एक और नवरूला? अपराधियों ने बेटी को बेचा, मां कर रही अनशन और पुलिस बेफिक्र

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नालंदा(जयप्रकाश नवीन)। ‘इंसाफ जालिमो की हिमायत में जाएगा, ये हाल है तो कौन अदालत में जाएगा’ मशहुर शायर राहत इंदौरी की यह पंक्ति नालंदा के उस मां पर सटीक बैठती है, जो अपनी बेटी की बरामदगी को लेकर पिछले चार महीने से पुलिस प्रशासन की चौखट खटखटा रही है, लेकिन इंसाफ कोसो दूर है।

बिहार के मुजफ्फरपुर की नवरूला कांड की एक और पुनरावृत्ति नालंदा में देखने को मिल रही है। हूमैन ट्रैफिकिंग की शिकार एक छात्रा को नालंदा की पुलिस चार महीने में भी खोज नही निकाल पाती है। उल्टे गिरफ्तार अपराधी थाने से फरार हो जाता है। पुलिस छात्रा की बरामदगी को लेकर पीड़ित परिवार से सवा लाख खर्च करवा डालता है। लेकिन नतीजा सिफर। पुलिस के हाथ खाली।

यहां तक कि सीएम नीतीश कुमार की निश्चय यात्रा नालंदा में 29 दिसम्बर से शुरू हो गई । लेकिन यह कैसी निश्चय यात्रा रही कि सीएम पीड़ित परिवार की सुध तक नही ले पाते हैं। क्या उन्हें पीड़ित परिवार के धरने की जानकारी नही है?

बिहारशरीफ के बड़ी पहाड़ी निवासी सीता कुमारी की 14 वर्षीय पुत्री सिमरन अपनी सहेली के साथ 16 अगस्त को स्कूल के लिए घर से निकलती है, लेकिन घर नही लौटती है। शक की सूई उसकी सहेली पर जाता है। छात्रा की माँ लहेरी थाना में अपहरण का मामला दर्ज कराती है। पुलिस अपहृत छात्रा की सहेली से पूछताछ करती है। लेकिन कोई सुराग हाथ नही लगता।

पुलिस की निष्क्रियता को लेकर ग्रामीणों ने 10 दिसम्बर को हंगामा और सड़क जाम किया था। तब जाकर पुलिस एक्शन में आई और यह पोल खोली कि लापता छात्रा हूमैन ट्रैफिकिंग की शिकार हो गई है। अपराधियों ने उक्त छात्रा को दिल्ली में किसी मीरा देवी उर्फ पुतुल के हाथों बेच दिया है। पुलिस ने उक्त महिला को कुछ दिन पहले गिरफ्तार भी किया, लेकिन महिला थाने से फरार हो गई।

इस घटना में एसपी ने दो पुलिस कर्मियों को सस्पेंड भी किया था। बाद में फरार आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया। मगर आज तक यह पता नही चल सका कि छात्रा जीवित भी है या नही। कहते है पुलिस जनता की सहायक है, लेकिन पुलिस ने उसकी शादी में बचाकर रखे सारे रूपये खर्च करा डाले, लेकिन उनकी बेटी को वापस नही ला सके।

थक हार कर पीड़ित परिवार 27 दिसम्बर से धरना और भूख हड़ताल पर बैठ गई है। जिला प्रशासन ने धरना पर बैठे महिलाओं को हटाने का भी प्रयास किया, लेकिन पीड़ित सीता देवी का कहना है कि जब तक उसकी बेटी नहीं मिलती है तब तक उसका अनशन जारी रहेगा।

इधर शुक्रवार को सीता देवी की हालत काफी बिगड़ गई। सदर अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा इलाज जारी है।इधर इस मामले को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। पूर्व विधायक राजीव रंजन समेत कई विपक्षी नेताओं ने धरना पर बैठे महिलाओं से मुलाकात की। राजीव रंजन ने कहा कि जिले में अपराध बढ़ रहा है,लोगों की हत्याएं हो रही है। अपहरण उधोग चल रहा  है।अगर छात्रा की बरामदगी नही होती है तो एनडीए नालंदा में धरना देगा ।

सबसे बड़ी बिडम्बना क्या होगी कि जिस अपने जिले में सीएम की निश्चय यात्रा शुरू होती है, उसी जिले में इंसाफ के लिए एक माँ भूख हड़ताल पर बैठी हो, आखिर यह कैसी संवेदनहीनता है। हाड कपा देने वाली ठंड में एक परिवार आसमान के नीचे भूख हड़ताल और धरने पर बैठा हो और जिले के सभी पदाधिकारी सीएम की तीमारदारी में लगा हो, उसकी सुध लेनी की फूर्सत शायद किसी के पास नही है।आखिर सिमरन का हाल भी क्या मुजज्फफरपुर की नवरूला की तरह ही होगा?  यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

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