एक व्यक्ति नहीं, संस्था थे रमेशजी : शिवराज सिंह चौहान

Share Button

मुझे याद है कि जब मैंने इंदौर में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की थी, उस समय प्रदेश में कोई भी बड़ा औद्योगिक घराना आना नहीं चाहता था। कई लोगों ने इस आयोजन को लेकर मजाक भी बनाया। उस कठिन समय में रमेशजी ने न सिर्फ मेरा हौसला बढ़ाया बल्कि खुलकर सहयोग दिया।

उनके ही सुझावों और व्यक्तिगत संबंधों से उस समिट में देश के ही नहीं बल्कि विदेश के भी कई प्रतिष्ठित उद्योग समूहों ने भाग लिया। यह उन्हीं के प्रयासों का ही परिणाम था कि कई औद्योगिक घरानों ने मप्र में पूंजी निवेश भी किया।

वे मप्र की बेहतर छवि बनाने के लिए प्रयत्नशील रहे। हर बार उनका अतुलनीय सहयोग हमें प्राप्त हुआ। से प्रदेशवासी कभी भूल नहीं पाएंगे। असल में वे पूरे मध्यप्रदेश के ब्रांड एंबेसडर थे।

रमेशजी प्रदेश में हर किसी के लिए आसानी से उपलब्ध थे। रियल एस्टेट, सोयाबीन उद्योग, टैक्सटाइल्स, चेंबर आफ कामर्स और वैश्य समाज, सभी लोगों से उनका जीवंत संवाद बना रहता था।

वह अक्सर लोगों के साथ मेरे पास समस्याओं को लेकर आते थे। किंतु उनकी एक अच्छी बात यह थी कि वह समस्याओं के साथ समाधान और सुझाव भी लेकर आते थे। वे सरकार की सीमाओं को समझते थे। जिन लोगों के साथ मांग और समस्याओं को लेकर आते थे, वे उनसे कहते थे कि हमें राज्य के हितों व राजस्व का भी ध्यान रखना है। हम सभी को मिलकर सरकार का सहयोग भी करना है। उनकी यह बात मुझे बहुत ही अच्छी लगती थी।

उन्होंने पूरे देश में दैनिक भास्कर को आगे बढ़ाया। यह सिर्फ भास्कर समूह या एक कंपनी का ही प्रसार नहीं बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में मप्र के वर्चस्व का प्रसार था। दैनिक भास्कर आगे बढ़ा तो प्रदेश का नाम भी बढ़ा।

हमें सदैव गर्व रहा कि मप्र का एक उद्योगपति इतना सफल हुआ। मुझे याद है कि दैनिक भास्कर पुराने भोपाल से निकलता था। वहां से प्रगति करते हुए वह आज सिर्फ भारत का ही नहीं, विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय अखबार बन गया है।

दैनिक भास्कर की सफलता के शिखर पर पहुंचने की यह यात्रा रमेशजी के अथक परिश्रम, बुद्धिमत्ता एवं दूरदर्शिता का ही परिणाम है। दैनिक भास्कर आज अपनी निष्पक्ष लेखनी के लिए स्थापित हो गया है।

पत्रकारिता में नए प्रतिमान छूने के साथ ही रमेशजी हमेशा सामाजिक सराेकारों के लिए संवेदनशील भी रहे। पानी बचाने के अभियान में उनके मार्गदर्शन में भास्कर ने लोगों में जाग्रति लाने और उनके व्यवहार परिवर्तन में अतुलनीय सहयोग दिया। चाहे सूखे रंगों की होली हो या सिंहस्थ में वैश्य महासभा के द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यस्था, ये पुण्य कार्य हमेशा याद किए जाएंगे।

एक बड़े पत्र समूह की बागडोर संभालने की महती जिम्मेदारी के साथ ही वे सामाजिक एकता और समरसता के लिए हमेशा कार्यरत रहे। उनकी कोशिश होती थी कि सभी धर्मों और वर्गों के लोग मिल जुलकर रहें। उनके होली-मिलन और ईद-मिलन जैसे कार्यक्रम समाज को यही संदेश देते रहे। यह उनका ही निरंतर योगदान रहा, जिससे राजधानी का भोपाल उत्सव मेला प्रदेश की पहचान बन गया।

पर्यावरण के प्रति भी रमेशजी की खास चिंता थी। नर्मदा सेवा यात्रा में प्रारंभ से ही उनका सहयोग एवं मार्गदर्शन हमें मिला। वे मेरे साथ होशंगाबाद भी गए।

उन्होंने अल्पसंख्यक समाज के प्रतिष्ठित लोगों को नर्मदा सेवा यात्रा का महत्व बताकर इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया था।

मैं बड़े दुखी मन से यह बता रहा हूं कि उन्होंने दो जुलाई को नर्मदा तट पर ओंकारेश्वर में मेरे साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लेने का वादा किया था। मुझे दुख है कि इस कार्यक्रम में अब वो मेरे साथ नहीं होंगे।

रमेशजी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनके चले जाने से व्यापार, उद्योग और सामाजिक सरोकारों से चिंतित व्यक्तियों में शून्यता आ गई है। उनका स्नेह मुझे उस समय से प्राप्त होता रहा जब मेरी राजनीतिक शुरुआत हो रही थी। वह एक व्यक्ति नहीं, एक संस्था थे। वह मेरे बड़े भाई थे। हम प्रदेशवासियों के लिए गौरव थे। उनका जाना मेरे और मेरे परिवार के लिए व्यक्तिगत क्षति है।

मुझे भरोसा नहीं हो रहा कि अब रमेशजी हमारे बीच नहीं रहे। ऐसा लग रहा है मानो रमेशजी आएंगे, मप्र के औद्योगिक विकास, उद्योग, व्यापार, रियल एस्टेट या सामाजिक सरोकारों से संबंधित कोई समस्या के निदान और विकल्पों के साथ आएंगे और प्रदेश के विकास की बात करेंगे।

वे जितनी शान से जीए, उतनी ही शान से चले गए। जीवनभर लोगों की मदद करने वाले व्यक्ति ने अंतिम समय में किसी की मदद नहीं ली। उनको मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। बड़े शौक से सुन रहा था जमाना, तुम ही सो गए दास्तां कहते-कहते..

……शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मप्र.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...