एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने हिला डाली सुशासन बाबू की चूल !

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नालंदा(जयप्रकाश नवीन)।   “एक तुम्हारा होना क्या से क्या कर देता है, बेजुबान छत -दीवारों को घर कर देता है ” माहेश्वर तिवारी की यह पंक्ति उपेन्द्र कुमार सिंह जैसे शख्स पर सटीक बैठती है, जो हमेशा सिस्टम से लड़ता आया है, सही को सही और गलत को बेबाकी से गलत कहता हो।क्षेत्र के  विधायक को ,सांसद को और राजनीतिक दलों को जिस कार्य को करना चाहिए उसे उपेन्द्र कुमार सिंह ने कर दिखाया ।उनका यह कार्य उन नेताओं और राजनीतिक दलों के चम्मचों के गाल पर तमाचा है जो चंडी में विकास की बात करते हैं ।

सामाजिक और आरटीआई एक्टिविस्ट उपेन्द्र कुमार सिंह
सामाजिक और आरटीआई एक्टिविस्ट उपेन्द्र कुमार सिंह

एक सामाजिक और आरटीआई एक्टिविस्ट ने वह कर दिखाया जो नालंदा के चंडी प्रखंड में पिछले तीन दशकों में किसी ने नहीं किया है । उन्होंने अपने सूचना के अधिकार का उपयोग  करते हुए चंडी रेफरल जो फाइलो में दबी थी उसका पर्दाफाश किया है । उनके द्वारा मांगी गई सूचना से खुलासा हुआ कि जिस रेफरल अस्पताल को चंडी की जनता भूल चूँकि थी वह तो 16 साल पहले ही रेफरल अस्पताल का दर्जा प्राप्त कर चुका है। राजनीतिक उपेक्षा और क्षेत्रीय विधायक की उदासीनता से यह मामला राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के फाइलो में दम तोड रहा था ।

इससे पहले भी उपेन्द्र प्रसाद सिंह ने मनरेगा, मिड डे मिल,जनवितरण प्रणाली सहित चंडी के कई विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और पदाधिकारियों के कार्यशैली को आरटीआई के माध्यम से उजागर कर पदाधिकारियों की चूले तक हिला कर रख दी है ।

आरटीआइ कार्यकर्ता उपेन्द्र प्रसाद सिंह के द्वारा मरणासन्न  चंडी रेफरल अस्पताल को जीवित करने पर चंडी के लोगों ने उन्हें बधाई दी है । उन्हीं के प्रयास से चंडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जगह रेफरल अस्पताल का बोर्ड लगा । जिससे लोगों को पता चला कि रेफरल अस्पताल अपने अस्तित्व में आ गया है । वही अब उपेन्द्र प्रसाद सिंह विलोपित चंडी विधानसभा को लेकर एक लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं ।

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