक्रिया को आगे ले जाने से पहले इसे सुलझाना ज़रूरी है.

ये ध्यान रखना ज़रूरी है कि दफ़्तर में मौजूद संपादक या प्रोड्यूसर को ना केवल एक रिपोर्ट की बात पता है बल्कि उसे एक कार्यक्रम में शामिल होने वाली अन्य रिपोर्टों की भी जानकारी है.

इससे रिपोर्ट के बारे में उसकी सोच फ़ील्ड में काम कर रहे उस रिपोर्टर से अलग होगी जो केवल अपनी रिपोर्ट को लेकर व्यस्त है और उसे अन्य रिपोर्टों की अधिक जानकारी नहीं.

तरीक़ा

रिपोर्टर के साथ सहमति बनाएँ, जो कई बार हज़ारों किलोमीटर दूर बैठा होता है, कि आप उस रिपोर्ट को कैसे करना चाहते हैं.

संपादक या प्रोड्यूसर को इस बात की एक समझ होगी कि वो कैसी रिपोर्ट चाहते हैं जो कि उनके कार्यक्रम में कैसे इस्तेमाल होगी.

हो सकता है कि वो फोन पर बात करना चाहते हों जिसे फोनो या टूवे कहा जाता है, या एक इलेस्ट्रेटेड रिपोर्ट चाहते हों यानी ऐसी रिपोर्ट जिसमें घटनास्थल से अधिक आवाज़ें सुनाई दे रही हों.

रिपोर्ट जैसे भी की जाए, रिपोर्टर को ये पता होना ज़रूरी है कि संपादक क्यों उसी ख़ास तरीक़े से रिपोर्ट करवाने पर ज़ोर दे रहा है. रिपोर्टर इस बारे में अपने तरीक़े और सुझाव भी दे सकते हैं.

चाहे जैसे भी हो, कामयाबी बातचीत और सहमति पर निर्भर करती है.

अवधि

रिपोर्ट कितनी लंबी होनी चाहिए? ये ध्यान रखते हुए कि रिपोर्ट एक कार्यक्रम का हिस्सा है, इसकी अवधि निश्चित होनी चाहिए.

जैसे यदि रिपोर्ट दो मिनट लंबी होनी है तो रिपोर्टर का दस मिनट की रिपोर्ट भेजने का कोई मतलब नहीं.

रिपोर्ट जानी कब है? अगले हफ़्ते अगले सप्ताहांत? और कार्यक्रम में कहाँ जानी है?

क्या ये लीड है? क्या ये कोई हल्की-फ़ुल्की रिपोर्ट है? रिपोर्टर के लिए ये जानना ज़रूरी है क्योंकि इससे तय होगा कि वो उस रिपोर्ट को कैसे करना चाहता है.

क्या ये एक अकेली रिपोर्ट है या एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है – जैसे, किसी खेल आयोजन में हिस्सा ले रहे किसी ख़ास देश की रिपोर्ट.

ये सारी बातें पहले से तय होनी और इस पर रिपोर्टर तथा संपादक के बीच सहमति होनी ज़रूरी है. 

रिपोर्टरः स्पष्ट रहें

यदि संपादक या प्रोड्यूसर को पता है कि वो क्या चाहते हैं, तो रिपोर्टर को भी पता होना चाहिए कि रिपोर्ट किस बारे में है.

ये रिपोर्टर का काम है कि वो अपनी रिपोर्ट की हर बात को जाने. इससे वो इन बातों को संदर्भ में रख सकेगा और किसी ख़ास घटनाक्रम के महत्व को समझा सकेगा.

आप ये अपेक्षा नहीं कर सकते कि आपके संपादक या प्रोड्यूसर को आपकी रिपोर्ट के बारे में आपसे अधिक जानकारी होगी. हो सकता है कि यदि वे किसी स्थिति की गंभीरता को ना समझ पा रहे हों तो आपको उनके साथ तर्क करना पड़ेगा.

कमीशनिंग की प्रक्रिया एक साझेदारी की तरह होनी चाहिए. रिपोर्टरों की राय को नज़रअंदाज़ करनेवाले हठी प्रोड्यूसर या संपादक अक्सर असली कहानियाँ को नहीं कवर कर पाते.

तरीकाः रिपोर्टर की राय

प्रोड्यूसर या संपादक की किसी रिपोर्ट के बारे में एक सोच हो सकती है कि वो कैसी रिपोर्ट चाहते हैं, मगर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में रिपोर्टर की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

फ़ील्ड में मौजूद पत्रकार के अपने विचार हो सकते हैं कि किन बातों से रिपोर्ट मे जान आ सकती है.

बाधाएँ

आप रिपोर्ट कैसे कवर करने वाले हैं इसे लेकर आपको स्पष्ट और व्यावहारिक होना पड़ेगा. इसमें कितना समय लगेगा, और इसमें क्या किसी तरह की कोई सुरक्षा की भी चिंताएँ हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए.

और ऐसा अक्सर होता है, कि तकनीकी कारणों से रिपोर्टर को रिपोर्ट भेजने में देर हो जाती है और इससे रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे प्रोड्यूसर परेशान होते हैं.

  • प्रोड्यूसर और संपादक – धैर्य रखें
  • रिपोर्टर – वैकल्पिक योजना रखें

“यदि सैटेलाइट डिश काम न करे, तो हमें तय करना होगा कि हम क्या करेंगे. हो सकता है कि क्वालिटी ख़राब हो. इसलिए प्रोड्यूसर के लिए ये समझना ज़रूरी है ताकि वो अंत में आकर ये ना चीखें – ‘आप कहाँ हैं? आपका कोई पता नहीं?’”

‘प्लान बी’: विकल्प

अच्छे से अच्छी बनाई गई योजना बिखर सकती है. तब आपको ज़रूरत पड़ेगी विकल्प कीः ‘प्लान बी’.

जैसे, यदि रिपोर्टर घटनास्थल पर नहीं पहुँच सका, तो ऐसे में क्या वो अपने मोबाइल फ़ोन पर टू-वे कर सकेगा? कुछ न होने से कुछ भी हो जाना बेहतर है. जैसे बाढ़ की ख़बर देते समय कम-से-कम यही बता दें कि पुल टूट गया है, लोग फँसे हुए हैं.

ख़बर दे देने के बाद आपके पास बेशक समय होगा कि आप उस रिपोर्ट के बारे में और सामग्री जुटा सकें, जैसे विस्थापित लोगों से या बचावकर्मियों से बात कर एक विस्तृत रिपोर्ट बना सकें.

ब्यूरो

बीबीसी के दुनिया भर में ब्यूरो हैं. ये क्षेत्रीय कार्यालय रिपोर्टें कमीशन करवाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होते हैं जहाँ स्थित कोर कमिश्नर या प्रोड्यूसर लंदन के संपादकों की ओर से रिपोर्टें कमीशन करते हैं.

क्षेत्रीय ब्यूरो को ये सुनिश्चित करना होता है कि रिपोर्टर इस बात को समझता है कि लंदन क्या चाहता है. वो साथ ही संपादक को रिपोर्टर की सीमाओं के बारे में अवगत कराता है.

संपादक और रिपोर्टर के बीच ‘बिचौलिए’ के शामिल होने के कारण संवाद में स्पष्टता और ज़रूरी हो जाती है.

कोर कमिश्नर

कोर कमिश्नरों के लिए ज़रूरी है कि वो लंदन की प्रोडक्शन टीम की ही तरह व्यवस्थित रहे.

जैसे, यदि आप दिल्ली, नैरोबी या मयामी में बैठे हैं तो आपके लिए ज़रूरी है कि जब आप शिफ़्ट ख़त्म करने से पहले ढंग से काम को अगले व्यक्ति को सौंपें.

कमीशन करने की प्रक्रिया की सफलता या नाकामी इस बात पर निर्भर कर सकती है कि किसी कोर कमिश्नर ने संपादक, रिपोर्टर या क्षेत्रीय ब्यूरो में अगला दायित्व निभाने वाले व्यक्ति के साथ कितनी अच्छी तरह से बातचीत की है.

आप बातचीत की श्रृंखला में एक कमज़ोर कड़ी को स्वीकार नहीं कर सकते इसलिए ठीक से नोट्स लेना और वैकल्पिक योजना तैयार रखना आवश्यक है.

बदलाव की गुंजाइश रखें

याद रखें, आप उस जगह से दूर हैं जहाँ से रिपोर्ट आ रही है.

उस जगह रिपोर्टर है और मैं वहाँ नहीं हूँ. मैं अपनी ओर से सुझाव दे रहा हूँ और सामग्री रिपोर्टर दे रहा है.

अंततः, इस कार्यक्रम के लिए ज़िम्मेदार मैं हूँ, इसलिए स्वाभाविक है कि मुझे कुछ फ़ैसले करने होंगे, मगर इसमें मुझे ये ध्यान रखना होगा कि रिपोर्टर क्या कह रहा है.

कभी-कभी काम को लेकर मतभेद और तनाव हो सकते हैं, मगर रिपोर्टर और संपादक, दोनों का लक्ष्य समान है – अपने पाठकों और श्रोताओं के लिए यथासंभव अच्छी रिपोर्टें देना.

इसे ठीक से करने की कुंजी है – संवाद. (साभारः बीबीसी)

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